सिनेमाघर वालों को करारा झटका दिया फिल्म प्रोड्यूसर्स ने

समय ताम्रकर| Last Updated: सोमवार, 29 जून 2020 (18:24 IST)
फिल्म बिज़नेस के तीन मुख्य भाग हैं, फिल्म निर्माता (Producer), फिल्म वितरक (Distributor) और फिल्म प्रदर्शक (Exhibitor)। निर्माता फिल्म बनाता है। वितरक खरीद कर रिलीज करता है। और फिल्म प्रदर्शक यानी सिनेमाघर वाले इसे अपने थिएटर में दिखाते हैं।

कारपोरेट कल्चर आने से कई फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर्स के ऑफिस बंद हो गए। निर्माता से ही बड़े सौदे पूरे भारत में फिल्म रिलीज होने के लिए हो जाते हैं और यही लोग सीधे फिल्म रिलीज कर देते हैं।

मल्टीप्लेक्स चेन आने से कई सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों बंद हो गए या बंद होने की कगार पर पहुंच गए। अब ओटीटी प्लेटफॉर्म के कारण मल्टीप्लेक्स वालों को डर सताने लगा है।

कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण कई बिज़नेस का चेहरा ही बदल गया। उनको करने के तरीके भी बदल गए। सिनेमा देखने के लिए सिनेमाघर जाना जरूरी नहीं था। आप थोड़ा इंतजार कर कर टीवी पर फिल्में देख सकते थे।

लेकिन पहले दिन फिल्म देखने का नशा और स्टारों का क्रेज दर्शकों को सिनेमाघर खींच लाता था। जो लोग इंतजार नहीं कर सकते थे वे फिल्म देखने के लिए टिकट खरीद लेते थे।

लॉकडाउन के कारण सिनेमाघर बंद हुए और ओटीटी प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता ऊंचाइयां छूने लगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई वेबसीरिज हाथों-हाथ ली गई।

लोगों को ओटीटी प्लेटफॉर्म छोड़ना नहीं चाहते और उन्हें आकर्षित करने के लिए जरूरी है कि बड़े सितारों की फिल्में सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाए।

गुलाबो सिताबो से इसकी शुरुआत हो चुकी है। फिर गुंजन सक्सेना दिखाने की घोषणा हुई। ने तो धमाका ही कर डाला।


सीधे 7 फिल्में और वो भी बड़े सितारों की दिखाने की घोषणा कर डाली। अक्षय कुमार, अजय देवगन, संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, आलिया भट्ट की फिल्में घर बैठे दर्शकों को बहुत कम पैसों में देखने को मिलेगी।

जुलाई से अक्टोबर के बीच भुज- द प्राइड ऑफ़ इंडिया, लक्ष्मी बम, द बिग बुल, सड़क 2, दिल बेचारा, लूटकेस और खुदा हाफिज दिखाई जाएंगी।

इस खबर से निश्चित रूप से सिनेमाघर वाले निराश होंगे। करोड़ों रुपये के थिएटर लेकर वे बैठे हैं और दर्शकों को घर बैठे फिल्म देखने को मिल जाएगी।

बड़े मल्टीप्लेक्स का एक टिकट खरीदने में जितना पैसा लगता है उतना मूल्य चुका कर वो ढेरों फिल्में घर बैठे देख सकता है। यह तो पूरी तरह उसके लिए मुनाफे का सौदा साबित हुआ।

फिल्म निर्माता मुकेश भट्ट का कहना है कि हम परिस्थितियां सामान्य होने का कब तक इंतजार करें? सिनेमाघर खुलेंगे तो दर्शक आएंगे या नहीं, यह भी नहीं कहा जा सकता है। इसलिए उन्होंने अपनी फिल्म सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म को दे दी।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म बेचने का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि हिट-फ्लॉप के चक्कर से आप मुक्त हो गए। ओटीटी प्लेटफॉर्म सामान्यत: फिल्म की लागत से 15 प्रतिशत ज्यादा देकर अधिकार ले लेते हैं।

भले ही बहुत ज्यादा पैसा फिल्म निर्माता को नहीं मिलता, लेकिन लाभ जरूर होता है। बड़े सितारों की फिल्म सिनेमाघरों से दो सौ या तीन सौ करोड़ का व्यवसाय कर ज्यादा मुनाफा कमाती है, इसलिए उन्हें ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ज्यादा फायदा नजर न आए, लेकिन आगे चलकर ओटीटी प्लेटफॉर्म बड़े स्टार्स की फिल्म को ज्यादा पैसा भी दे सकती है।

एक बार दर्शकों को घर बैठ कर नई फिल्म देखने की आदत हुई तो उनका सिनेमाघर जाने का मोह भंग हो जाएगा। उसकी यह आदत निश्चित रूप से सिनेमाघर वालों पर भारी पड़ेगी।

सिनेमाघर बने जरूर रहेंगे, लेकिन उनकी संख्या कम हो जाएगी। अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो बड़े परदे पर फिल्म देख चमत्कृत होते हैं, लेकिन उनकी संख्या कम है।

यदि आप साल में 10 फिल्में सिनेमाघर में देखते हैं और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर नई फिल्में आती हैं तो आप सिनेमाघर में साल में 3 बार जाएंगे और निश्चित रूप से सिनेमाघर वालों को नुकसान ही होगा।

पहले से ही सिनेमाघर मुसीबत में हैं। टीवी और पायरेसी का मुकाबला कर के अधमरे हो चुके हैं। ऐसे में ओटीटी प्लेटफॉर्म का बढ़ता प्रभुत्व उनके अस्तित्व पर सवाल पैदा कर रहा है।




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