...तो प्रत्याशी जा सकता है जेल

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- अनूप भटनाग
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक सभी प्रत्याशियों को नामांकन पत्र के साथ दो हलफनामे दाखिल करने होंगे। उन्हें यह भी ध्यान रखना होगा कि हलफनामे में गलत सूचनाएं देना अपराध है और इसके लिए उसके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125-क के तहत कार्रवाई हो सकती है।

जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 33 के तहत चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन पत्र दाखिल होने वाले इन हलफनामों में अपनी, अपने जीवन साथी और परिवार के आश्रित सदस्यों की चल अचल संपत्ति, देनदारियां और शैक्षणिक योग्यता के अलावा प्रत्याशी की आपराधिक पृष्ठभूमि आदि का विवरण देना अनिवार्य है। नामांकन पत्र के साथ ये हलफनामे दाखिल नहीं करने वाले प्रत्याशी का नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।
चुनाव में किस्मत आजमाने के इच्छुक प्रत्याशियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि नामांकन पत्र के साथ दाखिल होने वाले उनके हलफनामे चुनाव अधिकारी के कार्यालय के नोटिस बोर्ड में लगा दिए जाएंगे। प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अपने बारे में हलफनामे पर विस्तृत जानकारी देने को सुप्रीम कोर्ट ने मई, 02 में अनिवार्य किया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नागरिकों के लिए चुनाव में प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि की जानकारी हासिल करना संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (क) के दायरे में आता है।
सुप्रीम कोर्ट की इस व्यवस्था के बाद ही जनप्रतिनिधित्व कानून में जरूरी संशोधन किए गए। प्रत्येक उम्मीदवार को अपने हलफनामे में शैक्षणिक योग्यता के साथ ही अपना जीवन परिचय भी देना होगा जिसमें उसके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी देने के साथ ही उसे यदि किसी मामले में सजा हुई है तो उसका विवरण भी देना होगा।

प्रत्याशी को एक अन्य हलफनामे में अपनी, अपने जीवन साथी और परिवार के सदस्यों की चल अचल संपत्ति, बैंक में जमा राशि, सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं और सरकारी देनदारियों आदि का पूरा और सही विवरण भी देना होगा।
गलत जानकारियां देने वाले प्रत्याशी को आरोप सिद्ध होने पर धारा 125-क के तहत छह माह तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।



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