ईसा मसीह के बारे में 10 रहस्यमयी बातें

अनिरुद्ध जोशी|
के बारे में कई तरह की बातें वक्त-वक्त पर सामने आती रही हैं। उनमें से कुछ को विवादित माना गया और कुछ पर अभी भी शोध जारी है। हालांकि इन बातों के सच होने का दावा हम नहीं करते। आओ जानते हैं ऐसी ही 10 रहस्यमयी बातों के संबंध में जानकारी। उक्त जानकारी का आधार समय-समय पर प्रकाशित खबरें और रिपोर्ट हैं।

1. 13 से 29 वर्ष के बीच कहां रहे ईसा मसीह?
एक यहूदी बढ़ई की पत्नी मरियम (मेरी) के गर्भ से यीशु का जन्म बेथलेहेम में हुआ। ईसा जब 12 वर्ष के हुए, तो यरुशलम में 2 दिन रुककर पुजारियों से ज्ञान चर्चा करते रहे। 13 वर्ष की उम्र में वे कहां चले गए थे, यह कोई नहीं जानता। 13 साल से 30 साल की उम्र के मध्य में क्या किया, यह रहस्य की बात है। बाइबल में उनके इन वर्षों के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं मिलता है। 30 वर्ष की उम्र में उन्होंने येरुशलम में यूहन्ना (जॉन) से दीक्षा ली। दीक्षा के बाद वे लोगों को शिक्षा देने लगे। ज्यादातर विद्वानों के अनुसार सन् 29 ई. को प्रभु ईसा गधे पर चढ़कर येरुशलम पहुंचे और वहीं उनको दंडित करने का षड्यंत्र रचा गया। अंतत: उन्हें विरोधियों ने पकड़कर क्रूस पर लटका दिया। उस वक्त उनकी उम्र थी लगभग 33 वर्ष।

रविवार को यीशु ने येरुशलम में प्रवेश किया था। इस दिन को 'पाम संडे' कहते हैं। शुक्रवार को उन्हें सूली दी गई थी इसलिए इसे 'गुड फ्राइडे' कहते हैं और रविवार के दिन सिर्फ एक स्त्री (मेरी मेग्दलेन) ने उन्हें उनकी कब्र के पास जीवित देखा। जीवित देखे जाने की इस घटना को 'ईस्टर' के रूप में मनाया जाता है। उसके बाद यीशु कभी भी यहूदी राज्य में नजर नहीं आए।


2. क्या 25 दिसंबर ही है ईसा मसीह का जन्मदिवस?
हाल ही में बीबीसी पर एक रिपोर्ट छपी थी उसके अनुसार यीशु का जन्म कब हुआ, इसे लेकर एकराय नहीं है। कुछ धर्मशास्त्री मानते हैं कि उनका जन्म वसंत में हुआ था, क्योंकि इस बात का जिक्र है कि जब ईसा का जन्म हुआ था, उस समय गड़रिये मैदानों में अपने झुंडों की देखरेख कर रहे थे। अगर उस समय दिसंबर की सर्दियां होतीं, तो वे कहीं शरण लेकर बैठे होते। और अगर गड़रिये मैथुन काल के दौरान भेड़ों की देखभाल कर रहे होते तो वे उन भेड़ों को झुंड से अलग करने में मशगूल होते, जो समागम कर चुकी होतीं। ऐसा होता तो ये पतझड़ का समय होता। मगर बाइबल में ईसा के जन्म का कोई दिन नहीं बताया गया है। इतिहासकारों के अनुसार रोमन काल से ही दिसंबर के आखिर में पैगन परंपरा के तौर पर जमकर पार्टी करने का चलन रहा है। यही चलन ईसाइयों ने भी अपनाया और इसे नाम दिया 'क्रिसमस'।

