चुनौतियों से जूझते दो पड़ोसी प्रजातंत्र

शरद सिंगी|
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अप्रैल माह में, दक्षिण एशिया में के साथ दो अन्य देशों में भी चुनाव हुए थे। एक और दूसरा इंडोनेशिया। दोनों ही देश प्रजातान्त्रिक होने का दावा तो करते हैं किन्तु अलग-अलग कारणों से इन देशों की चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह लगे हैं। नतीजे अभी तक घोषित नहीं हुए हैं परन्तु दोनों ही देशों के प्रमुख उम्मीद्वारों ने अपनी अपनी जीत की घोषणा कर दी है और स्वयं को भावी राष्ट्रपति भी घोषित कर दिया है।
हमारी मान्यता है कि विश्व के प्रजातान्त्रिक देश यदि बिना अपना हित साधे इन देशों के साथ थोड़ा सहयोग करें, थोड़ा मार्गदर्शन करें तो ये सही मार्ग पर चलकर एक सशक्त प्रजातंत्र बन सकते हैं अन्यथा अधम हाथों में देश की बागडोर जाने में समय नहीं लगता। यह तथ्य मानवता के हितचिंतकों को नज़रों से ओझल नहीं होने देगा।



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