ramcharitmanas
✕

Year 2026 predictions: रौद्र संवत्सर में होगा महासंग्राम, अपनी अपनी जगह कर लें सुरक्षित

भविष्यवाणी 2026: नए वर्ष में घट सकती हैं देश और दुनिया में ये घटनाएं

Updated: शनिवार, 18 अप्रैल 2026 (18:04 IST)
Year 2026 predictions: कालचक्र का क्रूर चेहरा: रौद्र संवत्सर ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वर्तमान में चल रहा 'सिद्धार्थ संवत्सर' केवल एक बड़ी त्रासदी की भूमिका तैयार कर रहा है। असली चुनौती 19 मार्च 2026 से शुरू होगी, जब 'रौद्र नामक संवत्सर' का उदय होगा। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह समय अपने साथ भीषण विनाश और नरसंहार लेकर आ सकता है। मध्य एशिया में जारी हिंसा की लपटें दक्षिण एशिया तक पहुँचने की आशंका है, जिससे पूरी दुनिया में भय का वातावरण बनेगा।
 
1. ग्रहों की चाल और कूटनीतिक भूचाल: वर्ष 2026 में बृहस्पति (गुरु) का गोचर सबसे अधिक निर्णायक होने वाला है। जून 2026 तक गुरु के मिथुन राशि में रहने से मीडिया जगत में भ्रम और फर्जी खबरों का बोलबाला रहेगा, जिससे देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां बढ़ेंगी। जून के बाद जब गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करेंगे, तो दुनिया में कट्टर राष्ट्रवाद की लहर दौड़ेगी। विशेषकर 2 जून की मध्यरात्रि के ग्रह योग भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को अपने चरम पर ले जा सकते हैं, हालांकि भारत इस परिस्थिति को संभालने में सक्षम रहेगा।
 
2. प्रलयंकारी प्राकृतिक संकेत: जल और अग्नि का तांडव अगला साल प्रकृति के लिहाज से भी काफी संवेदनशील रहने वाला है। बृहस्पति और शनि के प्रभाव से ऋतुचक्र पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगा। जुलाई और अगस्त 2026 के बीच जब सूर्य, चंद्रमा और गुरु एक साथ कर्क राशि में आएंगे, तो 'पुष्य नक्षत्र' के प्रभाव से जल प्रलय और भीषण आगजनी जैसी घटनाएं दुनिया को हिलाकर रख देंगी। बड़े भूकंप और ज्वालामुखी फटने की घटनाएं पृथ्वी के भूगोल को बदलने की चेतावनी दे रही हैं।
 
3. महायुद्ध की आहट और भारत की शक्ति: मंगल का मकर राशि में प्रवेश और शनि की वक्री चाल एक 'महादंगल' की ओर इशारा कर रही है। ज्योतिषियों का अनुमान है कि 2026 में भारत एक बड़े युद्ध का हिस्सा बन सकता है, जो 2027 के अंत तक खिंच सकता है। हालांकि, मंगल के गोचर के कारण भारत की सैन्य शक्ति थल, नभ और जल तीनों मोर्चों पर अजेय रहेगी। शत्रुओं की तमाम साजिशों के बावजूद भारत की वैश्विक शक्ति और प्रतिष्ठा में वृद्धि निश्चित है।
 
4. आर्थिक मंदी और खद्यान: संकट राहु और केतु का राशि परिवर्तन दुनिया भर में स्वास्थ्य संबंधी नई चुनौतियों और महामारियों का भ्रम फैला सकता है। राहु के मकर में जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता आएगी, जिससे महंगाई बेकाबू हो सकती है। कई देशों में अकाल और खाद्यान्न की भारी कमी देखने को मिलेगी, जिससे मानवीय संकट और गहरा सकता है।
 
5. विध्वंस से सृजन की ओर: शनि का न्याय 2020 से शुरू हुआ वैश्विक बदलाव का यह सिलसिला 2026 में अपने सबसे कठिन दौर में पहुँचेगा। शनि का मीन राशि में होना पुराने ढांचों को गिराने का काम करेगा। यह कालखंड विनाशकारी भले ही लगे, लेकिन यह एक नई व्यवस्था के सृजन की नींव भी बनेगा। 2028-29 तक शनि की यह गति दुनिया को एक बिल्कुल नए सांचे में ढाल देगी, जहाँ पुराने गठबंधनों का अंत होगा और नई वैश्विक शक्तियों का उदय होगा।

लेखक के बारे में
वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश, 12 राशियों में किसकी चमकेगी किस्मत और किसे रहना होगा सावधान?

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश, 5 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन; धन-करियर में मिल सकता है बड़ा लाभ

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 30 अगस्‍त 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

सूर्य का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश: 31 अगस्त से 12 राशियों की चमकेगी किस्मत, देखें अपना राशिफल

सूर्य बदल रहे हैं अपना नक्षत्र: 31 अगस्त से इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें क्या है वजह

Weekly Numerology Horoscope: साप्ताहिक अंक भविष्यफल 31 अगस्त से 6 सितंबर 2026: आपके मूलांक का सटीक राशिफल, जानें किसके खुलेंगे तरक्की के द्वार?

बुध का पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में गोचर: अगले कुछ दिन बेहद भारी, इन 3 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें!

अगला लेख