3. कैसा था ईसा मसीह का चेहरा?
अक्सर चित्रों में ईसा मसीह को एक सुंदर गोरा व्यक्ति बताया जाता है, लेकिन क्या यह सच है? 2001 में प्रकाशित बीबीसी की एक रिपोर्ट Looking for the historical Jesus के अनुसार अपनी सालों की रिसर्च और कड़ी मेहनत के बाद फॉरेंसिक साइंटिस्ट रिचर्ड नैवे ने ईसा मसीह के चेहरे का मॉडल दुनिया के सामने पेश किया है। ईसा के चेहरे का यह मॉडल वर्तमान में देखे जाने वाले चित्रों से एकदम अलग है। रिचर्ड ने इसराइली अर्चिओलॉजिकल साइट्स पर मिली 3 खोपड़ियों पर रिसर्च कर उन सारे पैमानों के साथ मिलाकर देखा, जो ईसा की शक्ल के बारे में लिखे गए थे।

नैवे ने जीसस को एक मिडल ईस्ट के ट्रेडिशनल यहूदी की तरह दिखाया है। उनका फेस उत्तरी इसराइल के गेलिली शहर के लोगों से मिलता है। एक्सपर्ट की रिसर्च टीम ने कई प्रसिद्ध लोगों जैसे मैसेडोनिया के फिलीप सेकंड, फादर ऑफ एलेक्जेंडर द ग्रेट और फ्रिजिया के किंग मिडास के चेहरे को जोड़कर नया चेहरा बनाया है। उन्होंने एक इसराइली आर्कियोलॉजिस्ट से यहूदी स्कल (खोपड़ी) लिया और स्कल की एक्स-रे स्लाइस क्रिएट की। फिर कम्प्यूटर की मदद से उसमें मसल्स, स्किन जोड़े गए। टीम ने उसमें दाढ़ी बढ़ाई और सिर के बाल छोटे रखे। ये घुंघराले बाल थे। दरअसल, ट्रेडिशनल यहूदी हुलिया इसी प्रकार का होता है।

टीम का मानना है कि जीसस की लंबाई 5 फीट के ऊपर रही होगी। जीसस के इस नए फेस के अनुसार उनका चेहरा बड़ा, काली आंखें, छोटे घुंघराले काले बाल और एक जंगली दाढ़ी के साथ चेहरे का रंग गहरा गेहूंआ। हालांकि एक्सपर्ट यह दावा नहीं करते हैं कि यहीं ईसा मसीह का चेहरा होगा लेकिन यह उनके चेहरे से सबसे करीबी चेहरा जरूर हो सकता है।


4. क्या भारत में रहे थे ईसा मसीह?
बहुत से लोग दावा करते हैं कि वे क्रॉस पर चढ़े जरूर थे लेकिन उनकी मौत नहीं हुई थी। जब क्रॉस पर चढ़ाया गया था तब उनकी उम्र लगभग 33 वर्ष थी। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि भारत के कश्मीर में जिस बौद्ध मठ में उन्होंने 13 से 29 वर्ष की उम्र में शिक्षा ग्रहण की थी उसी मठ में पुन: लौटकर अपना संपूर्ण जीवन वहीं बिताया। कश्मीर में उनकी समाधि को लेकर हाल ही में बीबीसी पर एक रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के अनुसार श्रीनगर के पुराने शहर की एक इमारत को 'रौजाबल' के नाम से जाना जाता है। यह रौजा एक गली के नुक्कड़ पर है और पत्थर की बनी एक साधारण इमारत है जिसमें एक मकबरा है, जहां ईसा मसीह का शव रखा हुआ है। श्रीनगर के खानयार इलाके में एक तंग गली में स्थिति है रौजाबल।

