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मित्रता दिवस पर कविता: सहेलियां जब मिलती हैं...

Updated: शनिवार, 5 अगस्त 2023 (12:46 IST)
सहेलियां जब मिलती हैं...
हंसी तितलियों-सी उड़ती है
बातें झरने-सी झरती है
आंखें अनकहे राज़ सुनाती है
...सहेलियां जब मिलती हैं। 
 
हवा कुछ ज्यादा इठलाती है
रात जाने कौन-सी रागिनी गाती है
दीवारें धीमे-धीमे गुनगुनाती हैं
...सहेलियां जब मिलती हैं... 
 
चिरैयों-सी चहकती हैं
जूही-सी महकती हैं
रूठती-मनाती, ठुनकती हैं
...सहेलियां जब मिलती हैं।
 
दीवारें खामोशियां बुनती हैं
हवा भी चुप-सी गुज़र जाती है
हंसी किस बियावान में खो जाती है
....सहेलियां अब कम मिलती हैं। 
 
किसी रात जी भर बतियाती हैं
फिर जूही-चिरैया बन जाती है
बंद आंखों में रोशनी भर जाती है
...सहेलियां ख्वाबों में मिलती हैं...' 

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लेखक के बारे में
शैली बक्षी खड़कोतकर
शैली बक्षी खड़कोतकर मीडिया शिक्षक एवं स्वतंत्र लेखिका हैं।.... और पढ़ें

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