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Dusshera में Shami Pujan दूर करेगा Shani प्रकोप, करें ये 6 कार्य

Updated: सोमवार, 7 अक्टूबर 2019 (15:46 IST)
हिन्दू परंपरा में इस वृक्ष का खास महत्व है। इसे शनीदेव का साक्षात्त रूप माना जाता है और आयुर्वेद के अनुसार यह कृषि विपदा में लाभदायक है।
 
 
1.कहते हैं कि लंका से विजयी होकर जब राम अयोध्या लौटे थे तो उन्होंने लोगों को स्वर्ण दिया था। इसीके प्रतीक रूप में दशहरे पर खास तौर से सोना-चांदी के रूप में शमी की पत्त‍ियां बांटी जाती है। कुछ लोग खेजड़ी के वृक्ष के पत्ते भी बांटते हैं जिन्हें सोना पत्ति कहते हैं।
 
2.मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने के पूर्व शमी वृक्ष के सामने शीश नवाकर अपनी विजय हेतु प्रार्थना की थी। बाद में लंका पर विजय पाने के बाद उन्होंने शमी पूजन किया था। 
 
3.महाभारत अनुसार पांडवों ने देश निकाले के अंतिम वर्ष में अपने हथियार शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे। बाद में उन्होंने वहीं से हथियार प्राप्त किए थे तब उन्होंने शमी की पूजा की थी।
 
4.दशहरे के दिन आप भी दशहरा मिलने के बाद लोगों को शमी के पत्ते भेंट करें, लेकिन शमी के पत्तों को तोड़ने से पहले पौधे का पूजन किया जाता है। सायंकाल शमी वृक्ष का पूजन कर उससे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। 
 
5.प्रदोषकाल में शमी वृक्ष के समीप जाकर पहले उसे प्रणाम करें फिर उसकी जड़ में शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद वृक्ष के सम्मुख दीपक प्रज्वलित कर उसकी विधिवत रूप से पूजा करें। शमी पूजा के कई महत्वपूर्ण मंत्र का प्रयोग भी करें।
 
6.विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष पूजा करने से घर में जहां तंत्र-मंत्र का असर खत्म हो जाता है वहीं शनि का प्रकोप भी शांत हो जाता है। जहां भी यह वृक्ष लगा होता है वहां विपदाएं दूर रहती हैं। 

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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