राजेन्द्र नाथ : मिस्टर पोपटलाल

Rajendranath
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लोकप्रिय हास्य कलाकार राजेन्द्र नाथ का 76 वर्ष की उम्र में 13 फरवरी 2008 को देहांत हो गया। राजेन्द्र नाथ उस दौर के कलाकार थे, जब फिल्मों में हीरो के साथ एक हास्य अभिनेता अनिवार्य होता था।

कई ‍प्रसिद्ध नायकों की हास्य कलाकारों के साथ जोड़ी थी। जिस तरह गुरुदत्त की फिल्मों में जॉनी वॉकर नजर आते थे, उसी तरह शम्मी कपूर की जोड़ी राजेन्द्र नाथ के साथ थी।

संघर्ष की राह पर राजेन्द्र नाथ
राजेन्द्र नाथ की बहन कृष्णा का विवाह राज कपूर से हुआ। राजेन्द्र नाथ के बड़े भाई प्रेमनाथ को पृथ्वीराज कपूर ने मुम्बई बुला लिया था। बड़े भैया को अभिनेता बनते देख राजेन्द्र नाथ भी 1949 में मुंबई पहुँच गए।

दोनों भाई एक कमरे में साथ रहते थे। मुंबई पहुँचकर राजेन्द्र नाथ ने स्ट्रगलर के रूप में अपना सफर शुरू किया और कई बार उन्हें आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।

आय.एस. जौहर ने राजेन्द्र नाथ को ‘हम सब चोर हैं’ के जरिए पहला ब्रेक दिया। फिल्म को अच्छी सफलता मिली और उनकी पहचान बनी।

नासिर हुसैन द्वारा निर्देशित ‘दिल देके देखो’ राजेन्द्र नाथ की पहली बड़ी सफलता थी। इस फिल्म की कामयाबी के बाद राजेन्द्र नाथ की संघर्ष की राह आसान होती चली गई।

मिस्टर पोपटलाल
देव आनंद और आशा पारेख की फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ में राजेन्द्र नाथ को पोपटलाल का किरदार निभाने को मिला। इस पोपटलाल के किरदार के रूप में उन्हें अपार लोकप्रियता मिली और वे दर्शकों के बीच इसी नाम से लोकप्रिय हो गए।

आँखों पर बड़ा और मोटा चश्मा। सिर पर टोपी। मोजे और बड़े-बड़े जूतों में राजेन्द्र नाथ कई फिल्मों में नजर आएँ। उनका यह गेटअप बेहद लोकप्रिय हुआ।

उनका किरदार अक्सर मूर्ख आदमी का हुआ करता था। वे एक ऐसे मूर्ख व्यक्ति बनते जो उलटी-सीधी हरकत किया करता, लेकिन उसकी ये हरकतें दर्शकों के मन को बेहद भाती थी। वह हमेशा हीरो का साथ देता और खलनायक से लड़ाई मोल लेता। वे इस इमेज में बँध गए और अधिकांश फिल्मों में इसी किरदार को दोहराते हुए वे नजर आएँ।

द पोपटलाल शो
पोपटलाल के चरित्र को जब खूब लोकप्रियता मिली तो राजेन्द्र नाथ ने उसे भुनाने की सोची। उन्होंने ‘द पोपटलाल शो’ नामक एक कार्यक्रम बनाया और विदेशों में इस कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। इससे उन्हें काफी आर्थिक लाभ हुआ।

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शम्मी कपूर से दोस्ती
शम्मी कपूर और राजेन्द्र नाथ की दोस्ती उस समय से थी, जब दोनों संघर्ष कर रहे थे। जब शम्मी को सफलता मिली तो उन्होंने निर्माताओं से राजेन्द्र नाथ की सिफारिश की। दोनों ने कई फिल्मों में काम किया और उनकी जोड़ी सफल हुई।

प्रमुख फिल्में
समय ताम्रकर|
दिल देके देखो, फिर वहीं दिल लाया हूँ, जब प्यार किसी से होता है, शरारत, पूरब और पश्चिम, मुझे जीने दो, जानवर, जीवन-मृत्यु, बेखुदी, जमाने को दिखाना है, प्रेम रोग।



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