पुतिन के कुछ घंटों का भारत दौरा इतना अहम क्यों है?

BBC Hindi| पुनः संशोधित रविवार, 5 दिसंबर 2021 (11:37 IST)
के राष्ट्रपति का अहम भारत दौरा कल यानी 6 दिसंबर को हो रहा है। यह दौरा कुछ घंटों का ज़रूर है लेकिन इसे बहुत ख़ास माना जा रहा है।
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि भारत और रूस भारत-प्रशांत क्षेत्र और इसके कई आयाम पर अलग-अलग नज़र आते हैं, इस बैठक के दौरान इस मुद्दे पर भी नज़र रहेगी। राष्ट्रपति पुतिन सोमवार की शाम नई दिल्ली पहुंच रहे हैं और वार्षिक सम्मेलन में भाग लेने के बाद वो लौट जाएंगे।

इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में द्विपक्षीय संबंध केंद्र में रहेंगे, जिनमें एस-400 मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम की डिलिवरी और कई रक्षा सौदों पर चर्चा हो सकती है।
'हिन्द-प्रशांत' की रणनीति की रूस करता रहा है आलोचना
रूस भारत के अमेरिका के साथ क़रीबी रिश्तों पर भी नज़रें गड़ाए हुए है। वो भारत, अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और जापान के 'क्वॉड' गठजोड़ की भी आलोचना कर चुका है।

'हिंद-प्रशांत' के इस विचार पर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने 26 नवंबर को रूस-भारत-चीन (RIC) की बैठक में टिप्पणी की थी और इसे असमान साझेदारी कहा था। साथ ही उन्होंने कहा था कि वो 'एशिया-प्रशांत' के पक्ष में हैं।
पुतिन से पहले लावरोफ़ और रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू रविवार को भारत पहुँच रहे हैं और वो अपने समकक्ष एस। जयशंकर और राजनाथ सिंह के साथ '2+2' बैठक में भागीदारी करेंगे।

अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है भारत ऐसा मानता है कि एशिया-प्रशांत और हिंद-प्रशांत ढांचें केवल 'मुद्दे आधारित सहयोग' के लिए हैं।

सूत्रों का कहना है कि मॉस्को भारत के समुद्र चैनल खोलने की 'समावेशी' मांग के पक्ष में है, जिसके ज़रिए चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री कॉरिडोर को लाभ होगा। इसका लक्ष्य भारत को रूस के सुदूर पूर्व इलाक़े से जोड़ना है।
आने वाले महीनों में इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों में साझेदारी में भी बढ़ोतरी मिलने की उम्मीद है क्योंकि जनवरी महीने में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में रूस के 11 गवर्नर भाग लेने आ रहे हैं।

एस-400 मिसाइल सौदे पर रहेगी नज़र
सोमवार के दौरे के दौरान एस-400 मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम की डिलिवरी पर हर किसी की नज़रें रहेंगी, जिसके कारण भारत पर अमेरिका के प्रतिबंधों का ख़तरा मंडरा रहा है।
हालांकि, भारत ने साफ़ कर दिया है कि उसकी रक्षा ख़रीद की नीति 'रणनीतिक स्वायतत्ता' से निर्देशित होती है जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को तरजीह देती है।

दोनों पक्ष सोमवार को कई रक्षा सौदों को अंतिम रूप दे सकते हैं और इसको 'रूस का दिन' बताया जा रहा है। एके-203 असॉल्ट राइफ़लों के बनाने पर सौदा भी इस दिन की चर्चा का मुख्य आकर्षण रहने वाला है।

दोनों पक्ष रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ़ लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट (RELOS) भी कर सकते हैं, रूस ऐसा सातवां देश होगा जिसका भारत के साथ यह सौदा होगा। एक अन्य महत्वपूर्ण समझौता 10 साल के लिए रक्षा सहयोग जारी रखने पर हो सकता है। इसके साथ-साथ इग्ला-एस शॉल्डर फ़ायर्ड मिसाइल पर भी चर्चा हो सकती है।
आतंकवाद पर चर्चा भी महत्वपूर्ण विषय
बैठक के दौरान अफ़ग़ानिस्तान और उन 'हॉटस्पॉट्स' पर भी चर्चा केंद्रित हो सकती है, जहाँ हालात तनावपूर्ण हैं। भारत की चिंता अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से आतंकवाद के प्रसार को लेकर है जो भी चर्चा में रह सकती है। हालांकि यह अभी साफ़ नहीं है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ तनाव भी इस बैठक में चर्चा का बिंदु रहेगा या नहीं।
जून 2020 में गलवान घाटी में झड़प के बाद चीन-भारत तनाव को लेकर रूस ख़ासा चौंकन्ना है और एस-400 सिस्टम की डिलिवरी से यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह क्षेत्र में भारत को रणनीतिक बैलेंस देगा।

राष्ट्रपति पुतिन का दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब रूस में कोविड-19 की स्थिति और ख़राब हो रही है और यूक्रेनी सीमा पर रूसी सेना की तैनाती हो रही है।

