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ओसामा बिन लादेन को मैंने तीन गोलियां मारीं: रॉबर्ट ओ नील

बुधवार, 19 जुलाई 2017 (10:51 IST)
2 मई 2011 को पाकिस्तान के जलालाबाद के ऐबटाबाद ठिकाने में आतंकी ओसामा बिन लादेन को अमेरिकी नेवी सील कमांडो ने मार दिया था। ओसामा बिन लादेन पर गोलियां किसने चलाई थीं इस पर कोई आधिकारिक बयान तो नहीं है लेकिन एक नेवी सील ऑफिसर रॉबर्ट ओ नील ने एक किताब में ये दावा किया है कि ओसामा बिन लादेन की मौत उनकी चलाई गई तीन गोलियों से हुई।
 
नेवी सील के 400 से अधिक अभियानों में शामिल रहे रॉबर्ट ने अपनी किताब "द ऑपरेटर" में इनमें से महत्वपूर्ण घटनाओं ज़िक्र किया है। रॉबर्ट ओ नील से उस घटना पर बीबीसी के आउटलुक कार्यक्रम में अनु आनंद ने बात की।
 
11 सितंबर 2001 को जब न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ तब आप कहां थे?
11 सितंबर 2001 को जब वर्ल्ड ट्रेड टावर पर हमला किया गया था तब मैं जर्मनी में तैनात एक यूनिट का सदस्य था और जर्मन स्पेशल फोर्स के साथ ट्रेनिंग ले रहा था। जब ये ख़बर आई, तब मैं एक ईमेल टाइप कर रहा था। हवाई हमले को मैंने भी बाकी लोगों की तरह ही टीवी पर देखा था। कुछ देर के बाद ही हमें मालूम पड़ा कि इस हमले के पीछे ओसामा बिन लादेन का हाथ है।
 
मैंने कहा ये अल क़ायदा है और तभी मुझे अंदाज़ा हो गया था कि अब हम एक युद्ध करने जा रहे हैं। लगभग 10 साल के बाद रॉबर्ट दुनिया के उस सबसे बड़े अभियान में शामिल हुए जिसने ओसामा बिन लादेन के आतंक का सफाया किया।
 
मई 2011 के उस अभियान के बार में बताएं?
इस अभियान के लिए देश के अलग अलग हिस्सों से हमारा चयन किया था। हमें ये तो समझ में आ चुका था कि कुछ बहुत बड़ा होने जा रहा है लेकिन करना क्या है ये पता नहीं था। तीन दिन के बाद जाकर हमें पता चला कि हमें किस अभियान पर जाना है। जैसा कि होता है, हमें इस अभियान का ज़िक्र किसी से भी नहीं करना था। अभियान को लेकर हमें विश्वास था कि हम इसे पूरा कर सकेंगे लेकिन साथ ही इस बात की आशंका भी थी कि शायद हम वापस न लौट सकें। हालांकि इसके बावजूद मैंने इस अभियान पर जाने का फ़ैसला किया।
 
वापस नहीं लौट सकेंगे यह सोचने कि वज़ह क्या थी?
इसकी वजह पाकिस्तान था जिसके पास आधुनिक वायु सुरक्षा प्रणाली, अच्छे ऱडार, बेहतरीन सेना मौज़ूद थी और साथ ही वो हमारे हेलिकॉप्टर को उड़ा भी सकते थे। अगर हमारे हेलिकॉप्टर का ईंधन ख़त्म हो गया तो हम पाकिस्तान की धरती पर होते। हमारे नाकाम होने की स्थिति की कई आशंकाएं थीं। इसी वज़ह से हम ये मान कर चल रहे थे कि संभवतः हमारी वापसी न हो। इस सब के बीच हमने वो चुनौती स्वीकार की।
 
अभियान पर जाने से पहले कितनी लंबी ट्रेनिंग चली थी और आप लोगों ने इसे कैसे पूरा किया?
ये काफ़ी विस्तृत थी, लेकिन हमें अपने करियर के दौरान इसकी ही ट्रेनिंग तो मिलती है। हम ये जानते थे कि चाहे ट्रेनिंग कितनी ख़ास क्यों न हो, मौके पर जो होना है वो होगा ही क्योंकि कई बार मौके पर हर चीज़ तयशुदा तरीके से ही हो ये ज़रूरी नहीं है।
जब अभियान ख़त्म हो गया तो आपको घर पहुंच कर कैसा महसूस हुआ क्योंकि आपने इसकी उम्मीद कम ही की थी?
मिशन के दौरान जब मैं या टीम का कोई और सदस्य अपने घर पर बातें करते थे तो हम गुडनाइट नहीं गुडबाय बोला करते थे। हम अपने परिवार तक को इस अभियान के विषय में कुछ नहीं बता सकते थे। मैं जब अपने परिवार के साथ एक रेस्टोरेंट में गया तो अपनी बेटी को खेलते हुए देख कर सोच रहा था कि शायद मैं उसे आख़िरी बार खेलते हुए देख रहा हूं।
 
