Daily Horoscope

ईसा मसीह ने किया था यूहन्ना के उपदेशों का चिंतन

Updated: बुधवार, 20 दिसंबर 2017 (12:24 IST)
पौने दो हजार साल पहले की बात है। फिलिस्तीन में उन दिनों हिरोदका राज था। सम्राट आगस्ट्स के हुक्म से रोमन जगत की मर्दुमशुमारी हो रही थी। उसमें शामिल होने के लिए यूसुफ नाम का यहूदी बढ़ई नाजरेत नगर से वेथलहम के लिए रवाना हुआ। वहीं पर उसकी पत्नी मरियम (मेरी) के गर्भ से ईसा का जन्म हुआ।
 
संयोग ऐसा था कि उस समय इन बेचारों को किसी धर्मशाला में भी ठिकाना न मिल सका। इस लाचार बच्चे को कपड़ों में लपेटकर चरनी में रख दिया गया। आठवें दिन बच्चे का नाम रखा गया, यीसु या ईसा। सौरी से निकलने के बाद मरियम और यूसुफ बच्चे को लेकर यरुशलम गए। उन दिनों ऐसी प्रथा थी कि माता-पिता बड़े बेटे को मंदिर में ले जाकर ईश्वर को अर्पित कर देते थे। इन लोगों ने भी इसी तरह ईसा को अर्पित कर दिया। ईसा दिन-दिन बड़े हो रहे थे। यूसुफ और मरियम हर साल यरुशलम जाते थे। ईसा भी साथ जाते थे।
 
ईसा जब 12 वर्ष के हुए, तो यरुशलम में दो दिन रुककर पुजारियों से ज्ञान चर्चा करते रहे। सत्य को खोजने की वृत्ति उनमें बचपन से ही थी। ईसा जब 30 साल के हुए, तो एक दिन किसी से उन्होंने सुना कि पास के जंगल में जॉर्डन नदी के किनारे एक महात्मा रहते हैं। उनका नाम है, यूहन्ना (जॉन)। बहुत से लोग उनका उपदेश सुनने जाते थे। ईसा को भी उत्सुकता हुई। वे भी यूहन्ना का उपदेश सुनने के लिए निकल पड़े।
 

यूहन्ना कहते थे- अब धरती पर प्रभु के राज्य का समय आ गया है। प्रभु के राज्य में हर आदमी यह जान लेगा कि सब आदमी बराबर हैं न कोई किसी से ऊंचा है, न कोई किसी से नीचा। सब लोगों को आपस में मिल-जुलकर प्रेम से रहना चाहिए और सबके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। इस तरह रहने और बुरे काम छोड़ देने से ही धरती पर प्रभु का राज्य आ सकेगा। सैनिक उनके पास जाते, तो वे उनसे कहते, दूसरों का माल मत छीनो। जो कुछ तुम्हें मिला है, उसी में खुश रहो। किसी से गाली-गलौज मत करो।
 
लोग पूछते, तब हम करें क्या? यूहन्ना कहते, जिसके पास दो कोट हैं, वह एक कोट उसे दे दे, जिसके पास एक भी नहीं है। जिसके पास भोजन है, वह उसे खिला दे, जिसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है। अमीर लोग यूहन्ना के पास जाते, तो वे उसे कहते, तुम गरीबों को सताओ मत। उन्हें लूटो मत।


यूहन्ना लोगों से कहते, अच्छी करनी करो। अपना जीवन बदल डालो, नहीं तो तुम्हारी भी गति उस बिना फल वाले पेड़ की तरह होगी, जो ईंधन के लिए काट दिया जाता है। जो लोग उनसे कहते कि हम अपना जीवन बदलेंगे, बदी छोड़कर नेकी करेंगे, उन्हें वे जॉर्डन नदी में नहलाते और कहते, मैंने तुम्हें जल से पवित्र किया है। तुम्हारी अंतरात्मा में प्रभु की जो शक्ति भरी है, वह तुम्हें पूरे तौर से पवित्र करेगी।
 

ईसा को यूहन्ना की बातें बहुत जंचीं। उन्होंने यूहन्ना से दीक्षा ले ली। उनकी बातों पर गहरा विचार करने के लिए वे घर लौटने के बजाय जंगल में ही रह गए। यूहन्ना की बातों पर ईसा ने गहराई से चिंतन और मनन किया और अंत में निश्चय किया कि हमें प्रभु की इच्छा के अनुसार प्रभु की सेवा करनी चाहिए।

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 18 सितंबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

गणेश चतुर्थी 2026: गणपति को पांचवें दिन कौन सा भोग लगाएं, प्रसाद चढ़ाएं

बुधादित्य राजयोग से चमकेगा 4 राशियों का भाग्य! कन्या राशि में बुध-सूर्य की युति से मिलेंगे शुभ संकेत

भविष्य मालिका की भविष्यवाणी: क्या मक्का-मदीना में होगा घोर युद्ध? जानें क्या किया गया है दावा

नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर: जानिए कुंडली में क्या कहते हैं ग्रह-नक्षत्र और भविष्य के संकेत

अगला लेख