Hanuman Chalisa

फादर्स डे पर कविता : कदमों की आहट

Updated: शुक्रवार, 19 जून 2020 (13:55 IST)
Fathers Day 2020
- मनीषा कुशवाह
 
आराध्य निश्छल सा मन
मेरे कदमों की आहट के साथ
चलते मेरे पिता के कदम
 
न शिकवों की शिकन
न शिकायतों का आडंबर
दुनिया के इस बीहड़ वन में
मेरे लिए पगडंडी बनाते हैं
उनके कदम...
 
जब तपिश की धूप में
झुलसे मेरा तन
शब्दों की अभिव्यक्ति से 
बांध देते मेरा मन
 
प्रशस्त करते मेरा मार्ग 
प्रकाश पुंज की तरह
मेरे नन्हे कदमों से बिदाई तक
हर पल यूं ही मेरे सपनों को बुनते
मेरे पिता के कदम...
 
और एक दिन पिया के साथ चल देती मैं 
किसी और का घरोंदा सजाने को
फिर भी कम न होता 
उनका अगाध प्रेम
 
आश्वासन से भरी उनकी बातें
जिंदगी के हर मोड़ पर साथ देती मेरा
और निहारिका की भांति अपलक जाग कर
मेरा इंतजार करते 
मेरे पिता के नयन...
 
आराध्य निश्छल सा मन
मेरे कदमों की आहट के साथ चलते
मेरे पिता के कदम...।

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

इंदौर में आयोजित होगा राज्य स्तरीय- लक्ष्य मंथन योगासन प्रतियोगिता

दिलों को जोड़ने की एक मुहिम: जानिए राजीव गांधी की जयंती और 'सद्भावना दिवस' का कनेक्शन

आसमान से बरसेगा सेहत या संकट? जानिए बारिश का पानी पीने का सच!

Ebola Virus: क्या है इबोला वायरस? जानिए इसके लक्षण, संक्रमण और बचाव के आसान उपाय

बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

अगला लेख