तो आपकी तीनों बेटी और पत्नी तक को इसकी जानकारी नहीं थी।
हां, किसी को भी नहीं।
 
2 मई 2011 को पाकिस्तान के ऐबटाबाद में क्या हुआ। इस पर बहुत कुछ बताया जा चुका है। कई बार इस पर विवाद भी हुए हैं। इस पर कोई आधिकारिक बयान भी नहीं है। उस अभियान के दौरान क्या हुआ था? आप अफ़ग़ानिस्तान से पहुंचे थे और फ़िर क्या हुआ?
हम अफ़ग़ानिस्तान में थे, हमें फोन के जरिए इसकी सूचना दी गई। उस समय हममें से कुछ ट्रेड मिल पर थे। हमें सूचना दी गई कि कल आपको इस अभियान पर जाना है।
 
एडमिरल से बात हुई। उन्होंने कुछ फ़िल्मों का ज़िक्र किया। हमने अपने अपने परिवार को फ़ोन किया और फिर अभियान पर निकल पड़े। हमें जानकारी दी गई कि हम दो हेलिकॉप्टर में जा रहे हैं। हमारे पीछे दो और हेलिकॉप्टर है और उसके पीछे दो और बैकअप हेलिकॉप्टर। इसके बाद हम एयरबेस से उड़े। बॉर्डर से होते हुए एक नदी के पास से हम बाएं मुड़े, फिर दाहिने और हम पाकिस्तान की सीमा में थे। पायलट ने हमें बताया कि हम पाकिस्तान में हैं। हमें वहां पहुंचने में 90 मिनट लगे।
 
उस अभियान में 23 नेवी सील थे और आप दो हेलिकॉप्टर में गए थे?
हम मुख्य ऑपरेशन में शामिल थे। दूसरा हेलिकॉप्टर हमें आधे रास्ते में ईंधन मुहैया कराने के लिए था। और ऐसा ही हुआ। वो 90 मिनट हम बस एक दूसरे को ताकते रहे। कुछ अपने आईपॉड में लगे थे तो कुछ उंघ रहे थे। 90 मिनट के बाद हम उस मॉर्डन शहर में थे, जहां रिसॉर्ट और गोल्फ कोर्स था। पायलट ने हमें छत पर उतारा।
 
हमने उतरने के साथ ही छत पर मौज़ूद दरवाज़े को बम से उड़ाने की तैयारी करने लगे लेकिन कुछ ही देर में हमें लगा कि वो नकली दरवाज़ा है। फिर हम दूसरे दरवाज़े को उड़ाना चाह रहे थे लेकिन हमें उसे खोलने को कहा गया। हमने उसे खोला और अंदर गए। अब हम ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर थे। मैं हमारी टीम के सदस्यों को रूम में घुसते देख रहा था वो वहां मौज़ूद महिलाओं और बच्चों को अलग एक जगह इकट्ठा कर रहे थे। हम सभी को पता था कि किसी भी समय बम फट सकता है और हम सभी उसमें मारे जा सकते हैं। लेकिन हम तेज़ी के साथ ऑपरेशन में जुटे रहे।
 
फिर क्या हुआ?
हमें किसी महिला ने बताया कि ओसामा दूसरी मंज़िल पर है, लेकिन वहां उसकी सुरक्षा में उसका एक बेटा लगा है। मेरे साथ के कई लोग बाएं और दाएं से रास्ते को साफ़ करते हुए बढ़े। मेरे साथ आगे आगे एक और नेवी सील कमांडो था। मैं उसके पीछे था। उसे सामने कुछ लोग दिख रहे थे। उसने सामने के पर्दे को हटाया। सामने दाहिनी ओर ओसामा बिन लादेन अपने कमर पर हाथ रखे खड़ा था।
हमें पता है कि ये पलक झपकते हो गया होगा आपके कितनी गोलियां चलाईं थीं?
मैंने ओसामा पर तीन गोलियां चलाईं। दो तब जब वो खड़ा था और तीसरा जब वो गिर गया। सामने उसकी पत्नी खड़ी थी। उसका बेटा मेरे बाएं था। मैंने उन दोनों को बिस्तर पर गिरा दिया। तब तक बाकी के मेरे साथी वहां पहुंच गए। मैंने उनसे पूछा कि अब क्या करना है। उसने हंसना शुरू कर दिया।
 
