हिंदी और विश्व कविता का एक अच्छा ब्लॉग

इस बार ब्लॉग चर्चा में अनुनाद

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इधर कविता के खिलाफ लगातार यह दुष्प्रचार किया जाता रहा है कि अब कविताएँ कोई नहीं पढ़ता। इसके बावजूद हिंदी में कई लघु पत्रिकाओं में न केवल बेहतरीन कविताएँ छप रही हैं बल्कि इस समय हिंदी में एक साथ कई पीढियाँ सक्रिय हैं। इधर युवा कवियों ने अपनी रचनात्मकता से परिदृश्य पर महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज की है।

भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार के जरिए हिंदी के युवा कवियों को बेहतर ढंग से रेखांकित किया जा रहा है। कई युवा कवियों के संग्रह आ रहे हैं, उनकी समीक्षाएँ छप रही हैं। ब्लॉग की दुनिया भी इससे अछूती नहीं है। आज कई ऐसे ब्लॉग्स हैं जिन पर हिंदी और विश्व की कविता से कोई भी आत्मीय परिचय कर सकता है।

कुछ सप्ताह पहले ब्लॉग चर्चा में कविता का एक ब्लॉग अनहद-नाद पर हमने ब्लॉग चर्चा की थी। एक लंबे अंतराल के बाद फिर हमने कविता का एक ब्लॉग चुना है-अनुनाद। यह ब्लॉग भी कविता और कविता के अनुवाद और विचार का ब्लॉग है। इसके ब्लॉगर हैं युवा कवि और अनुवादक शिरीष कुमार मौर्य।

इस ब्लॉग पर आप हिंदी के बेहतरीन कवियों की कविताएँ पढ़ सकते हैं। इनमें कई वरिष्ठ और युवा कवि शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें एक कैटेगरी है विश्व कविता। जाहिर है इसमें विश्व के नामचीन कवियों-शायरों की कविता पढ़ने को मिलती है। हिंदी के कवियों में यहाँ विष्णु खरे से लेकर चंद्रकांत देवताले और आलोकधन्वा, गिरधर राठी से लेकर असद जैदी, वीरेन डंगवाल से लेकर मंगलेश डबराल और कुमार अंबुज, पंकज चतुर्वेदी से लेकर प्रदीपचंद्र पांडे की चुनी हुई कविताएँ पढ़ सकते हैं। यानी यहाँ हिंदी का एक वैविध्यपूर्ण कविता संसार मौजूद है जिससे रूबरू होकर आप हिंदी कविता के नाक-नक्श से वाकिफ हो सकते हैं।
  ब्लॉग की दुनिया भी इससे अछूती नहीं है। आज कई ऐसे ब्लॉग्स हैं जिन पर हिंदी और विश्व की कविता से कोई भी आत्मीय परिचय कर सकता है। कुछ सप्ताह पहले ब्लॉग चर्चा में कविता का एक ब्लॉग अनहद-नाद पर हमने ब्लॉग चर्चा की थी।      


इस ब्लॉग पर विष्ण खरे की एक लंबी और मार्मिक कविता हर शहर में एक बदनाम औरत रहती है जोरदार कविता है। इसमें विष्णु खरे ने अपने चिर-परिचित फॉर्म में एक बदनाम औरत और पुरुष मानसिकता का जो अंदरूनी खाका खींचा है वह अनूठा और विचलित कर देने वाला है। कविता में कहानी कहने की कला में माहिर इस कवि ने इसमें भावुक होने से बचते हुए जिस काव्य कौशल से बदनाम औरत को अभिव्यक्त किया है वह उन्हें इसीलिए हिंदी का विरल कवि बनाता है।

इसी तरह गिरधर राठी जैसे कम पढ़े गए कवि का परिचय देते हुए उनकी तीन कविताएँ दी गई हैं। इन छोटी छोटी कविताओं में इस कवि की काव्य संवेदना और कहन ध्यान खींचता है। राठीजी की कविता उनींदे की लोरी इस लिहाज से पठनीय है। पढ़िए-

साँप सुनें अपनी फुफकार और सो जाएँ
चींटियाँ बसा लें घर बार और सो जाएँ
रवींद्र व्यास|
गुरखे कर जाएं ख़बरदार और सो जाएँ

 

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