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पाकिस्तान: बदला लेने के लिए दिया 'रेप का आदेश'

Updated: गुरुवार, 27 जुलाई 2017 (12:29 IST)
पाकिस्तान के मुल्तान में एक लड़की का बलात्कार करने का आदेश देने के आरोप में करीब 20 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। लड़की के भाई पर एक अन्य लड़की का बलात्कार करने का आरोप लगा था, जिसका बदला लेने के लिए ये 'आदेश' दिया गया। पुलिस का कहना है कि पीड़ित लड़कियों के परिवार आपस में रिश्तेदार हैं और दोनों परिवारों के लोगों ने मिलकर ये आदेश दिया। 
 
समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार पुलिस अधिकारी अल्लाह बख़्श ने कहा, "जिरगा (गांव की पंचायत) ने सज़ा के तौर पर 16 साल की लड़की का बलात्कार करने का आदेश दिया क्योंकि लड़की के भाई ने 12 साल की एक दूसरी लड़की का बलात्कार किया था।"
 
अधिकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने इसी महीने ये कहते हुए जिरगा से न्याय की गुहार लगाई थी कि उसकी 12 साल की छोटी बहन का बलात्कार उसके चचेरे भाई ने किया है। इसकी सज़ा के तौर पर जिरगा ने आदेश दिया कि बदले में शिकायतकर्ता अभियुक्त की बहन के साथ बलात्कार करे। पुलिस का कहना है कि इस आदेश पर उसने बलात्कार किया।
 
पाकिस्तान के डॉन अख़बार के अनुसार लड़की को लोगों के सामने पेश होने के लिए कहा गया जिसके बाद उनके माता-पिता और सभी लोगों की मौजूदगी में उसका रेप किया गया। दोनों लड़कियों की माओं ने बाद में इसकी शिकायत पुलिस में की। मेडिकल जांच से दोनों लड़कियों के साथ बलात्कार की पुष्टि हो गई है।
 
एक अन्य अधिकारी अहसान यूनुस ने बीबीसी उर्दू को बताया कि पहली लड़की की उम्र 12 से 14 के बीच है जबकि बदले के लिए जिसका रेप हुआ उसकी उम्र 16-17 के बीच है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 25 लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की है और 12 साल की लड़की के साथ बलात्कार का अभियुक्त फरार है।
जहाँ कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि बलात्कार का आदेश जिरगा ने दिया था, वहीं बीबीसी सूत्रों का कहना है कि इन्हीं दो परिवारों के लोगों के समूह ने ये सज़ा सुनाई थी।
 
पाकिस्तान के ग्रामीण इलाकों में आपसी विवादों का निपटारा करने के लिए गांव के बड़े-बूढ़े पंचायत बनाते हैं। हालांकि ये पंचायतें ग़ैर-क़ानूनी हैं और बीते सालों में ऑनर किलिंग और बदले के लिए बलात्कार की सज़ा सुनाने जैसे फरमानों के लिए इनकी आलोचना भी हुई है।
 
साल 2002 में एक जिरगा ने 28 साल की मुख्तार माई के साथ सामूहिक बलात्कार की सज़ा सुनाई थी। मुख्तार माई के 12 साल के भाई पर अपने से अधिक उम्र की एक महिला के साथ संबंध बनाने का आरोप लगाया गया था। मुख़्तार माई ने बलात्कार करने वालों के ख़िलाफ़ कोर्ट में गुहार लगाई। पाकिस्तान में बलात्कार पीड़िता को भेदभाव की नज़र से देखा जाता है और कारण मुख़्तार माई के इस कदम को साहस का प्रतीक माना गया।
 
पकिस्तान की कोर्ट ने अभियुक्तों को बरी कर दिया। फैसला बलात्कारियों के पक्ष में गया जिसके बाद कई लोगों ने उन्हें देश से बाहर चले जाने की सलाह दी। लेकिन मुख़्तार माई ने अपने गांव में ही रहकर वहां लड़कियों के लिए स्कूल और जहां उनका रेप हुआ था उससे थोड़ी दूरी पर महिलाओं के लिए शरणस्थली बनाने का फ़ैसला किया।
 
मुख़्तार माई अब देश की मुख्य महिला अधिकार कार्यकर्ताओं में से हैं और उनकी कहानी के प्रेरित हो कर 'थंबप्रिंट' नाम से एक नाटक भी लिखा गया। इसे 2014 में न्यूयॉर्क में दिखाया गया था।

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