आधिकारिक तौर पर यह मजार एक मध्यकालीन मुस्लिम उपदेशक यूजा आसफ का मकबरा है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि यह नजारेथ के यीशु यानी ईसा मसीह का मकबरा या मजार है। लोगों का यह भी मानना है कि सन् 80 ई. में हुए प्रसिद्ध बौद्ध सम्मेलन में ईसा मसीह ने भाग लिया था। श्रीनगर के उत्तर में पहाड़ों पर एक बौद्ध विहार का खंडहर है, जहां यह सम्मेलन हुआ था। ईसा के भारत में रहने का प्रथम वर्णन 1894 में रूसी निकोलस लातोविच ने किया है। वे 40 वर्षों तक भारत और तिब्बत में भटकते रहे। इस दौरान उन्होंने पाली भाषा सीखी और अपने शोध के आधार पर एक किताब लिखी जिसका नाम है, 'दी अननोन लाइफ ऑ जीसस क्राइस्ट' जिसमें उन्होंने ये प्रमाणित किया कि हजरत ईसा ने अपने गुमनाम दिन लद्दाख और कश्मीर में बिताए थे। इस्लामी मान्यताओं के मुताबिक भी यह माना जाता है कि उनकी शक्ल का एक शख्स सूली पर चढ़ाया गया था।

5. क्या ईसा मसीह की पत्नी और उनके दो बच्चे थे?
एक नए शोध के अनुसार यीशु ने उनकी शिष्या मेरी मेग्दलीन से विवाह किया था जिनसे उनको दो बच्चे भी हुए थे। ब्रिटिश दैनिक 'द इंडिपेंडेंट में प्रकाशित रिपोर्ट में 'द संडे टाइम्स' के हवाले से बताया गया है कि ब्रिटिश लाइब्रेरी में 1500 साल पुराना एक दस्तावेज मिला है जिसमें एक दावा किया गया है कि ईसा मसीह ने न सिर्फ मेरी से शादी की थी बल्कि उनके दो बच्चे भी थे।

प्रोफेसर बैरी विल्सन और लेखक सिमचा जैकोविक ले. 'लोस्ट गौस्पेल' के नाम से जाने जाने वाले इस दस्तावेज को अरामाइक भाषा से अनूदित करने में महीनों लगे रहे। इन्होंने दावा किया है कि ईसा मसीह की पत्नी मेरी मेग्दलीन है। इससे पहले भी ईसा मसीह के बारे में लिखी गई किताबों में मेरी का अकसर जिक्र होता रहा है और ईसा मसीह के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों में उनकी मौजूदगी रही है। इससे पहले भी ईसा मसीह के बारे में लिखी गई किताबों में मेरी का अक्सर जिक्र होता रहा है और ईसा मसीह के जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों में उनकी मौजूदगी रही है। ट्रांसलेटेड किताब को पीगैसस प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। चर्च ने इसकी तुलना डैन ब्राउन के 2003 के उपन्यास विंची कोड से की है जिसमें मेरी और ईसा मसीह के बीच संबंधों की बात कही गई थी। हालांकि चर्च इसे मिथ्‍या मानता है।

6. क्या कृष्ण भक्त थे यीशु मसीह?
लुईस जेकोलियत (Louis Jacolliot) ने 1869 ई. में अपनी एक पुस्तक 'द बाइबिल इन इंडिया' (The Bible in India, or the Life of Jezeus Christna) में लिखा है कि जीसस क्रिस्ट और भगवान श्रीकृष्ण एक थे। लुईस जेकोलियत फ्रांस के एक साहित्यकार और वकील थे। इन्होंने अपनी पुस्तक में कृष्ण और पर एक तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया है। 'जीसस' शब्द के विषय में लुईस ने कहा है कि क्राइस्ट को 'जीसस' नाम भी उनके अनुयायियों ने दिया है। इसका संस्कृत में अर्थ होता है 'मूल तत्व'।

