परमा एकादशी 2026: व्रत पारण का सही समय, विधि और जरूरी नियम जानें
प्रत्येक 3 वर्षों के बाद अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को परम एकादशी या अधिकमास एकादशी कहा जाता है। इस बार इस एकादशी का व्रत 11 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। एकादशी व्रत को विधि-विधान से पूरा करने यानी खोलने की प्रक्रिया को पारण कहते हैं। इसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं।
एकादशी तिथि प्रारम्भ- 11 जून 2026 को 12:57 AM से।
एकादशी तिथि समाप्त- 11 जून 2026 को 10:36 PM तक।
पारण क्या है और इसके बुनियादी नियम?
समय का चुनाव: पारण का अर्थ व्रत को खोलना। व्रत का पारण हमेशा एकादशी के अगले दिन, यानी द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद ही किया जाता है।
द्वादशी की समयसीमा: द्वादशी तिथि के खत्म होने से पहले पारण करना बेहद जरूरी है। शास्त्रों के अनुसार, द्वादशी के रहते पारण न करना पाप के समान माना गया है।
विशेष परिस्थिति: अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही हो, तब भी पारण सूर्योदय के बाद ही किया जाएगा।
पारण के दौरान क्या करें और किससे बचें?
हरि वासर का निषेध: द्वादशी तिथि का शुरुआती एक-चौथाई (1/4) हिस्सा 'हरि वासर' कहलाता है। इस समय व्रत नहीं खोलना चाहिए। श्रद्धालुओं को हरि वासर के बीतने का इंतजार करना चाहिए।
सर्वोत्तम समय: व्रत खोलने के लिए सबसे सही और शुभ समय प्रातःकाल (सुबह) का होता है।
दुपहर से बचें: मध्याह्न (दुपहर) के समय व्रत तोड़ने से बचना चाहिए। अगर किसी मजबूरी के कारण आप सुबह पारण नहीं कर पाए हैं, तो फिर दुपहर बीत जाने के बाद ही पारण करें।
जब एकादशी व्रत दो दिनों का हो (नियम और भेद)
कभी-कभी तिथियों के फेर के कारण एकादशी व्रत लगातार दो दिनों तक खिंच जाता है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग लोगों के लिए नियम बदल जाते हैं:
स्मार्त (परिवारजन): गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों को हमेशा पहले दिन की एकादशी का व्रत रखना चाहिए।
दूजी एकादशी: दूसरे दिन आने वाली एकादशी को 'दूजी एकादशी' या 'वैष्णव एकादशी' कहते हैं। संन्यासियों, विधवा महिलाओं और मोक्ष की राह पर चलने वाले श्रद्धालुओं को इस दूसरे दिन व्रत रखना चाहिए।
परम भक्तों के लिए: जो श्रद्धालु भगवान विष्णु का विशेष प्रेम और कृपा पाना चाहते हैं, उन्हें दोनों ही दिन व्रत रखने की सलाह दी जाती है।
