ramcharitmanas

पितृ दिवस पर कविता : जीवन में जरूरी है नदी की मिठास

Updated: शुक्रवार, 19 जून 2020 (13:53 IST)
Fathers Day Poem
 
जितनी जरूरी है जीवन में हमारे
नदी की मिठास
उतना ही जरूरी है
समुद्र-सा खारापन भी।
 
आसान नहीं है
बनना सागर 
सागर बनने के लिए चाहिए
विशालता, गहराई और 
सबको आत्मसात करने का गुण।
 
माना कि मौन रहकर
सागर
समाहित कर लेता है स्वयं में
उसकी ओर आने वाली हर नदी को
पर नदियों ने समझा है कभी 
दर्द सागर का?
 
उफनता और सिमटता भी है
यदि वह तो केवल
प्रयोजन होता है उसका
स्वयं में औरों को मिलाने का।
 
सागर के ये सारे गुण
होते हैं एक पिता में
और मिलने वाली नदियां
होती हैं उसकी वे विभिन्न भावनाएं
जो देती हैं मिलकर विस्तार
अपने परिवार को
जहां से चलता है सृष्टि का विधान।
 
हां, यह अलग बात है
नहीं सुहाता है उसका खारापन
लगती हैं नदियां ही मीठी
पर सोचें जरा
सागर भी हो जाए यदि मीठा
तो क्या
उससे संरक्षित, उसका परिवार
रह पाएगा सकुशल?
 
इसीलिए कहता हूं
जितनी जरूरी है
जीवन में हमारे
नदी की मिठास
उतना ही जरूरी है
समुद्र-सा खारापन भी।
 
लेखक के बारे में
देवेन्द्र सोनी

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

जब उम्मीद थक जाए, तब साहस काम आता है

असली पनीर और Analog Paneer में क्या है फर्क? खरीदने से पहले ऐसे करें पहचान

लोकतंत्र की पहली पाठशाला: छात्रसंघ चुनावों की वापसी क्यों जरूरी? जानें युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी

गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस: जानिए इतिहास और इसका महत्व

अगला लेख