भागमभाग में छिपा है गम
एक व्यक्ति अपनी चमचमाती नई महँगी कार से घर जा रहा था। तभी एक सनसनाती ईंट ने कार से टकराकर उसका हुलिया बिगाड़ दिया। अपनी नई कार को चोट पहुँचने पर वह तिलमिला उठा, क्योंकि नई कार पर तो छोटी-मोटी खरोंच लगने से ही व्यक्ति आग बबूला हो उठता है। यहाँ तो ईंट ने उसकी कार में गहरा निशान बना दिया था।
उसने झटके से कार रोकी और रिवर्स करके तेजी से उस जगह पहुँचा, जहाँ से ईंट आई थी। वहाँ एक बालक खड़ा था। उसने आव देखा न ताव और बालक को दो तमाचे जड़ते हुए बोला- तूने ही ईंट मारी थी न नालायक। मेरी नई की नई गाड़ी का सत्यानाश कर दिया, अब इसका हर्जाना कौन भरेगा, तेरा बाप?
बालक- हाँ अंकल, ईंट मैंने ही मारी थी। बालक की हामी से आपा खोकर उस व्यक्ति ने बालक को बुरी तरह झिंझोड़कर उसे दो जोरदार थप्पड़ और जमा दिए। इससे बालक के आँसू फूट पड़े। वह रोते-रोते बोला- अंकल, मैंने आपको रोकने के लिए ईंट मारी थी। वह देखो, झाड़ियों में मेरे पिताजी व्हील चेयर से नीचे गिर पड़े हैं। उन्हें लकवा है।
मैं अकेला उन्हें उठाकर चेयर पर नहीं बैठा सकता। इसलिए बहुत देर से यहाँ से गुजरते लोगों को रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। थक-हारकर मैंने ईंट मारने का तरीका अपनाया और आपको रोकने में कामयाब रहा। आप मुझे चाहें जो सजा दें, लेकिन मेरे पिता को चेयर पर बैठाने में मेरी मदद कर दें।
यह सुनकर वह व्यक्ति स्तब्ध रह गया और अपने किए पर पछताने लगा। उसने बच्चे के पिता को चेयर पर बैठाया और अपनी कार की ओर चल दिया। तभी बच्चा धीरे से बोला- अंकल, आपका नुकसान। व्यक्ति- फ्रिक न करो, गाड़ी का बीमा है।
दोस्तो, जिंदगी की रफ्तार में हम इतना खो गए हैं कि हमें रोकने के लिए किसी को ईंट का सहारा लेना पड़ता है। हमें होश ही नहीं है कि हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं। बस किए जा रहे हैं, क्योंकि हमें भय है कि हम कहीं दूसरों से पीछे न रह जाएँ।
इसलिए बिना सोचे-समझे बस दौड़े जा रहे हैं, दौड़े जा रहे हैं। हमारे पास इतना भी समय नहीं है कि रुककर यह सोच-विचार करें कि हम जो कर रहे हैं वह सही है या गलत। इस दौड़ का अंत कहाँ है? या फिर है भी कि नहीं?
क्या हमारे पास अपने लिए और अपनों के लिए समय है? ऐसेलोगों को समझाओ कि भैया थोड़ा रुककर अपने लिए भी सोचें, तो कहेंगे कि यह सब अपने और अपनों के लिए ही तो है। तो अपने लिए ऐसा क्या करना कि आप खुद को ही भूल जाएँ। यह गलतफहमी है कि वे खुद की सोचते हैं। खुद की सोचते तो कुछ समय खुद केलिए और अपनों के लिए भी निकालते, जिनके कि नाम पर वे यह सब कर रहे हैं।
दूसरी ओर, जब आप अपनी सफलता का आनंद अपनों के साथ ही न उठा पाएँ, उनके साथ चैन से बैठकर दो बातें न कर पाएँ तो क्या मतलब इस भागमभाग का। इससे आपके अपने धीरे-धीरे आपसे दूर होते जाएँगे। बाद में जिंदगी के किसी मोड़ पर जब आपको उनकी सबसे ज्यादाजरूरत होगी, तब उनके पास आपके लिए समय नहीं होगा। तब आपको अपनी गलती का अहसास होगा भी तो उसका कोई फायदा नहीं।
वो कहते हैं न कि सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया। इसलिए बेहतर है कि इसके पहले कि कोई व्यक्ति, कोई घटना या तनावों के कारण हुई बीमारी आपको झकझोर कर बताए कि आपका बहुत नुकसान हो चुका है, आप खुद ही इस भागमभाग से अपने आपको अलग कर लें, क्योंकि इसमें तो गम ही गम छुपा है।
और अंत में, आज 'ऑटो रेस डे' है। इस अवसर पर आज से रोज अपने लिए कुछ समय निकालकर मनन करें कि आप जो कर रहे हैं, वह सही है या गलत। ध्यान लगाएँ। इससे आप अंधी दौड़ से बच जाएँगे और पूरे होशोहवाश में दौड़ लगा पाएँगे।
इस कारण किसी को आपकी ओर ईंट उछालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही आपको अपने सपनों को पूरा करने के लिए ज्यादा कुछ करना भी नहीं पड़ेगा, सब कुछ स्वतः ही होता चला जाएगा, क्योंकि आप जिंदगी की ऑटो रेस को जीतना जो सीख चुके होंगे। अरे भई, जिंदगी की दौड़ में बने रहना हैतो बेकार मत बैठो।
उसने झटके से कार रोकी और रिवर्स करके तेजी से उस जगह पहुँचा, जहाँ से ईंट आई थी। वहाँ एक बालक खड़ा था। उसने आव देखा न ताव और बालक को दो तमाचे जड़ते हुए बोला- तूने ही ईंट मारी थी न नालायक। मेरी नई की नई गाड़ी का सत्यानाश कर दिया, अब इसका हर्जाना कौन भरेगा, तेरा बाप?
