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dussehra : शमी वृक्ष के पूजन की 3 पौराणिक कथाएं

Updated: सोमवार, 7 अक्टूबर 2019 (15:47 IST)
दशहरे पर शमी के वृक्ष का पूजन किया जाता है और इसकी पत्तियां एक दूसरे को बांटी जाती है। आओ जानते हैं कि इसके पीछे कौनसी पौराणिक कथा है।
 
 
1.कहते हैं कि भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने के पूर्व शमी वृक्ष के सामने शीश नवाकर अपनी विजय हेतु प्रार्थना की थी। बाद में लंका पर विजय पाने के बाद उन्होंने शमी पूजन किया था। संभवत: तभी से शमी के वृक्ष की पूजा कर प्रचलन रहा है। यह भी कहा जाता है कि लंका से विजयी होकर जब राम अयोध्या लौटे थे तो उन्होंने लोगों को स्वर्ण दिया था। इसीके प्रतीक रूप में दशहरे पर खास तौर से सोना-चांदी के रूप में शमी की पत्त‍ियां बांटी जाती है। कुछ लोग खेजड़ी के वृक्ष के पत्ते भी बांटते हैं जिन्हें सोना पत्ति कहते हैं।
 
 
2.महाभारत अनुसार पांडवों ने देश निकाला के अंतिम वर्ष में अपने हथियार शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे। बाद में उन्होंने वहीं से हथियार प्राप्त किए थे तब उन्होंने हथियारों के साथ ही शमी की पूजा भी की थी। इन्हीं हथियारों से पांडवों ने युद्ध जीता था। संभवत: तभी से शमी के वृक्ष की पूजा और हथियारों की पूजा कर प्रचलन प्रारंभ हुआ होगा।
 
3.एक अन्य कथा के अनुसार महर्षि वर्तन्तु ने अपने शिष्य कौत्स से शिक्षा पूरी होने के बाद गुरू दक्षिणा के रूप में 14 करोड़ स्वर्ण मुद्राएं मांग ली। यह मांग सुनकर कौत्स महाराज रघु के पास गए और उनसे यह रकम मांगी। 
 
महाराज रघु ने कुछ दिन पहले ही एक महायज्ञ करवाया था, जिसके कारण खजाना खाली हो चुका था। तब उन्होंने कौत्स से तीन दिन का समय मांगा। राजा धन जुटाने के लिए उपाय खोजने लग गया। कोई उपाय नहीं सुझा तो उन्होंने स्वर्गलोक पर आक्रमण करने का निश्‍चय किया। राजा ने सोचा स्वर्गलोक पर आक्रमण करने से उसका शाही खजाना फिर से भर जाएगा।
 
राजा के इस विचार से देवराज इंद्र घबरा गए और कोषाध्याक्ष कुबेर से रघु के राज्य में स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करने का आदेश दिया। इंद्र के आदेश पर रघु के राज्य में कुबेर ने शमी वृक्ष के माध्यम से स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करा दी। माना जाता है कि जिस तिथि को स्वर्ण की वर्षा हुई थी उस दिन विजयादशमी थी। इस घटना के बाद से ही विजयादशमी के दिन शमी के वृक्ष की पूजा और उसकी पत्तियां एक दूसरे को बांटने की परंपरा प्रारंभ हुई।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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