इन्होंने अपनी पुस्तक में यह भी कहा है कि 'क्राइस्ट' शब्द कृष्ण का ही रूपांतरण है, हालांकि उन्होंने कृष्ण की जगह 'क्रिसना' शब्द का इस्तेमाल किया। भारत में गांवों में कृष्ण को क्रिसना ही कहा जाता है। यह क्रिसना ही योरप में क्राइस्ट और ख्रिस्तान हो गया। बाद में यही क्रिश्चियन हो गया। लुईस के अनुसार ईसा मसीह अपने भारत भ्रमण के दौरान भगवान जगन्नाथ के मंदिर में रुके थे। एक रूसी अन्वेषक निकोलस नोतोविच ने भारत में कुछ वर्ष रहकर प्राचीन हेमिस बौद्ध आश्रम में रखी पुस्तक 'द लाइफ ऑफ संत ईसा' पर आधारित फ्रेंच भाषा में 'द अननोन लाइफ ऑफ जीजस क्राइस्ट' नामक पुस्तक लिखी है। इसमें ईसा मसीह के भारत भ्रमण के बारे में बहुत कुछ लिखा हुआ है। हालांकि इन लेखकों के दावे कितने सच हैं, यह हम नहीं जानते।

7. क्या ईसा के शिष्य थॉमस ने किया भारत में धर्मांतरण?
यीशु के कुल 12 शिष्य थे- 1. पीटर, 2. एंड्रयू, 3. जेम्स (जबेदी का बेटा), 4. जॉन, 5. फिलीप, 6. बर्थोलोमियू, 7. मैथ्यू, 8. थॉमस, 9. जेम्स (अल्फाइयूज का बेटा), 10. संत जुदास, 11. साइमन द जिलोट, 12. मत्तिय्याह। सूली के बाद ही उनके शिष्य ईसा की वाणी लेकर 50 ईस्वी में हिन्दुस्तान आए थे। उनमें से एक 'थॉमस' ने ही भारत में ईसा के संदेश को फैलाया। उन्हीं की एक किताब है- 'ए गॉस्पेल ऑफ थॉमस'। चेन्नई शहर के सेंट थामस माऊंट पर 72 ईस्वी में थॉमस एक भील के भाले से मारे गए। उक्त गॉस्पल में मेरी मेग्दालिन के भी सूत्र हैं।

माना जाता है कि भारत में की शुरुआत केरल के तटीय नगर क्रांगानोर में हुई, जहां किंवदंतियों के मुताबिक ईसा के 12 प्रमुख शिष्यों में से एक सेंट थॉमस ईस्वी सन 52 में पहुंचे थे। कहते हैं कि उन्होंने उस काल में सर्वप्रथम कुछ ब्राह्मणों को ईसाई बनाया था। इसके बाद उन्होंने आदिवासियों को धर्मांतरित किया था। दक्षिण भारत में सीरियाई ईसाई चर्च सेंट थॉमस के आगमन का संकेत देता है।

8. किस भाषा में बोलते थे ईसा मसीह?
यह बात 2014 की है। टॉम डी कास्टेला कहते हैं कि ईसा मसीह जिन स्थानों पर रहे, वहां कई भाषाएं बोली जाती हैं इसलिए यह सवाल मौजूं है कि वे कौन सी भाषा जानते थे? इसराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहु और पोप फ्रांसिस के बीच इस मसले पर एक बार तकरार भी हो चुकी है। नेतन्याहु ने येरुशलम में एक सार्वजनिक बैठक में पोप से कहा था, "ईसा मसीह यहां रहते थे और वे हिब्रू बोलते थे। पोप ने उन्हें टोकते हुए कहा, 'अरामीक'। नेतन्याहु ने इस पर जवाब देते हुए कहा, "वे अरामीक बोलते थे, लेकिन हिब्रू जानते थे।"

हिब्रू विद्वानों और धर्मग्रंथों की भाषा थी, लेकिन ईसा मसीह की रोजमर्रा की भाषा अरामीक रही होगी। अधिकतर बाइबिल के विद्वानों का कहना है कि बाइबिल में ईसा मसीह ने अरामीक भाषा में बोला है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में क्लासिक्स के व्याख्याता जोनाथन काट्ज के अनुसार इसकी कम संभावना है कि वे लैटिन जानते थे लेकिन हो सकता है कि वे थोड़ी बहुत ग्रीक जानते हो।


