आकाशवाणी ने परोसी यादगार सामग्री

अमीन सयानी ने 'जयमाला' के जरिये जीता दिल

सीमान्त सुवीर|
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ख्वाजा साहब ने रेडियो पर आते ही कहा 'फौजी भाइयों, मैं एक छोटा-सा आदमी हूँ, समझ लीजिए आवारा किस्म का। राज साहब ने मुझे मौका दिया और मैं थोड़ा-सा कुछ लिख पाया। मैंने फौजियों के साथ कश्मीर की सरहद पर कुछ दिन बिताए, उनके साथ खाना खाया और सच कहूँ तो थोड़ी-सी रम भी पी।' ख्वाजा अहमद अब्बास वह शख्सियत हैं, जिन्होंने फिल्म बॉबी, श्री 420, आवारा और मेरा नाम जोकर की पटकथा लिखी, लेकिन वे खुद को मामूली शायर मानते थे।


अब्बास साहब ने दो बूँद पानी, शहर और सपना (राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त), सात हिन्दुस्तानी (अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म), बंबई रात की बाँहों में की पटकथा लिखने के साथ उन्हें निर्देशित भी किया। उनकी पहली फिल्म थी 'धरती के लाल' , जो 1946 में प्रदर्शित हुई।

अब्बास साहब पत्रकार भी रहे और वे एकमात्र अखबारनवीस थे, जिन्होंने भारत के पहले टेब्लाइड अखबार 'ब्ल‍िड्‍स' में बिलानागा 40 सालों तक लिखा। ब्ल‍िड्‍स के तीन संस्करण - हिन्दी में 'आखिरी पन्ना', अंग्रेजी में 'लास्ट पेज' और उर्दू में 'आखिरी सफा' नाम से वे अपना कॉलम लिखते थे।

बहुत कम लोग जानते हैं कि अब्बास साहब ने अपना पूरा जीवन मुंबई की मानसरोवर होटल के एक छोटे से कमरे में बिताया। उन्होंने न तो शादी की और न ही कोई बंगला बनाया। उन्होंने ' आई एम नॉट आयलैंड' (मैं द्वीप नहीं हूँ) आत्मकथा भी लिखी, जो अंग्रेजी और हिन्दी में प्रकाशित हुई।


ख्यात संगीतकार सी.रामचन्द्र फिल्मों में बतौर हीरो बनने आए थे। एक फिल्म कंपनी में नौकरी भी मिल गई, लेकिन कुछ समय बाद घाटा होने के कारण छँटनी शुरू हुई तो सबसे पहले सी. रामचन्द्र का ही नाम था। उन्होंने मालिक से कहा कि आप भले ही एक्टर की नौकरी से निकाल दें, लेकिन मैं थोड़ा-बहुत हारमोनियम भी बजाना जानता हूँ।
कंपनी को एक साजिन्दे की जरूरत थी, लिहाजा उन्हें नौकरी पर रख लिया और इस तरह सिनेमा जगत को सी. रामचन्द्र के रूप में महान संगीतकार मिला। उनकी सबसे चर्चित फिल्म 'अनारकली' रही। उन्होंने सबसे पहला संगीत डॉ. इकबाल के गीत ' सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा...' में दिया।

डॉ. राही मासूम रजा ने टीवी सीरियल 'महाभारत' के संवाद लिखकर घर-घर में अपनी जगह बना डाली। डॉ. राही ने भी 'जयमाला' में फौजी भाईयों के लिए कार्यक्रम पेश किया था, जिसका टेप बजाया गया। उन्होंने 'फिल्म संस्कृति' नामक ‍पत्रिका का सफलतम प्रकाशन किया। इसके अलावा उनका टीवी सीरियल 'नीम का पेड़' भी काफी लोकप्रिय हुआ।



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