जयशंकर ने अबू धाबी में किया चीन का ज़िक्र
अबू धाबी में दो दिवसीय हिंद महासागर कॉन्फ्रेंस 2021 में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन का ज़िक्र किया है।
'दैनिक जागरण' की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री ने चीन की बढ़ती क्षमताओं की चर्चा की और कहा कि इसके गंभीर परिणाम हैं।

उन्होंने कहा, "कोरोना के कारण हम थोड़े अंतराल के बाद मिल रहे हैं। उस समय के दौरान कई ऐसे विकास हुए हैं जिनका हिंद महासागर क्षेत्र पर सीधा और अच्छा प्रभाव पड़ा है।"

"दो वजहों से हाल के दशकों में हिंद महासागर की स्थिति बदली है। पहली वजह क्षेत्र में अमेरिका का रणनीतिक दख़ल बढ़ा है, दूसरी वजह चीन का उत्थान है। 2008 में हम अमेरिका के बढ़ते असर के खतरों के गवाह थे। तब उन ख़तरों को कम करने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि अमेरिका ने अपनी और दुनिया की स्थितियों को समझा और खुद को संतुलित किया।"
"इसी के बाद दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था की शुरुआत हुई। दूसरा बड़ा बदलाव चीन के उभरने से आया। उसने असामान्य ढंग से अपनी ताकत बढ़ानी शुरू की और वैश्विक स्तर पर असर बढ़ाना शुरू किया। सैन्य ताकत के मामले में सोवियत संघ महाशक्ति था लेकिन आर्थिक शक्ति के रूप में वह उस स्थिति में कभी नहीं पहुंचा जहां पर आज चीन है।"

20 सालों में दिल्ली की आबादी बढ़ी 50 फ़ीसदी, नए सरकारी अस्पताल खुले दो
दिल्ली में पिछले 20 साल के दौरान क़रीब 50 फ़ीसदी आबादी बढ़ी है लेकिन इसी दौरान सिर्फ़ दो नए अस्पताल राजधानी को मिले हैं।
'अमर उजाला' अपनी ख़ास रिपोर्ट में लिखता है कि साल 2001 से 2021 के बीच दिल्ली वालों को दो सरकारी अस्पताल मिले हैं जिनमें से एक राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है और दूसरा बुराड़ी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल। वहीं छह से अधिक अस्पताल साल 2010 के बाद से अब तक निर्माणाधीन चल रहे हैं।

वहीं इन सबके बीच पहले से मौजूद अस्पतालों के विस्तार पर काम भी तीन साल पहले से ही शुरू हुआ है।
2001 की जनगणना के मुताबिक, दिल्ली की आबादी 1।38 करोड़ थी। 2011 में यह आंकड़ा 1।67 करोड़ पार कर गया। बीते दस सालों की जनसंख्या वृद्धि के हिसाब से दिल्ली में करीब अभी करीब दो करोड़ लोग रहते हैं। इसका अर्थ है कि बीते बीस सालों में दिल्ली की जनसंख्या में करीब 62 लाख की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

इसी अवधि में अस्पतालों की संख्या भी 34 से बढ़कर 36 तक पहुंची है जबकि बिस्तरों की संख्या 12,000 से बढ़कर 18,000 पहुंच गई है। कोविड के दौर में विकसित किए गए बेड भी इसमें शामिल हैं। दिल्ली में केंद्र और नगर निगम की भूमिका भी अहम है। इनके भी कोई नए अस्पताल शुरू नहीं हुए हैं।
ओमिक्रॉन: पांच राज्यों में विदेश से आए 550 लोगों का कोई अता-पता नहीं
'दैनिक भास्कर' लिखता है कि विदेश से आए पांच राज्यों में 550 से अधिक लोग लापता हैं और इनके कारण ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के तीन मरीज़ अब देश में भी मिल चुके हैं। इसके चलते एक्सपर्ट कह रहे हैं कि इससे देश भर में कोरोना की तीसरी लहर फैल सकती है। इस खतरे को उन लोगों ने और बढ़ा दिया है, जो एट रिस्क कैटेगरी वाले देशों से भारत आए और अब उनका कोई अता-पता नहीं है।
अगर ये लोग ओमिक्रॉन से संक्रमित हुए होंगे तो इस नए वेरिएंट के सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं, क्योंकि न तो इनका कोरोना टेस्ट हुआ है और न ही ये कहीं पर क्वारंटाइन हैं। ऐसे 550 से अधिक लोगों को अलग-अलग शहरों में तलाशा जा रहा है।

भारत में ओमिक्रॉन के दो मरीज़ कर्नाटक के बेंगलुरु में, एक गुजरात के जामनगर में और एक मुंबई में मिल चुका है। कुछ और शहरों में ओमिक्रॉन के संदिग्ध मरीज़ मिले हैं। हालांकि, उनमें इस वेरिएंट की पुष्टि नहीं हुई है।

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