बालक- हाँ अंकल, ईंट मैंने ही मारी थी। बालक की हामी से आपा खोकर उस व्यक्ति ने बालक को बुरी तरह झिंझोड़कर उसे दो जोरदार थप्पड़ और जमा दिए। इससे बालक के आँसू फूट पड़े। वह रोते-रोते बोला- अंकल, मैंने आपको रोकने के लिए ईंट मारी थी। वह देखो, झाड़ियों में मेरे पिताजी व्हील चेयर से नीचे गिर पड़े हैं। उन्हें लकवा है।
मैं अकेला उन्हें उठाकर चेयर पर नहीं बैठा सकता। इसलिए बहुत देर से यहाँ से गुजरते लोगों को रोकने की कोशिश कर रहा था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। थक-हारकर मैंने ईंट मारने का तरीका अपनाया और आपको रोकने में कामयाब रहा। आप मुझे चाहें जो सजा दें, लेकिन मेरे पिता को चेयर पर बैठाने में मेरी मदद कर दें।
यह सुनकर वह व्यक्ति स्तब्ध रह गया और अपने किए पर पछताने लगा। उसने बच्चे के पिता को चेयर पर बैठाया और अपनी कार की ओर चल दिया। तभी बच्चा धीरे से बोला- अंकल, आपका नुकसान। व्यक्ति- फ्रिक न करो, गाड़ी का बीमा है।
दोस्तो, जिंदगी की रफ्तार में हम इतना खो गए हैं कि हमें रोकने के लिए किसी को ईंट का सहारा लेना पड़ता है। हमें होश ही नहीं है कि हम क्या कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं। बस किए जा रहे हैं, क्योंकि हमें भय है कि हम कहीं दूसरों से पीछे न रह जाएँ।
इसलिए बिना सोचे-समझे बस दौड़े जा रहे हैं, दौड़े जा रहे हैं। हमारे पास इतना भी समय नहीं है कि रुककर यह सोच-विचार करें कि हम जो कर रहे हैं वह सही है या गलत। इस दौड़ का अंत कहाँ है? या फिर है भी कि नहीं?
क्या हमारे पास अपने लिए और अपनों के लिए समय है? ऐसेलोगों को समझाओ कि भैया थोड़ा रुककर अपने लिए भी सोचें, तो कहेंगे कि यह सब अपने और अपनों के लिए ही तो है। तो अपने लिए ऐसा क्या करना कि आप खुद को ही भूल जाएँ। यह गलतफहमी है कि वे खुद की सोचते हैं। खुद की सोचते तो कुछ समय खुद केलिए और अपनों के लिए भी निकालते, जिनके कि नाम पर वे यह सब कर रहे हैं।
दूसरी ओर, जब आप अपनी सफलता का आनंद अपनों के साथ ही न उठा पाएँ, उनके साथ चैन से बैठकर दो बातें न कर पाएँ तो क्या मतलब इस भागमभाग का। इससे आपके अपने धीरे-धीरे आपसे दूर होते जाएँगे। बाद में जिंदगी के किसी मोड़ पर जब आपको उनकी सबसे ज्यादाजरूरत होगी, तब उनके पास आपके लिए समय नहीं होगा। तब आपको अपनी गलती का अहसास होगा भी तो उसका कोई फायदा नहीं।
वो कहते हैं न कि सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया। इसलिए बेहतर है कि इसके पहले कि कोई व्यक्ति, कोई घटना या तनावों के कारण हुई बीमारी आपको झकझोर कर बताए कि आपका बहुत नुकसान हो चुका है, आप खुद ही इस भागमभाग से अपने आपको अलग कर लें, क्योंकि इसमें तो गम ही गम छुपा है।
और अंत में, आज 'ऑटो रेस डे' है। इस अवसर पर आज से रोज अपने लिए कुछ समय निकालकर मनन करें कि आप जो कर रहे हैं, वह सही है या गलत। ध्यान लगाएँ। इससे आप अंधी दौड़ से बच जाएँगे और पूरे होशोहवाश में दौड़ लगा पाएँगे।
इस कारण किसी को आपकी ओर ईंट उछालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही आपको अपने सपनों को पूरा करने के लिए ज्यादा कुछ करना भी नहीं पड़ेगा, सब कुछ स्वतः ही होता चला जाएगा, क्योंकि आप जिंदगी की ऑटो रेस को जीतना जो सीख चुके होंगे। अरे भई, जिंदगी की दौड़ में बने रहना हैतो बेकार मत बैठो।
