बहुत से जीवों में दो से ज़्यादा लिंग होते हैं
अक्सर हम ये मानते हैं कि तमाम जानवरों में नर या मादा होते हैं। नर एक ख़ास तरह का बर्ताव करते हैं। इसी तरह मादाएं एक ख़ास तरह का व्यवहार करती हैं। मगर, ये बात सच से काफ़ी परे है। जैसे इंसानों में कई लोग समलैंगिक होते हैं। ट्रांसजेंडर होते हैं। इसी तरह जानवरों की कई नस्लों में होता है जहां नर और मादा के सिवा भी अलग लिंग के जानवर पाए जाते हैं।

ब्लूगिल सनफ़िश के बीच तो नर की ही तीन क़िस्में मिलती हैं। जब ये विपरीत लिंगी को लुभाने की कोशिश कर रहे होते हैं, तो उसी वक़्त किसी नर साथी से भी टांका भिड़ाने की जुगत में होते हैं।
He और She के अलावा नया शब्द चाहिए :-
हिंदी में तो किसी को नाम से हटकर पुकारने के लिए एक शब्द है 'वो'। यह शब्द एकवचन में भी इस्तेमाल हो सकता है और बहुवचन में भी। मगर अंग्रेज़ी में ऐसा शब्द नहीं जो किसी के लिंग की तरफ़ इशारा किए बग़ैर उसकी तरफ़ इशारा कर दे।
बरसों से अंग्रेज़ी में ऐसे शब्द की तलाश हो रही है। इस साल अमेरिकन डायलेक्ट सोसाइटी ने इसके लिए 'They' पर मुहर लगाई है। यूं तो They बहुवचन के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है। मगर अब इसे किसी एक इंसान के लिए इस्तेमाल करने पर भी किसी को ऐतराज़ नहीं होना चाहिए। आख़िर यह एक ऐसा शब्द है, जो यह ज़ाहिर नहीं करता है कि 'वो' मर्द है या औरत।
'हमें सेक्स की ज़रूरत महसूस नहीं होती' :-
दुनिया में ऐसे बहुत से लोग सामने आ रहे हैं जो ये कहते हैं कि उन्हें सेक्स की ज़रूरत नहीं महसूस होती। समलैंगिकता को क़ानूनी दर्जा मिलने के बाद ऐसा कहने वालों की तादाद तेज़ी से बढ़ रही है। अमरीका में ऐसे लोगों के संगठन, एसेक्सुअल विज़िबिलिटी ऐंड एजुकेशन नेटवर्क के 2003 में केवल 391 सदस्य थे। आज ये तादाद 80 हज़ार हो चुकी है।
आज के दौर में जहां हर चीज़ सेक्स की चाशनी में लपेटकर परोसी जा रही है। वहां ये वो लोग हैं, जो दुनिया को बताना चाहते हैं कि सुखी, सेहतमंद ज़िंदगी के लिए सेक्स इतना भी ज़रूरी नहीं।
दुनिया 'मोहब्बतों' की दुश्मन है : दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो एक वक़्त में कई लोगों से इश्क़ करते हैं, जिस्मानी ताल्लुक़ात बनाते हैं। ज़्यादातर लोग ऐसा छुपकर करते हैं। मगर कुछ ऐसे भी हैं जो सार्वजनिक तौर पर ऐसा करते हैं। ऐसे लोगों को पॉलीएमॉरस कहा जाता है, जो एक वक़्त में कई मोहब्बतें करते हैं।
चूंकि ये समाज के बंधे-बंधाए उसूलों को चुनौती देते हैं, इसलिए इन्हें गंदी नज़र से देखा जाता है। इसका सबसे बुरा असर ऐसे लोगों के बच्चों पर पड़ता है, जिनके किरदार पर बचपन से ही सवाल उठाए जाने लगते हैं।
हालांकि ऐसे बच्चों की परवरिश ज़्यादा बेहतर ढंग से होती है, जिनके मां-बाप एक साथ कई रिश्ते निभाते हैं। बच्चों को अलग-अलग तरह के लोगों का साथ मिलता है। बचपन से ही उनके अंदर दुनिया के बहुरंगी होने का एहसास होता है और वो ज़्यादा उदार इंसान बनते हैं।
