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छठ पूजा में षष्ठी के सूर्य को सांध्य अर्घ्य देने का महत्व और समय, जानिए 7 खास बातें

Updated: बुधवार, 10 नवंबर 2021 (12:10 IST)
Chhath Puja 2021 : 4 दिन चलने वाले इस पर्व में सूर्यदेव और छठी माता की पूजा होती है। खराने के भोजन को ग्रहण करने के बाद ही व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। षष्ठी के अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर सप्तमी के उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर ही व्रत का पारण किया जाता है। आओ जानते हैं कि सांध्य अर्घ्य की परंपरा।
 
 
छठ पूजा: संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य समय
10 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय : शाम 05:30.
11 नवंबर (उषा अर्घ्य) सूर्योदय का समय : प्रात: 06:41.
 
संध्या अर्घ्य ( Chhath puja sandhya arghya 2021 ) : 
1. षष्ठी के दिन ही छठ पूजा और पर्व रहता है। इस दिन संध्या अर्घ्य का महत्व है। इस दिन कार्तिक शुक्ल की षष्ठी होती है। संध्या षष्ठी को अर्घ्य अर्थात संध्या के समय सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है और विधिवत पूजन किया जाता है। 
 
2. इस दिन प्रात:काल स्नानादि के बाद मंत्र से संकल्प लिया जाता है - ॐ अद्य अमुक गोत्रो अमुक नामाहं मम सर्व पापनक्षयपूर्वक शरीरारोग्यार्थ श्री सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।
 
3. इस समय सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं। इसीलिए प्रत्यूषा को अर्घ्य देने का लाभ मिलता है। कहते हैं कि शाम के समय सूर्य की आराधना से जीवन में संपन्नता आती है।
 
4. छठ पूजा की सामग्री में नए वस्त्र, बांस की दो बड़ी टोकरी या सूप, थाली, पत्ते लगे गन्ने, बांस या फिर पीतल के सूप, दूध, जल, गिलास, चावल, सिंदूर, दीपक, धूप, लोटा, पानी वाला नारियल, अदरक का हरा पौधा, नाशपाती, शकरकंदी, हल्दी, मूली, मीठा नींबू, शरीफा, केला, कुमकुम, चंदन, सुथनी, पान, सुपारी, शहद, अगरबत्ती, धूप बत्ती, कपूर, मिठाई, गुड़, चावल का आटा, गेहूं।
 
5. अर्घ्य देने के लिए बांस की 3 बड़ी टोकरी या पीतल का सूप लें, जिसमें चावल, लाल सिंदूर, गन्ना, हल्दी, सुथनी, सब्जी, शकरकंदी, नाशपाती, शहद, पान, बड़ा नींबू, सुपारी, कैराव, कपूर, मिठाई, चंदन, ठेकुआ, मालपुआ, खीर, सूजी का हलवा, पूरी, चावल से बने लड्डू आदि सभी सजा लें। साथ में थाली, दूध और गिलास ले लें। सूर्य को अर्घ्य देते समय सारा प्रसाद टोकरी में रखें और एक दीपक भी जला लें। इसके बाद नदी में उतरकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें।
 
ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥
 
6. इसी दौरान सूर्य को जल एवं दूध चढ़ाकर प्रसाद भरे सूप से छठी मैया की पूजा भी की जाती है। शाम को बांस की टोकरी में ठेकुआ, चावल के लड्डू और कुछ फल रखें जाते हैं और पूजा का सूप सजाया जाता है और तब सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
 
7. बाद में रात्रि को छठी माता के गीत गाए जाते हैं और व्रत कथा सुनी जाती है। दूसरे दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर उषाकाल में सूर्य को अर्घ्य देकर पारण किया जाता है।

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