dharma sangrah

अरविंद त्रिवेदी ने ठुकरा दिया था 'रामायण' में रावण का रोल

Updated: बुधवार, 6 अक्टूबर 2021 (14:47 IST)
बहुत कम कलाकार ऐसा कर पाते हैं कि कोई एक रोल उन्हें अमर कर दे। अरविंद त्रिवेदी ने हिंदी और गुजराती की मिलाकर 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें रामानंद सागर की 'रामायण' में रावण के रोल के लिए पिछले 30-35 सालों से याद किया जाता रहा है। जितनी प्रसिद्धी राम का रोल निभा कर अभिनेता अरुण गोविल को मिली, उतनी ही प्रसिद्धी अरविंद त्रिवेदी को रावण के रोल के लिए मिली।
 
रावण के रूप में वे इतने लोकप्रिय हो गए कि इसको भुनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने 1991 में गुजरात से अरविंद को चुनाव का टिकट दे दिया और वे चुनाव जीते भी।  
 
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अरविंद त्रिवेदी ने रावण का रोल करने से मना कर दिया था। अरविंद को जब पता चला कि रामानंद सागर दूरदर्शन के लिए रामायण बना रहे हैं तो वे केवट के रोल के लिए ऑडिशन देने गए। उस समय रामानंद सागर को सबसे ज्यादा फिक्र रावण के रोल के लिए कलाकार ढूंढने में हो रही थी। 
 
रावण के रोल के लिए वे ऐसा कलाकार ढूंढ रहे थे जो न केवल बेहतरीन अभिनेता हो बल्कि अपनी दमदार शख्सियत के बूते पर यह रोल को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़े। ऑडिशन देने आए अरविंद में रामानंद सागर को अपने टीवी सीरियल के लिए 'रावण' नजर आया। 
 
सागर ने अरविंद को रावण का रोल ऑफर कर दिया, लेकिन अरविंद त्रिवेदी रावण का रोल निभाने के लिए तैयार नहीं हुए। अरविंद त्रिवेदी एक बेहद धार्मिक इंसान थे और उन्हें इस तरह का रोल निभाने में संभवत: संकोच हुआ हो। उन्हें किसी तरह मनाया गया और वे राजी हुए। 
 
रावण के रोल के लिए सबसे जरूरी बात थी कि अभिनय के जरिये अहंकार का भाव पैदा किया जाए और यह काम अरविंद त्रिवेदी ने बखूबी किया। अपनी बुलंद आवाज, चेहरे पर अहं के भाव और अट्टहास करते हुए डॉयलॉग डिलीवरी के जरिये उन्होंने रावण का रोल निभाया। उनका यह अंदाज, यह मैनेरिज्म काफी पसंद किया गया। 
 
रावण के रूप में वे क्रूर नहीं बल्कि अहंकारी लगे और यही उनके अभिनय का कमाल था। उनका उच्चारण भी दोषरहित था और गाढ़ी हिंदी में लिखे गए शब्दों को उनके मुंह से सुनना अच्छा लगा। 
 
केवल रावण के रोल के लिए अरविंद को याद करना उनकी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं होगा। कई फिल्मों में उन्होंने यादगार रोल अदा किए। वे धाकड़ अभिनेता थे और अपनी उपस्थिति मजबूती के साथ दर्ज कराते थे। 
 
1998 में रिलीज हुई गुजराती फिल्म 'देश रे जोया दादा परदेश जोया' में अरविंद ने दादाजी का रोल अदा किया था और इस फिल्म ने सफलता के कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। 
 
8 नवंबर 1938 को जन्मे अरविंद त्रिवेदी ने 6 अक्टोबर 2021 में अंतिम सांस ली। वे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के चेयरमैन भी रहे। नलिनी से उन्होंने विवाह रचाया और उनकी तीन बेटियां हैं। 
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें

Show comments

बी प्राक ने ‘इश्क का गुलाम’ में बयां किया दिल टूटने का दर्द, ‘प्रेम कीटाणु’ का नया गाना रिलीज

अंजलि अरोड़ा बनीं माता सीता, 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' का ट्रेलर रिलीज, खराब VFX पर जमकर ट्रोलिंग

CBFC के नए बोर्ड का ऐलान, पंकज त्रिपाठी और प्रीति जिंटा समेत सेंसर बोर्ड में 18 नए दिग्गजों की एंट्री

अक्षय कुमार से कंगना रनौत तक, सितारों ने पीएम नरेंद्र मोदी को दी जन्मदिन की बधाई

Drishyam 3 Cast Fees: 2 अक्टूबर के आखिरी खेल के लिए अजय देवगन ने ली भारी रकम, जानें तब्बू और श्रिया सरन को मिले कितने करोड़?

सभी देखें

यश की 'Toxic' का बॉक्स ऑफिस पर निकला दम, 3000 करोड़ का सपना चकनाचूर; जानें सुपर फ्लॉप होने के 5 बड़े कारण

बिना स्टार, बिना प्रमोशन... फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छा गई 'हनुमान अंश', बाबा नीब करौरी के चमत्कार या कुछ और? जानें 5 बड़े कारण

यश की ‘टॉक्सिक’ बॉक्स ऑफिस पर क्या होगा? सुनामी आने को तैयार, 5 दिन में रिकॉर्डतोड़ कमाई का प्लान

सनी देओल की 'बंटवारा 1947' बॉक्स ऑफिस पर क्यों हुई धड़ाम? भारी पड़ गईं ये 5 बड़ी गलतियां

दिशा पाटनी की टोन्ड बॉडी का खुला राज: रोज करती हैं ये वर्कआउट, ऐसी है उनकी डाइट और लाइफस्टाइल

अगला लेख