ये 25 'महामानव' जिन्होंने बनाया भारत को

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
पृथ्वीराज चौहान (जन्म- 1149 - मृत्यु- 1192 ई.)  : हर्षवर्धन की मृत्यु के उपरांत जिन महान शक्तियों का उदय हुआ था, उनमें अधिकांश राजपूत वर्ग के अंतर्गत ही आते थे। एजेंट टोड ने 12वीं शताब्दी के उत्तर भारत के इतिहास को 'राजपूत काल' भी कहा है। कुछ इतिहासकारों ने प्राचीनकाल एवं मध्यकाल को 'संधि काल' भी कहा है। इस काल के महत्वपूर्ण राजपूत वंशों में राष्ट्रकूट वंश, चालुक्य वंश, चौहान वंश, चंदेल वंश, परमार वंश एवं गहड़वाल वंश आदि आते हैं। 
 
राजपूतों में महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान आदि राजपूतों ने देश की रक्षा मुस्लिम आक्रांताओं से की। उनमें पृथ्वीराज चौहान और महाराणा प्रताप का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। पृथ्वीराज चौहान अथवा 'पृथ्वीराज तृतीय' को 'राय पिथौरा' भी कहा जाता है। वे चौहान राजवंश के प्रसिद्ध राजा थे। वे तोमर वंश के राजा अनंग पाल का दौहित्र (बेटी का बेटा) थे और उसके बाद दिल्ली के राजा हुए। मध्यकाल में दिल्ली देश की राजधानी थी।
 
चौदह साल के वीर राजपूत पृथ्वीराज अजमेर की गद्दी पर बैठे। पृथ्वीराज ने अपने समय के विदेशी आक्रमणकारी मुहम्मद गौरी को कई बार पराजित किया। गौरी ने 18 बार पृथ्वीराज पर आक्रमण किया था जिसमें 17 बार उसे पराजित होना पड़ा।
 
इतिहासकार मानते हैं क‍ि गौरी और पृथ्वीराज के बीच कम से कम दो भयंकर युद्ध हुए थे जिनमें प्रथम में पृथ्वीराज विजयी और दूसरे में पराजित हुए थे। ये दोनों युद्ध थानेश्वर के निकटवर्ती 'तराइन' या 'तरावड़ी' के मैदान में क्रमशः सं. 1247 और 1248 में हुए थे।
 
इसके बाद गुलाम, मुगल, खिलजी, तुगलक, सैयद, लोदी, निजामी, बहमनी आदि मुस्लिम शासकों और आक्रमणकारियों से भारत की रक्षा करने के लिए मराठा और सिख साम्राज्य का उदय हआ। मराठाओं में वीर शिवाजी और सिखों में महाराजा रणजीत सिंह और गुरु गोविंद सिंह प्रमुख थे।
 
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