9. बाइबल कब लिखी गई?
बाइबल या बाइबिल का अर्थ किताब माना गया है। यह ईसाइयों का पवित्र धर्मग्रंथ है। इसमें ओल्ड टेस्टामेंट को भी शामिल किया गया है। ओल्ड टेस्टामेंट अर्थात पुराने सिद्धांत या नियम। इसमें यहूदी धर्म और यहूदी पौराणिक कहानियों, नियमों आदि बातों का वर्णन है। नए नियम के अंतर्गत ईसा के जीवन और दर्शन के बारे में उल्लेख है। इसमें खासतौर पर 4 शुभ संदेश हैं, जो ईसा के 4 अनुयायियों- मत्ती, लूका, युहन्ना और मरकुस द्वारा वर्णित हैं। कहते हैं कि बाइबल को ईसा के 200 साल बाद लिखा गया था। हालांकि विद्वानों में इसको लेकर भी मतभेद हैं।

10. ईसा पर बनी सबसे विवादित फिल्म?
दा विंची कोड : उत्तर इजिप्ट (मिस्र) के एक शहर नाग हम्मदि के पास सन् 1945 में एक बर्तन में सुरक्षित रखे हुए 12 दस्तावेज मिले। बरसों असली दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद 'डैन ब्राउन' ने यह उपन्यास 'दा विंची कोड' लिखा। इन दस्तावेजों को गुह्य समूहों ने जीवित रखा था। विख्यात चित्रकार लिओनार्दो दा विंची ऐसे ही किसी गुह्य समूह के एक सदस्य थे इसलिए उन्होंने अपनी पेंटिंग्स में कुछ सूत्र, कुछ इशारे छुपाए हैं जिन्हें अनकोड किया जा सकता है। इन सबको आधार बनाकर बनी है विवादित फिल्म 'दा विंची कोड।'


11.कौन है सैंटा?
सैंटा क्लॉज चौथी शताब्दी में मायरा के निकट एक शहर (जो अब तुर्की के नाम से जाना जाता है) में जन्मे संत निकोलस का ही रूप है। संत निकोलस के पिता एक बहुत बड़े व्यापारी थे, जिन्होंने निकोलस को हमेशा दूसरों के प्रति दयाभाव और जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए प्रेरित किया। निकोलस पर इन सब बातों का इतना असर हुआ कि वह हर समय जरूरतमंदों की सहायता करने को तैयार रहता।

बच्चों से उन्हें खास लगाव रहा। अपनी दौलत में से बच्चों के लिए वह खूब सारे खिलौने खरीदते और खिड़कियों से उनके घरों में फेंक देते। संत निकोलस की याद में कुछ जगहों पर हर साल 6 दिसंबर को 'संत निकोलस दिवस' भी मनाया जाता है। हालांकि एक धारणा यह भी है कि संत निकोलस की लोकप्रियता से नाराज लोगों ने 6 दिसंबर के दिन ही उनकी हत्या करवा दी। इन बातों के बाद भी बच्चे 25 दिसंबर को ही सैंटा का इंतजार करते हैं।

12.जिंगल बेल :
जिंगल बेल के गाने को ईसाई धर्म में क्रिसमस से जोड़ दिया गया है लेकिन यह सच नहीं है। दरअसल यह क्रिसमस सॉग्न है ही नहीं। यह थैंक्सगिविंग सॉग्न है जिसे 1850 में जेम्स पियरपॉन्ट ने वन हॉर्स ओपन स्लेई शीर्षक से लिखा था। वे जार्जिया के सवाना में म्यूजिक डायरेक्टर थे। पियरपॉन्ट की मौत से 3 साल पहे यानी 1890 तक यह क्रिसमस का हिट गीत बन गया था।

(एजेंसियां)



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