क्‍या Corona मरीजों के शवों से नदी में संक्रमण का खतरा? जानिए क्या बोले Experts

Last Updated: गुरुवार, 13 मई 2021 (01:00 IST)
नई दिल्ली। नदी के मार्फत का संचरण चिंता की बात नहीं है। गंगा और यमुना नदियों में कोविड-19 के संदिग्ध शवों के बहने का मामला सामने आने के बाद यह बात विशेषज्ञों ने कही।
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आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर सतीश तारे ने कहा कि गंगा या इसकी सहायक नदियों में शवों को करने का मामला गंभीर है, खासकर ऐसे समय में जब देश कोरोनावायरस महामारी के संकट से जूझ रहा है। गंगा और यमुना कई गांवों में पेयजल का मुख्य स्रोत हैं। इसके अलावा ये कई नदियों और जलाशयों के लिए जलस्रोत का काम करती हैं।
बहरहाल, प्रोफेसर ने कहा कि शवों को नदियों में फेंकने का संचरण पर ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है। तारे ने कहा कि गंगा या इसकी सहायक नदियों में शवों को प्रवाहित करने का मामला नया नहीं है, लेकिन पिछले 10-15 वर्षों में इसमें काफी कमी आई थी। उन्होंने कहा कि शवों को नदियों में फेंकने से नदियां मुख्यत: प्रदूषित होती हैं।
उन्होंने कहा कि अगर कोविड-19 के संदिग्ध रोगियों के बाहर भी निकाले जाते हैं तो काफी कुछ घुल चुका होता है (जल में प्रवाह के दौरान)। प्रभाव ज्यादा नहीं हो सकता है।
पर्यावरण इंजीनियरिंग, जल गुणवत्ता और दूषित जल शोधन विषय पढ़ाने वाले तारे ने कहा कि अगर यह जल जलापूर्ति के लिए भी जाता है तो यह जल आपूर्ति प्रणाली से जाता है। साधारण शोधन से काम चल जाता है।

बिहार सरकार ने बक्सर जिले में मंगलवार को गंगा नदी से 71 शव बाहर निकाले, जहां वे नदी में तैरते मिले थे। इसके बाद इस बात का संदेह उत्पन्न हो गया कि ये शव कोविड-19 मरीजों के हो सकते हैं। इसी तरह उत्तरप्रदेश के बलिया के लोगों ने कहा कि उजियार, कुल्हड़िया और भरौली घाटों पर उन्होंने कम से कम 45 शव देखे।

बहरहाल, जिला अधिकारियों ने शवों की निश्चित संख्या नहीं बताई। हमीरपुर जिले के निवासियों ने सोमवार को यमुना में 5 शव बहते देखे जिससे भय पैदा हो गया कि ये कोविड-19 मरीजों के शव हो सकते हैं। बाद में शवों को बाहर निकालकर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

इसके बाद केंद्र ने मंगलवार को उन राज्यों से कड़ी निगरानी बरतने के लिए कहा, जहां से गंगा नदी गुजरती है ताकि नदी एवं इसकी सहायक नदियों में शवों को फेंकने से रोका जा सके। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने कहा कि इस तरह के माध्यम से संचरण चिंता की बात नहीं है।

उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से संचरण लोगों के बातचीत करने या जब 2 लोग एक-दूसरे के नजदीक हों तब होता है और अगर कोई बूंद किसी सतह पर गिरती है और दूसरा व्यक्ति इसके संपर्क में आता है तो यह जल के माध्यम से फैल सकता है।

बलिया में 7 शव और मिले : उत्तरप्रदेश के बलिया जिले में गंगा नदी के तटवर्ती इलाके में मंगलवार की रात सात और शव मिलने के साथ ही नदी से निकाले गए शवों की कुल संख्या 52 हो गई है । एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि नदी में मिल रहे शवों के कोविड संक्रमित होने की आशंका के मद्देनजर तटवर्ती इलाकों में संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा शवों का तत्काल अंतिम संस्कार करा दिया गया है ।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार बिहार सीमा से सटे नरही थाना क्षेत्र के गंगा नदी के भरौली व उजियार घाट पर गंगा नदी से सात और शव निकाले गए हैं। सूत्रों ने बताया कि नदी से निकले शवों की कुल संख्या 52 हो गई है, लेकिन किसी अधिकारी ने बरामद शवों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है ।

जिलाधिकारी अदिति सिंह और पुलिस अधीक्षक डॉ विपिन ताडा ने गंगा नदी से मिले शवों की संख्या की आधिकारिक रूप से पुष्टि नही की हैं और नदी से निकले शवों का नदी किनारे ही गड्ढा खोदकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। उप जिलाधिकारी (सदर) राजेश यादव ने बुधवार को बताया कि सभी शवों का मंगलवार की रात को अंतिम संस्कार कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि गंगा नदी के रुख को देखते हुए ऐसा लगता है कि पड़ोसी बिहार राज्य के बक्सर जिले व दूसरे हिस्सों की तरफ से शव प्रवाहित होकर आए हैं। उन्होंने बताया कि शवों के आने के स्रोत की जांच की जा रही है और जांच के उपरांत ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

उन्होंने बताया कि नरही थाना क्षेत्र के भरौली व उजियार घाट से पड़ोसी बिहार राज्य के बक्सर जिले के घाट की दूरी तकरीबन एक किलोमीटर है और गंगा नदी में हवा का रुख बलिया जिले की तरफ है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गंगा नदी में मिल रहे शवों के कोविड संक्रमित होने की आशंका के मद्देनजर शवों का तत्काल अंतिम संस्कार करा दिया जा रहा है, ताकि तटवर्ती इलाकों में कोई संक्रामक रोग न फैल पाए। (भाषा)



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