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Nirjala Ekadashi: निर्जला एकादशी पर दान की वस्तुएं और उनका महत्व

lord vishnu ekadashi
25 जून 2026 को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस व्रत को रखने से 24 एकादशियों का फल एकसाथ मिलता है। इस दिन व्रत रखने के बाद व्रत का पारण करें और दान पुण्य भी करने से व्रत का फल मिलना सुनिश्‍चित हो जाता है। चलिए जानते हैं कौन कौनसे दान करें और क्या है इसका महत्व।
 

1. निर्जला एकादशी पर दान की वस्तुएं और उनका महत्व

धार्मिक दृष्टिकोण से ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में किए जाने वाले दान का फल अनंत गुना हो जाता है। इस पवित्र तिथि पर हर श्रद्धालु को अपनी सामर्थ्य और यथाशक्ति के अनुसार दान-पुण्य के कार्य करने चाहिए। इस दिन मुख्य रूप से जीवनोपयोगी और गर्मी से राहत देने वाली वस्तुओं के दान का विधान है, जैसे:-
 
अन्न और जल का दान: भूखों को भोजन कराना और प्यासों के लिए प्याऊ लगवाना इस दिन सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।
वस्त्र और आसन का दान: जरूरतमंदों को कपड़े और बैठने के लिए आसन दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं: इस दिन जूता, छतरी (छाता), पंखी (हाथ का पंखा) और मौसमी फल (जैसे आम, तरबूज, खरबूजा) का दान करना विशेष रूप से फलदायी होता है। यह दान दूसरों को शीतलता और आराम पहुँचाता है, जिससे देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
 

2. जल कलश दान का विशेष महात्म्य

निर्जला एकादशी के दिन जल के कलश का दान करना सबसे उत्तम और चमत्कारी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जो श्रद्धालु इस दिन पानी से भरे हुए घड़े या कलश का दान करते हैं, उन्हें एक अद्भुत वरदान मिलता है।
यदि कोई व्यक्ति पूरे साल की सभी 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख पाता है, तो वह केवल इस दिन श्रद्धापूर्वक जल कलश का दान करके पूरे वर्ष की सभी एकादशियों के व्रत का संपूर्ण और समान फल प्राप्त कर सकता है।
 

3. दोषों से मुक्ति और संपूर्ण पुण्यों की प्राप्ति

  • मानव स्वभाव के कारण जाने-अनजाने में वर्ष भर की अन्य एकादशियों पर कुछ न कुछ गलतियां हो ही जाती हैं। कई बार लोग अनजाने में या अज्ञानतावश अन्य एकादशियों पर अन्न ग्रहण कर लेते हैं, जिसे शास्त्रों में दोष माना गया है।
  • निर्जला एकादशी का कठिन व्रत रखने और इस दिन दान करने से अन्य सभी एकादशियों पर अन्न खाने या व्रत खंडित होने का दोष पूरी तरह से दूर हो जाता है।
  • इसके साथ ही, इस एक व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को वर्ष भर की समस्त एकादशियों के पुण्यों का लाभ एक साथ मिल जाता है।
 

4. पापों का नाश और अविनाशी पद (मोक्ष) की प्राप्ति

यह एकादशी आत्मा की शुद्धि और परम कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। जो भी स्त्री या पुरुष पूर्ण श्रद्धा, अटूट विश्वास और पवित्र मन से इस कठिन एकादशी का व्रत रखता है और दान-पुण्य करता है, उसके जन्म-जन्मांतर के समस्त पाप और कष्ट नष्ट हो जाते हैं। अंत समय में ऐसा परम भक्त संसार के जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर भगवान विष्णु के परम धाम यानी अविनाशी पद (मोक्ष) को प्राप्त करता है।
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