Hanuman Chalisa

सुप्रीम कोर्ट की उच्च न्यायालयों को नसीहत, ऐसे निर्देश से बचें जो क्रियान्वित न हो पाएं

शनिवार, 22 मई 2021 (00:00 IST)
दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि कोविड-19 महामारी के बीच उत्तरप्रदेश के गांवों और छोटे शहरों में समूची स्वास्थ्य प्रणाली 'राम भरोसे' है। इसने कहा कि उच्च न्यायालयों को ऐसे निर्देश जारी करने से बचना चाहिए जिन्हें क्रियान्वित नहीं किया जा सकता।

ALSO READ: दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को किया आगाह, Covid 19 के मामलों में कमी को हल्के में नहीं लें
 
न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की अवकाशकालीन पीठ ने अपने फैसले में कहा कि उच्च न्यायालय के 17 मई के निर्देशों को निर्देशों के रूप में नहीं माना जाएगा और इन्हें उत्तरप्रदेश सरकार को सलाह के रूप में माना जाएगा। पीठ ने कहा कि आदेश में ऐसी कुछ टिप्पणियां हैं जो अदालत ने आम जनता को राहत उपलब्ध कराने की नीयत से कही हैं।
 
शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालयों को ऐसे निर्देश जारी करने से बचना चाहिए जिन्हें क्रियान्वित नहीं किया जा सकता। इसने कहा कि इस तरह के निर्देश क्रियान्वित नहीं किए जा सकते और इन्हें सलाह के रूप में माना जाएगा, निर्देश के रूप में नहीं। लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली राज्य सरकार उच्च न्यायालय की सलाह को ध्यान में रखेगी। मामले में मदद के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता निदेश गुप्ता को अदालत मित्र नियुक्त करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम आदेश पर रोक लगा रहे हैं, लेकिन उच्च न्यायालय में चल रही कार्यवाही पर रोक नहीं लगा रहे। मामला 14 जुलाई को सूचीबद्ध किया जाएगा।

ALSO READ: दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार को किया आगाह, Covid 19 के मामलों में कमी को हल्के में नहीं लें
 
शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों में से एक का उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक गांव में कम से कम 2 एम्बुलेंस उपलब्ध कराई जानी चाहिए जिनमें गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) की सुविधाएं हों। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने सूचित किया है कि उत्तरप्रदेश में 97,000 गांव हैं और एक महीने में इस तरह की एम्बुलेंस उपलब्ध कराना 'मानवीय रूप से संभव' नहीं है।
 
शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के उस निर्देश का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि राज्य के 5 मेडिकल कॉलेजों को 4 महीने के भीतर स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थानों के रूप में उन्नत किया जाए। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने कहा है कि इतनी कम अवधि में ऐसा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालय की विभिन्न पीठ कोविड प्रबंधन पर भिन्न-भिन्न आदेश पारित कर रही हैं।

ALSO READ: Corona पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
 
उन्होंने कहा कि यह उचित होगा यदि यह अदालत निर्देश दे कि कोविड प्रबंधन से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की पीठ सुनवाई करे जिससे कि निर्देशों में एकरूपता हो। इस पर पीठ ने कहा कि वह कोई सामान्य निर्देश या व्यापक आदेश जारी नहीं करेगी क्योंकि वह उच्च न्यायालयों या राज्य को हतोत्साहित नहीं करना चाहती। शीर्ष अदालत ने ऐसा कोई आदेश पारित करने से इंकार करते हुए कहा कि हम वतर्मान में केवल इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रहे हैं। अपील उत्तरप्रदेश सरकार ने दायर की थी।
 
उच्च न्यायालय ने मेरठ के एक अस्पताल में पृथक वार्ड में भर्ती 64 वर्षीय संतोष कुमार की मौत पर संज्ञान लेते हुए राज्य में कोरोना वायरस के प्रसार और क्वारंटाइन केंद्रों की स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर 17 मई को कुछ निर्देश जारी किए थे। जांच की रिपोर्ट के अनुसार संबंधित अस्पताल के डॉक्टर संतोष की पहचान करने में विफल रहे थे और उसके शव को अज्ञात के रूप में निपटा दिया था। संतोष अस्पताल के बाथरूम में 22 अप्रैल को बेहोश हो गया था। उसे बचाने के प्रयास किए गए लेकिन उसकी मौत हो गई थी। अस्पताल के कर्मचारी उसकी पहचान नहीं कर पाए थे और उसकी फाइल खोजने में भी विफल रहे। इस तरह, इसे अज्ञात शव का मामला बताया गया था।
 
मुद्दे पर उच्च न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि मेरठ जैसे शहर में मेडिकल कॉलेज का यह हाल है तो फिर कहना पड़ेगा कि राज्य के गांवों और छोटे शहरों में समूची चिकित्सा प्रणाली 'रामभरोसे' है। अदालत ने कोविडरोधी टीकाकरण के मुद्दे पर कहा था कि विभिन्न धार्मिक संगठनों को दान के माध्यम से कर राहत कानूनों के तहत लाभ उठाने वाले बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से टीकों के लिए धनराशि देने को कहा जा सकता है।

 
उच्च न्यायालय ने सुनवाई की अगली तारीख 22 मई को निर्धारित करते हुए कहा था कि उत्तरप्रदेश के हर 2 एवं 3 टियर शहर को कम से कम 20 एम्बुलेंस और हर गांव को कम से कम 2 एम्बुलेंस उपलब्ध कराई जानी चाहिए जिनमें आईसीयू सुविधाएं हों। (भाषा)

Show comments

CJP protest Photos : CJP के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की 10 तस्वीरें, देखें पूरे दिन क्या हुआ

152 पेपर लीक और 7.5 करोड़ छात्रों का मुद्दा, राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा, बोले- मुद्दे उठाने वाले छात्र पीटे जाते हैं

क्या सस्ता है Motorola Edge 70 Max, 5000 रुपए की छूट, 7100mAh बैटरी, Snapdragon 8 Gen 5 और AI फीचर्स के साथ भारत में लॉन्च

Dimple Yadav : CJP के प्रदर्शन में पुलिस की लाठीचार्ज पर भड़कीं डिंपल यादव, बताया काला दिवस, प्रदर्शनकारियों को पिलाया पानी

Priyanka Gandhi : पेपर लीक विरोध प्रदर्शन पर बवाल, संसद मार्च के दौरान दिल्ली में झड़पें, प्रियंका गांधी का बड़ा बयान

सभी देखें

जब Gen-Z सड़कों पर उतरी, हिल गईं सरकारें! 5 साल में 5 देशों में गिरी सरकारें, कहीं राष्ट्रपति भागे तो कहीं PM ने छोड़ी कुर्सी

LIVE: जंतर मंतर पर डटे प्रदर्शनकारी, बारिश की वजह से मंच के नीचे बिताई रात

सिक्किम टनल हादसा: मीथेन गैस रिसाव और भूस्खलन से 7 की मौत, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका

दिल्ली में छात्रों पर बर्बरता से लाठीचार्ज, पीएम मोदी चुप

सिक्किम में निर्माणाधीन सुरंग में बड़ा हादसा, भूस्खलन के बाद 27 मजदूर फंसे

अगला लेख