...लेकिन, पीएम असली किसानों की अनदेखी कर रहे हैं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कैमरे पर बोल सकते हैं... वे पार्लियामेंट में बोल सकते हैं... वे कच्छे (गुजरात) में बोल सकते हैं... वे फर्जी किसानों से बात कर सकते हैं... लेकिन, वे असली किसानों की अनदेखी कर रहे हैं।
दरअसल, मोदी सरकार के किसान कानूनों के खिलाफ एक तरफ जहां किसान सड़कों पर डटे हुए हैं और वहीं सोशल मीडिया पर भी किसानों के समर्थन में समानांतर जंग लड़ी जा रही है।
ट्विटर पर #किसान_विरोधी_सत्ता_छोड़ो ट्रेंड कर रहा है और ट्विटर यूजर्स किसानों के समर्थन में खूब ट्वीट कर रहे हैं। गड़रिया राज नामक ट्विटर हैंडल से लिखा गया- 'वे' बांटों और राज करो की नीति अपना रहे हैं, लेकिन भारतीय अपने अधिकारों के लिए मिलकर लड़ेंगे। भारत की एकता और विविधता जारी रहेगी।
कुमार पवन ने लिखा- कहां है लोकतंत्र? तीन महीनों से किसान अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।They are trying to divide nd Rule . But Indians are coming together to fight for their rights .. India's unity in Diversity will remain forever....#किसान_विरोधी_सत्ता_छोड़ो #ModiStopIgnoringFarmers pic.twitter.com/u336mnEos9#ModiStopIgnoringFarmers pic.twitter.com/g6HZzx1EUL
— गड़रिया राज (@RaazGadariya) December 26, 2020
एएनआर नामक ट्विटर हैंडल से भाजपा को निशाना बनाते हुए लिखा कि भाजपा भारतीय कृषि को तबाह करना चाहती है। वहीं, अवीर ने लिखा- यह सरकार अंधी, बहरी, अज्ञानी और अभिमानी है। डॉ. सईद मोहम्मद साबिर ने लिखा- आप हमारे किसानों को प्रताड़ित नहीं कर सकते।Where is this democracy, the farmers have been demanding their rights for the last three months. But the government is Ambani Andani's spoon. #किसान_विरोधी_सत्ता_छोड़ो#ModiStopIgnoringFarmers #ModiStopIgnoringFarmers pic.twitter.com/MeOOrcqe1O
— kumar pawan (बेबाक पवन)(10k) किसान पुत्र (@kumarpa53881895) December 26, 2020
इसी तरह प्रवीण सिंह चौहान ने लिखा कि किसान देश विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि किसान विरोधी कानूनों को रद्द किया जाएगा।
उल्लेखनीय भारत में कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर डटे किसानों का आंदोलन को 30 दिन हो चुके हैं और अभी तक उनकी मांगों का कोई हल सामने नहीं आया है।

