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मराठी फिल्म 'देऊल बंद 2' की मदद करने पर ट्रोल हुए शाहरुख खान, निर्देशक बोले- हिंदू-मुसलमान कहां से आया?
मराठी सिनेमा की हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म 'देऊल बंद 2' की सफलता के पीछे बॉलीवुड के 'किंग खान' यानी शाहरुख खान का एक ऐसा योगदान था, जो फिल्म के रिलीज होने तक दुनिया से छिपा रहा। हाल ही में जब फिल्म के निर्देशक प्रवीण तरडे ने इस राज से पर्दा उठाया, तो सोशल मीडिया पर प्रशंसा के साथ-साथ एक अजीब विवाद भी खड़ा हो गया।
प्रवीण तरडे ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि फिल्म की रिलीज से ठीक पहले मेकर्स भारी वित्तीय संकट से जूझ रहे थे। थिएटर्स में फिल्म रिलीज करने के लिए डिजिटल सिनेमा पैकेज (DCP) की जरूरत थी। मेकर्स का बजट केवल 12 से 13 लाख रुपये था, लेकिन रेड चिलीज एंटरटेनमेंट से जब बिल आया तो वह करीब 43 लाख रुपये का था।
पैसे न होने के कारण फिल्म की रिलीज अटक सकती थी। जब यह बात शाहरुख खान तक पहुंची, तो उन्होंने अपनी टीम से सिर्फ एक सवाल पूछा—"क्या फिल्म अच्छी है?" टीम ने कहा—"फिल्म बेहतरीन है।" बस फिर क्या था, शाहरुख ने तुरंत अपनी टीम को आदेश दिया, "यह एक मराठी फिल्म है, इन्हें तुरंत DCP सौंप दो। बिल का भुगतान हम बाद में देख लेंगे।" बाद में शाहरुख खान ने दरियादिली दिखाते हुए 42 लाख की वह पूरी रकम माफ कर दी।
शाहरुख खान के इस निस्वार्थ सहयोग का नतीजा यह हुआ कि फिल्म समय पर सिनेमाघरों में आई। दर्शकों ने फिल्म को इतना प्यार दिया कि महज 8-10 करोड़ के बजट में बनी 'Deool Band 2' ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन कर इतिहास रच दिया। यह 'सैराट' और 'राजा शिवाजी' के बाद तीसरी सबसे बड़ी मराठी फिल्म बन गई।
लेकिन जैसे ही प्रवीण तरडे ने शाहरुख को इस सफलता का क्रेडिट दिया, सोशल मीडिया का एक धड़ा एक्टिव हो गया। ट्रोल्स ने इस नेक काम को धर्म से जोड़ते हुए सवाल उठाना शुरू कर दिया कि एक मुस्लिम अभिनेता ने हिंदू देवता (स्वामी समर्थ) पर आधारित फिल्म की मदद क्यों की?
प्रवीण तरडे का ट्रोल्स को करारा जवाब है
इस बेवजह की बयानबाजी और ट्रोलिंग पर निर्देशक प्रवीण तरडे चुप नहीं रहे। 'पॉडकट्टा' को दिए इंटरव्यू में उन्होंने ट्रोल्स की जमकर क्लास लगाई। तरडे ने बेहद कड़े शब्दों में कहा, इसमें हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा कहां से आ गया? वह भी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं और मैं भी। जब हमारे पास पैसे नहीं थे, तब उन्होंने बड़े दिल से हमारी मदद की। क्या हमें सिर्फ इसलिए उनकी दयालुता को नजरअंदाज कर देना चाहिए क्योंकि वह दूसरे धर्म के हैं? हमें खुले दिल से उनका आभार मानना चाहिए।
प्रवीण तरडे ने साफ किया, जहां तक हिंदुत्व की बात है, मुझे किसी के सामने कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है। शाहरुख खान को धन्यवाद देने का मेरी हिंदुत्व विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है। एक अच्छा इंसान सिर्फ एक अच्छा इंसान होता है।
आस्था और यथार्थ का बेजोड़ संगम है 'देऊल बंद 2'
साल 2015 में आई सुपरहिट फिल्म 'देऊळ बंद' की यह सीक्वल न सिर्फ धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील मुद्दे—'किसानों की आत्महत्या' पर भी चोट करती है। फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में मोहन जोशी और स्नेहल तरडे हैं, जिन्होंने आस्था और नास्तिकता के बीच के द्वंद्व को बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है।
