Hanuman Chalisa

धनतेरस पर 13 दीये क्यों जलाते हैं?

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024 (12:01 IST)
वर्ष 2022 में धनतेरस का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार धनतेरस (Dhanteras) के दिन सायंकाल को 13 दीये जलाने की पौराणिक परंपरा है। मान्यतानुसार इस दिन 13 दीप कुबेर को समर्पित करना चाहिए, क्योंकि कुबेर संपदा, वैभव-ऐश्वर्य, धन-दौलत, संपत्ति के स्वामी माने गए हैं।

इतना ही नहीं धनतेरस के दिन 13 दीप जलाकर भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती हैं, क्योंकि धन्वंतरि देवताओं के वैद्य माने जाते हैं अत: उनसे अच्छा स्वास्थ्य और सेहतमंद बनाए रखने के लिए प्रार्थना की जाती है। 
धार्मिक मान्यतानुसार धनतेरस की शाम घर के बाहर मुख्य द्वार तथा आंगन में दीप जलाने की प्रथा है। जिस प्रकार मां लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थी, उसी प्रकार भगवान धन्वंतरि भी अमृत कलश के साथ समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए हैं। देवी लक्ष्मी धन की देवी मानी जाती हैं। 
 
अत: उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए और अच्छा स्वास्थ्य और लंबी आयु पाने के लिए दीपावली दो दिन पहले से ही यानी धनतेरस से ही दीपमालाएं सजने लगती हैं। और यही कारण है कि धनेतरस के दिन सायंकाल घर-आंगन में 13 दीप (13 deepak) जलाने से जीवन में खुशहाली आती है तथा स्वास्थ्य और सेहत की कामना के लिए इस दिन 13 दीप जलाने का विशेष महत्व है। 
 
दीपावली की तरह ही धनतेरस पर भी दीपदान करने का विशेष महत्व है। इस दिन सायंकाल पूजन के पश्चात घर में 13 दीपक जलाकर पहला दीया यम के नाम का दक्षिण दिशा में, मां लक्ष्मी के सामने यानी दूसरा दीया पूजन स्थान पर, मुख्य द्वार पर दो दीये, तुलसी के पौधे में एक दीया, छत की मुंडेर पर एक दीया और बाकी दीपक घर के अलग-अलग कोनों में रखें जाते हैं। 
 
इतना ही नहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन घर में उपयोग में आने वाली वस्तुएं खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। 

Dhanteras 2022
 

ALSO READ: धनतेरस पर सिर्फ 2 रुपए की यह 1 चीज लेकर आएं घर में, चमक जाएगी किस्मत, धन बरसेगा जमकर


लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

सभी देखें

21 July Birthday: आपको 21 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 21 जुलाई 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय

27 जुलाई से शनि होंगे वक्री: 11 दिसंबर तक इन 5 राशियों पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानें आपकी राशि शामिल है या नहीं

Ashadhi Ekadashi Date 2026: आषाढ़ी एकादशी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

देवशयनी एकादशी 2026: कब है शुभ मुहूर्त? जानें चातुर्मास की शुरुआत और भगवान विष्णु को शयन कराने की सही विधि