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दशहरा 2019 : नारियल के 10 उपाय बना सकते हैं आपको करोड़पति

Updated: सोमवार, 7 अक्टूबर 2019 (15:40 IST)
भारतीय धर्म और संस्कृति में नारियल का बहुत महत्व है। मंदिर में नारियल फोड़ना या चढ़ाने का रिवाज है। हिन्दू धर्म में वृक्षों के गुण और धर्म की अच्छे से पहचान करके ही उसके महत्व को समझते हुए उसे धर्म से जोड़ा गया है। उनमें ही नारियल का पेड़ भी शामिल है। नारियल को 'श्रीफल' भी कहा जाता है। यहां प्रस्तुत है दशहरे पर नारियल के 10 चमत्कारिक उपाय..
 
* ऋ‍ण उतारने के लिए : एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़-चना) के साथ हनुमानजी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। तत्काल लाभ प्राप्त होगा।
 
*दूसरा उपाय  दशहरे के दिन सुबह नित्य कर्म व स्नान आदि करने के बाद अपनी लंबाई के अनुसार काला धागा लें और इसे एक नारियल पर लपेट लें। इसका पूजन करें और उसको नदी के बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। साथ ही भगवान से ऋण मुक्ति के लिए प्रार्थना करें। 
 
* व्यापार लाभ के लिए : कारोबार में लगातार घाटा हो रहा हो तो दशहरे के दिन एक नारियल सवा मीटर पीले वस्त्र में लपेटकर एक जोड़ा जनेऊ, सवा पाव मिष्ठान्न के साथ आस-पास के किसी भी राम मंदिर में चढ़ा दें। तत्काल ही व्यापार चल निकलेगा।
 
* यदि रुपया टिक नहीं पा रहा हो या सेविंग नहीं हो पा रही हो तो परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है। ऐसे में दशहरे के दिन माता लक्ष्मी के मंदिर में एक जटावाला नारियल, गुलाब, कमल पुष्प माला, सवा मीटर गुलाबी, सफेद कपड़ा, सवा पाव चमेली, दही, सफेद मिष्ठान्न एक जोड़ा जनेऊ के साथ माता को अर्पित करें। इसके पश्चात मां की कपूर व देसी घी से आरती उतारें तथा श्रीकनकधारा स्तोत्र का जाप करें। आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।
 
* कालसर्प या शनि दोष हेतु : शनि, राहू या केतु जनित कोई समस्या हो, कोई ऊपरी बाधा हो, बनता काम बिगड़ रहा हो, कोई अनजाना भय आपको भयभीत कर रहा हो अथवा ऐसा लग रहा हो कि किसी ने आपके परिवार पर कुछ कर दिया है, तो इसके निवारण के लिए  दशहरे के दिन एक जलदार जटावाला नारियल लेकर उसे काले कपड़े में लपेटें। 100 ग्राम काले तिल, 100 ग्राम उड़द की दाल तथा 1 कील के साथ उसे बहते जल में प्रवाहित करें। ऐसा करना बहुत ही लाभकारी होता है।
 
* जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष हो या राहु-केतु अशुभ फल दे रहे हों तो सूखा नारियल या काला-सफेद रंग का कंबल दान करना चाहिए। ऐसा समय समय पर करते रहने से उक्त दोष दूर हो जाता है।
 
* सफलता हेतु : यदि कोई काम काफी प्रयास के बावजूद सफल नहीं हो पा रहा तो आप एक लाल सूती का कपड़ा लें और उसमें रेशेयुक्त नारियल को लपेट लें और फिर बहते हुए जल में प्रवाह कर दें। जिस वक्त आप इसे जल में बहा रहे हों उस वक्त उस नारियल से सात बार अपनी कामना जरूर कहें।
 
* बीमारी या संकट हटाने हेतु : एक साबूत पानीदार नारियल लें और उसे अपने उपर से 21 बार वारकर किसी रावण दहन की आग में डाल दें। ऐसा घर के सभी सदस्यों के उपर से वारकर करेंगे तो उत्तम होगा।
 
इसके अलावा हनुमानजी के मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा पढ़ें और उनको चोला अवश्य चढ़ाएं। 
 
* स्थाई नौकरी हेतु : दशहरे के दिन नारियल के छिलकों को जलाकर भस्म तैयार करें और उसमें नारियल का ही पानी मिलाकर उसकी लुगदी बनाएं। फिर उस लुगदी की सात पुड़िया बनाएं। जिसमें से चार पुड़िया घर के चारों कोनों में रखें उनमें से एक पुड़िया घर की छत पर, एक पीपल की जड़ में और एक अपनी जेब में रखें। यह सावधानी रखें कि इस पर किसी की नजर और परछाई न पड़े।
 
जब सात दिन व्यतीत हो जाएं तो सभी पुड़िया एक जगह पर इकट्ठी कर लें। फिर उनमें से एक पुड़िया उस स्थान पर रखें जहां आप आजीविका कमाना चाहते हैं। वहां उसके द्वार के किसी कोने में छिपा कर रखें। हालांकि यह उपाय किसी जानकार से पूछकर करेंगे तो उचित होगा।
 
* संकट से मुक्ति हेतु : दशहरे के एक दिन पहले एक नारियल लें और उसको अपने सिर के पास रखकर सो जाएं। सुबह उठकर किसी नदी में नारियल प्रवाहित करें। ध्यान रहे कि नारियल प्रवाहित करते हुए इस मं‍त्र का भी जाप करें- ॐ रामदूताय नम:।
 
*श्रीगणेश और धन की देवी महालक्ष्मी का पूजन करें। पूजन में एक नारियल रखें। पूजा के बाद उस नारियल को तिजोरी में रख दें। रात के समय इस नारियल को निकालकर किसी राम मंदिर में अर्पित कर दें। भगवान श्रीराम से निर्धनता दूर करने की प्रार्थना करें। 
 
* जीवनभर रहेंगे मालामाल : दशहरे के दिन गणेशजी और महालक्ष्मी की विधि विधान से चौकी सजाएं। चावल की ढेरी पर तांबे का कलश रखें और एक लाल वस्त्र में नारियल लपेटकर उस कलश में इस तरह रखें कि उसके आगे का भाग दिखाई दे। यह कलश वरुणदेव का प्रतीक है। अब दो बड़े दीपक जलाएं। एक घी का और दूसरा तेल का। एक दीपक चौकी के दाहिनी ओर रखें और दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अतिरिक्त एक छोटा दीपक गणेशजी के पास रखें। इसके बाद पूजा करें। 

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