शार्प टेन ओ क्लॉक...
टाइम वेस्ट मत कर यार
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दरअसल समय पर काम करने के प्रति हम इंडियंस की मेंटिलिटी कुछ अलग है और इसका असर हमारे काम, करियर और आगे बढ़ने की कोशिशों पर भी पड़ता है। इसलिए ये जान लें कि अगर हमने समय का साथ नहीं दिया तो समय भी हमारा साथ नहीं देगा।
10 बजे यानी 9:55 बजे
विदेशी कंपनियों खासतौर पर योरप से लेकर अमेरिका तक में समय का सम्मान करना खूब जानते हैं। अगर उन्होंने किसी को 10 बजे मिलने का समय दिया है तब वे स्वयं उसके लिए 9:55 बजे तैयार रहते हैं। यह बात अगर हमारे साथ होती तब 10 के 10:15 बजना मामूली बात है।
दरअसल इससे पता चलता है कि व्यक्ति काम के प्रति कितना सीरियस है। आप किसी व्यक्ति को 15 मिनट बिना कारण के इंतजार कैसे करवा सकते हैं विदेश में लोग इतनी देर तक बिना किसी कारण के रुकने के बिल्कुल भी आदि नहीं होते हैं।
तो समय आपका खयाल रखेगा
अगर आप अपने आपको तेजी से आगे बढ़ता देखना चाहते हैं तब आपको समय का सम्मान करना जरूरी है। समय पर स्वास्थ्य की देखभाल करने से लेकर सही समय पर पहुँचना यह सब कुछ आगे बढ़ने के लिए काफी जरूरी होता है। अगर आपने समय का सम्मान किया है तब प्रगति निश्चित है।
डॉट टेन ओ क्लॉक
आप किसी इंटरव्यू में 10 की बजाय 11 बजे पहुँचेंगे तब शायद आपको इंटरव्यू बोर्ड के सामने तो क्या भीतर बैठने के लिए भी नहीं कहा जाएगा। दरअसल समय आपको संगठित व्यक्तित्व में ढालता है। अगर व्यक्ति के मन में समय के प्रति सम्मान का भाव नहीं होगा तब वह मनमर्जी का मालिक होगा और कभी भी सुबह को सुबह नहीं कह पाएगा बल्कि वह समय को अपनी तरह से परिभाषित करने से भी बाज नहीं आएगा।
कुल मिलाकर भारतीय परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो कॉर्पोरेट वर्ल्ड ने अब जाकर समय का सम्मान करना सीखा है पर अब भी हमें काफी कुछ बदलाव लाना बाकी है जो समय रहते ले आएँ तो काफी फर्क पड़ सकता है। क्योंकि अगर हमने समय की कद्र नहीं की तो समय भी हमारी कद्र नहीं करेगा।