फिर हमने कमरे और आसपास की तलाशी ली और वहां मौजूद हार्ड ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान इक्ट्ठे किए और मेरे साथ तीन और लोग उसे लेकर बाहर पहुंचे। फिर हम ओसामा की बॉडी बाहर लाए। कैप्टन फिलिप वहां मौज़ूद थे। इसके बाद हमने वहां से बाहर जाने के लिए टीम के अन्य सदस्यों को इक्ट्ठा करना शुरू किया। इस ऑपरेशन के दौरान मेरे आगे चलने वाला सैनिक दूसरे ग्रुप से था। उसके साथ ही अन्य सभी सैनिकों ने पूछा कि ओसामा को गोली किसने मारी। तो मैंने कहा, उसे गोली मैंने मारी है। फिर उसने कहा कि मेरे परिवार की तरफ़ से आपका धन्यवाद।
 
आप एबटाबाद में थे, आपका एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। फिर आप बाहर कैसे निकले?
हमारे पास कुछ बड़े हेलिकॉप्टर थे जो हमारे पीछे 45 मिनट बाद वहां पहुंच गए थे। उनमें से एक को हमने हमें ले जाने को बुलाया। जिस ग्रुप का हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया थो वो इसमें सवार हुआ और दूसरा अपने पहले वाले में ही वापस लौटा। वो ओसामा की बॉडी साथ ले गए और हम उसका डीएनए। हम अफ़ग़ानिस्तान की सीमा की ओर चल पड़े।
 
हमें पता था कि अगर हम 90 मिनट तक लगातार उड़ते रहे तो सुरक्षित निकल जाएंगे। हमने अपनी कलाई पर लगी घड़ी में स्टॉपवाच ऑन कर लिया था। सभी चुप थे। कोई कुछ नहीं बोल रहा था। इसके बाद समय बीतता गया और तभी पायलट ने कहा कि अब आप अफ़ग़ानिस्तान की सीमा में पहुंच चुके हैं।
 
अफ़ग़ानिस्तान पहुंचने के बाद क्या हुआ?
वहां पहुंचने के बाद हमें कहा गया कि ओसामा के शव की लंबाई लेनी है। हमें बताया गया कि राष्ट्रपति ओबामा यह चाहते हैं। हमारे पास लंबाई नापने का टेप नहीं था तो ओसामा की बॉडी के पास एक स्नाइपर को लिटा कर उसकी लंबाई का अनुमान लिया गया। उसके बाद उसकी बॉडी को दूसरे बेस पर ले जाया गया।
 
इसके बाद हमें ओसामा के एबटाबाद ठिकाने से जो कुछ भी मिला उसकी पड़ताल में एफ़बीआई टीम जुट गई। उसके बाद ओसामा की बॉडी को एक अमेरिकी नौसेना के जहाज़ में रख कर फारस की ख़ाड़ी ले जाया गया। मेरा फ़ोन बजने लगा। वर्जिनिया, सैंट डियागो और वाशिंगटन से फ़ोन आने लगे। मेरा एक मित्र व्हाइट हाउस में काम करता है। उसे किसी ने कहा कि तुम्हारे दोस्त ने ओसामा को मारा है। बतौर कमांडो हम इन चीज़ों के इतने आदी हो चुके हैं कि यह बिल्कुल आम सा लगा। मेरे परिवार और मेरे दोस्तों को मुझ पर बहुत गर्व हुआ जो स्वाभाविक है।
 
क्या इस अभियान के बाद नहीं लगा कि आप एक हीरो बन गए हैं?
बिल्कुल नहीं। मेरे कुछ परिचित हैं जिनकी परिजनों की जान 9/11 में गई थी और उनका फ़ोन आता रहा कि वो आज भी उनके चेहरे को याद करते हैं।
 
आपने नेवी सील को छोड़ दिया लेकिन आपने ये किताब लिखने का फ़ैसला क्यों लिया? आपके इस फ़ैसले को नेवी सील के साइलेंस कोड को तोड़ने से भी जोड़ कर देखा गया। आपके एक कमांडर ने खुला पत्र लिख कर इसे आर्थिक फायदे के लिए लिखा गया बताया।

ये ओसामा बिन लादेन के अभियान के विषय में नहीं बल्कि उस आदमी की कहानी है जिसे तैरना नहीं आता था और जो संयोग से नेवी सील में पहुंच जाता है और अपनी अथक मेहनत की बदौलत एक बेहद ही महत्वपूर्ण अभियान का हिस्सा बन जाता है। यह साबित करता है कि आप अपनी लगन से कुछ भी कर सकते हैं। जहां तक कोड का सवाल है तो मुझे यह पता है कि इससे पहले भी सिविल वार से संबंधित कई ऐसी पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं।
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