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निर्जला एकादशी के दिन करें प्रमुख रूप से ये 5 उपाय तो मिलेगा सफलता और धन समृद्धि का आशीर्वाद

Updated: मंगलवार, 23 जून 2026 (15:59 IST)
हिंदू धर्म की सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और फलदायी माना गया है। बिना जल ग्रहण किए किए जाने वाले इस तप से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। यदि आप अपने जीवन में सफलता, मानसिक शांति और धन-समृद्धि की कामना रखते हैं, तो इस पावन तिथि पर निम्नलिखित 5 प्रमुख कार्य अवश्य करें।
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तिथि, नियम और पूजा विधि (Date, Rules & Rituals)

शुभ तिथि: यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है।
जल का त्याग: इस कठिन व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन (द्वादशी) के सूर्योदय तक जल ग्रहण नहीं किया जाता है।
विशेष पूजन: इस दिन पवित्र नदियों (जैसे गंगा) में स्नान करने तथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान कृष्ण और वरुण देव की पूजा करने का विशेष महत्व है।
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व्रत की महिमा और आध्यात्मिक फल (Significance & Spiritual Rewards)

सर्वश्रेष्ठ एकादशी: हिंदू धर्म में आने वाली सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे महत्वपूर्ण और सर्वोच्च माना गया है।
संपूर्ण फल की प्राप्ति: केवल इस एक व्रत को सच्चे मन से करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत रखने के बराबर पुण्य फल मिल जाता है।
तीर्थ स्नान का पुण्य: इस पावन व्रत को करने से साधक को संसार के सभी पवित्र तीर्थों में स्नान करने के समान पुण्य प्राप्त होता है।
जीवन में खुशहाली: भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने पर साधक को यश, वैभव, धन और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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दान का महत्व और दोषों से मुक्ति (Charity & Freedom from Doshas)

शुभ वस्तुएं: भीषण गर्मी के इस समय में जलदान (पानी पिलाना), अन्न, वस्त्र, और छाता आदि का दान करना बेहद शुभ माना जाता है।
जल कलश का विशेष दान: इस दिन पानी से भरे घड़े (जल कलश) का दान करने से वर्ष की सभी एकादशियों का पुण्य फल सुनिश्चित हो जाता है।
दोषों से मुक्ति: इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने से कुंडली के पितृदोष और चंद्रदोष दूर होने की धार्मिक मान्यता है।
 

1. जल से भरे कलश का दान (सर्वोच्च पुण्य)

चूंकि यह व्रत ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में आता है, इसलिए इस दिन जल का दान सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।
क्या करें: एक कोरे मिट्टी के घड़े (कलश) को साफ पानी से भरें। उसमें थोड़ा सा गंगाजल, चीनी या गुड़ डालें। इसके बाद इस कलश पर ढक्कन रखकर उस पर दक्षिणा या मौसमी फल (जैसे आम, खरबूजा) रखें और किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान कर दें।
लाभ: मान्यता है कि इस दिन जल कलश का दान करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य एक साथ मिल जाता है।
 

2. मां लक्ष्मी के साथ श्रीहरि का संयुक्त पूजन

भगवान विष्णु की कृपा तब तक अधूरी रहती है, जब तक मां लक्ष्मी की पूजा न की जाए। धन और सफलता के लिए दोनों का साथ पूजन अनिवार्य है।
क्या करें: इस दिन शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं। विष्णु जी को पीले फूल और मां लक्ष्मी को लाल गुलाब अर्पित करें। पूजा में "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
लाभ: इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और व्यापार व नौकरी में सफलता के योग बनते हैं।
 

3. तुलसी दल (अमृत) और पीले वस्त्रों का अर्पण

भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है और तुलसी के बिना वे कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते।
क्या करें: भगवान विष्णु को पीले रंग के फल, पीले फूल और पीली मिठाइयों का भोग लगाएं। इस भोग में तुलसी का पत्ता (तुलसी दल) जरूर रखें। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं चढ़ाया जाता और न ही उसके पत्ते तोड़े जाते हैं, इसलिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
लाभ: इससे कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में यश-वैभव की वृद्धि होती है।
 

4. राहगीरों के लिए 'प्याऊ' या शर्बत की व्यवस्था

शास्त्रों में लिखा है कि प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म है, और निर्जला एकादशी पर इसका महत्व सौ गुना बढ़ जाता है।
क्या करें: यदि संभव हो तो अपने घर के बाहर, दुकान के पास या किसी सार्वजनिक स्थान पर राहगीरों के लिए ठंडे पानी या मीठे शर्बत की व्यवस्था (प्याऊ) करवाएं। इसके अलावा धूप से बचने के लिए छाता, चप्पल या पंखे का दान भी कर सकते हैं।
लाभ: इस कार्य से पितृदेव अत्यंत प्रसन्न होते हैं, जिससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
 

5. दीपदान और विष्णु सहस्रनाम का पाठ

एकादशी की शाम का समय आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होता है, इस समय किए गए उपाय तुरंत फल देते हैं।
क्या करें: शाम के समय तुलसी के पौधे के पास और घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं। इसके बाद आसन पर बैठकर 'विष्णु सहस्रनाम' या 'नारायण कवच' का पाठ करें।
लाभ: इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है, कर्ज से मुक्ति मिलती है और धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं।
विशेष टिप: यदि आप शारीरिक रूप से पूरी तरह निर्जल व्रत रखने में असमर्थ हैं, तो अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए फलाहार या केवल जल पीकर भी यह व्रत रख सकते हैं। भगवान भाव के भूखे हैं, जबरन शरीर को कष्ट देना जरूरी नहीं है।

लेखक के बारे में
वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

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