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कार्तिक पूर्णिमा 2020 : देव दिवाली पर करेंगे ये 10 काम तो होगा बहुत लाभ

रविवार,नवंबर 29, 2020
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कार्तिक मास में तीन दिवाली आती है। कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इसके बाद अमावस्या को बड़ी दिवाली मनाते हैं एवं पूर्णिमा को देव दिवाली मनाते हैं। उक्त तीनों ही दिवाली का बहुत ही खासा महत्व है। इस बार 29 ...
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कार्तिक मास में 3 दिवाली आती हैं। कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इसके बाद अमावस्या को बड़ी दिवाली मनाते हैं एवं पूर्णिमा को देव दिवाली मनाते हैं। आओ जानते हैं देव दिवाली मनाने के 7 खास कारण।
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कार्तिक मास में तीन दिवाली आती है। कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दिवाली जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इसके बाद अमावस्या को बड़ी दिवाली मनाते हैं एवं पूर्णिमा को देव दिवाली मनाते हैं। पुराणों में कार्तिक मास का बहुत ही महत्व बताया गया है। आओ ...
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आज के दिन अपनी बहन को उनकी राशि अनुसार भेंट दें, इससे आपसी रिश्तों में मिठास आएगी और दोनों के लिए यह शुभ होगा।
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श्री चित्रगुप्त जी की आरती - श्री विरंचि कुलभूषण, यमपुर के धामी। पुण्य पाप के लेखक, चित्रगुप्त स्वामी॥ सीस मुकुट, कानों में कुण्डल अति सोहे। श्यामवर्ण शशि सा मुख, सबके मन मोहे॥
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पौराणिक कथा अनुसार सूर्य पुत्री यमी अर्थात् यमुना ने अपने भाई यम को कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को अपने घर निमन्त्रित कर अपने हाथों से बना स्वादिष्ट भोजन कराया। जिससे यमराज बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपनी बहन यमुना से एक वरदान मांगने को ...
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भाई दूज पर यमुना माता की आरती उतारी जाती है। यमुना जी की आरती पढ़ने या सुनने मात्र से ही भगवान श्री कृष्ण जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यमुना जी की आरती सच्चे मन से करने से यम का भय खत्म हो जाता है।
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भगवान चित्रगुप्त पाप पुण्य का लेखा जोखा रखते हैं। दीपावली के बाद भैया दूज के दिन चित्रगुप्त की पूजा के साथ-साथ लेखनी, दवात तथा पुस्तकों की भी पूजा की जाती है।
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यह दीपावली के पांच दिनी महोत्सव का अंतिम दिन होता है। भाई दूज को असल में यम द्वितीया कहते हैं। इस दिन यमराज और भगवान चित्रगुप्त की पूजा होती है।
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इस खास दिन पर बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं और उनकी सुख समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
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पौराणिक शास्त्रों के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भैयादूज, भाई दूज अथवा यम द्वितीया को मृत्यु के देवता यमराज का पूजन किया जाता है। इस दिन बहनें भाई को अपने घर आमंत्रित कर अथवा सायं उनके घर जाकर उन्हें तिलक करती हैं और भोजन कराती हैं।
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कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। यह दीपावली के पांच दिवसीय महोत्सव का अंतिम दिन होता है। इस दिन यमराज और चित्रगुप्त की पूजा होती है। इसी दिन बहन अपने भाई को अपने घर आमंत्रित करके भोजन कराने के बाद तिलक लगाकर खुश ...
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गोवर्धन पूजा के अगले दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का त्योहार होता है। भाई दूज का त्योहार यमराज के कारण हुआ था, इसीलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। आओ जानते हैं कि भाई दूज के संबंध में 5 खास बातें।
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भाई दूज के अवसर पर, बहनें अपने भाइयों को एक सुन्दर दावत के लिए अपने घर पर आमंत्रित करती हैं, जिसमें अक्सर मिठाई और उनके सभी सबसे पसंदीदा व्यंजन शामिल होते हैं। बहनें अपने भाइयों का 'आरती' के साथ स्वागत करती हैं और उनके मस्तक पर सिन्दूर एवं चावल का ...
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16 नवंबर को भाई दूज का पर्व है। बहनें अपने भाई के माथे पर टीका लगाकर लंबी आयु की कामना करती हैं।
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कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया को भाई दूज और यम द्वितीया कहते हैं। यह दीपावली के पांच दिन पर्व का समापन दिवस होता है। मान्यता है कि इस दिन यमुना ने अपने भाई भगवान यमराज को अपने घर आमंत्रित करके उन्हें तिलक लगाकर अपने हाथ से स्वादिष्ट भोजन कराया था।
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दीपावली के 5 दिनी उत्सव में सबसे पहले धनतेरस, फिर नरक चतुर्दशी, फिर दीपावली, फिर गोवर्धन पूजा और इसके बाद कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज का त्योहार होता है। भाई दूज को संस्कृत में भागिनी हस्ता भोजना कहते हैं। यह त्योहार लगभग पूरे देश में मनाया ...
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दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा का त्योहार 15 नवंबर को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान कृष्ण ने इंद्रदेव के घमंड का नाश किया था।
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दीपावली के दूसरे दिन उत्तर और माध्य भारत में गोवर्धन पूजा का प्रचलन है। इस दिन को अन्नकूट महोत्सव भी कहते हैं। इस दिन को ग्रमीण क्षेत्रों में पड़वा कहते हैं। इस दिन को द्यूतक्रीड़ा दिवस भी कहते हैं। यह दिवाली की श्रृंखला में चौथा उत्सव होता है।
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