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तुम जरूर आओगे मित्र...

मंगलवार,अगस्त 5, 2008
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मेरी तस्वीर मेरे मित्र

शनिवार,अगस्त 2, 2008
कहीं भटकककर मस्त होता हूँ, अपने ग़ुमान में जब मैं कभी, विरले ही हक़ से मुझे डपटकर, मेरे मित्र तुम पिता बन जाते हो.
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रिश्तों के बाग में इसकी खूबसूरती अनूप जैसे पूनम की रात में चाँद का स्वरूप। मौजूदगी इसकी बनाती अशुभ को भी शुभ जैसे पनघट के सिरहाने सजी मखमली दूब
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जिंदगी की रपटीली राहों पर सफर आसान बनाने वाला हमराही है दोस्त। दगाबाजी, फरेब और स्वार्थ के बीहड़ में पूरे भरोसे के साथ टिमटिमाने वाला दीया है दोस्त।
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दोस्ती की एक कहानी

शनिवार,अगस्त 2, 2008
दोस्ती की एक कहानी
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एक दोस्ती ऐसी भी

शनिवार,अगस्त 2, 2008
वर्ष 2002 में जब गुजरात में दंगे हुए थे तब असंख्य लोग मारे गए थे। लोगों में मतभेद, द्वेष, घृणा जैसी भावनाएँ पनप रही थीं। पूरा समाज इस आग में जल रहा था।
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हर किसी के जीवन में कभी ना कभी कुछ ऐसे पल आते हैं जब वो अपने आप को हज़ारों लोगों के बीच में रहकर भी अकेला पाता है। अपने दफ्तर में या किसी पार्टी में भी उसे यही महसूस होता है कि वह कितना अकेला है।
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किसी भी समाज से सरोकार रखने वाले मनुष्य के लिए 'रिश्ता' शब्द बड़ी अहमियत रखता है। हम परिवार में विभिन्न रिश्तों की डोर से बँधे होते हैं।
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जिसने मुझे जीना सिखाया

शनिवार,अगस्त 2, 2008
जिसने मुझे जीना सिखाया।
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दोस्ती क्या है?

शनिवार,अगस्त 2, 2008
दोस्ती क्या है?
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व्यक्तित्व की समानता ही दोस्ती को जन्म देती है और इसमें व्यक्ति पृष्ठभूमि, धर्म, शिक्षा आदि के कोई मायने नहीं होते हैं। वर्तमान में लोगों के पास समय नहीं है। इस कारण दोस्ती में घनिष्ठता में कमी हो रही है और गंभीरता भी नहीं है।
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मित्रता दिवस पर आप मित्रों की महकती यादों को बाँट सकते हैं हमारे साथ । शामिल हो जाए एक संदेश भेज कर इस मित्रोत्सव में। दोस्त और दोस्तों से जुड़ी मीठी कोमल यादों का स्वागत है यहाँ।
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दोस्ती की महक

शनिवार,अगस्त 2, 2008
दोस्ती महक
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ये रिश्ते उस स्पंदन की अनुभूति होते हैं, जिनका आधार ही दोस्ती की नींव है।
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एहसास तुम्हारी दोस्ती का
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मित्रता एक अनमोल उपहार

शनिवार,अगस्त 2, 2008
अपने आपको एक अच्छा मित्र साबित करना और अपने पास अच्छे मित्र होना, ये दो ऐसी चीजें हैं जो न केवल आपकी दिनचर्या को खुशनुमा बनाती हैं बल्कि आप जीवनभर आत्मसंतोष को अनुभव करते हैं।
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जय... इतना बड़ा धोखा!

शनिवार,अगस्त 2, 2008
दोस्ती बॉलीवुड के निर्माताओं का प्रिय विषय रहा है। दोस्ती की परिभाषा, मर्यादा, त्याग, आपसी भावना का खुलकर इस्तेमाल किया गया है। दोस्ती शब्द को लेकर ही कई फिल्में बन चुकी हैं।
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कैसे निभाएँ दोस्ती

शनिवार,अगस्त 2, 2008
इस नश्वर संसार में भाई-बहन, माता-पिता, मामा-मामी आदि अनेक रिश्ते हैं, जिन्हें समाज ने पारिवारिक नाम दिया है। इन रिश्तों की अपनी-अपनी मर्यादाएँ हैं।
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तू न होना दूर

शनिवार,अगस्त 2, 2008
तू न होना दूर
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कृति प्रदत्त रिश्तों का बंधन जन्म के साथ ही जुड़ा होता है। इन पारिवारिक रिश्तों के साथ-साथ एक बहुत महत्वपूर्ण रिश्ता होता है- दोस्ती का रिश्ता, जो हम अपने विवेक से बनाते हैं।
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