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विकास के मोर्चे पर क्या वाक़ई पिछड़ा है जम्मू-कश्मीर?

शुक्रवार, 9 अगस्त 2019 (09:29 IST)
शादाब नज़मी, बीबीसी संवाददाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार शाम राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर को विकास से वंचित रखा गया है। इससे पहले सोमवार को राज्यसभा में विशेष दर्जा देने वाले प्रावधान को ख़त्म करने की घोषणा करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने भी यही दलील दी थी।
 
उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के सरकार के फ़ैसले से राज्य में विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति बहाल करने में मदद मिलेगी।
 
लेकिन क्या वाक़ई जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य सेवाओं, विकास और शिक्षा के मामले में भारत के दूसरे राज्यों की तुलना में पिछड़ा हुआ है। हमने देश के अन्य राज्यों की तुलना करने के लिए कुछ संकेतकों को खंगाला।
 
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के मुताबिक़, इन सभी संकेतकों में केरल सर्वश्रेष्ठ राज्य है। यहां 6 साल और उससे अधिक उम्र की 95.4 फ़ीसदी महिलाओं ने स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। इसकी तुलना में, बिहार में इस वर्ग में केवल 56 फ़ीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो कभी स्कूल गई हैं।
 
इस मामले में जम्मू-कश्मीर कहां है?
जम्मू-कश्मीर में इस वर्ग की महिलाओं की स्थिति बिहार (56.9%), उत्तर प्रदेश (63%) और आंध्र प्रदेश (62%) के मुक़ाबले कहीं बेहतर है। यहां इस वर्ग की 65.6 फ़ीसदी महिलाओं ने स्कूली शिक्षा ली है।
 
कई मोर्चों पर यूपी-बिहार से आगे
इसी तरह, कई भारतीय राज्यों की तुलना में जम्मू-कश्मीर में लिंगानुपात भी बेहतर है। जम्मू-कश्मीर में प्रति 1,000 पुरुषों पर 972 महिलाएं हैं। जबकि दिल्ली (854), उत्तर प्रदेश (995) और महाराष्ट्र (952) जैसे राज्यों में लिंगानुपात जम्मू-कश्मीर से कहीं कम है।
 
जम्मू-कश्मीर अन्य संकेतकों जैसे घरों में बिजली की उपलब्धता के मामले में बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से भी आगे है। वहीं जम्मू-कश्मीर में बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र की तुलना में कहीं बेहतर सफ़ाई सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
 
जम्मू-कश्मीर उन कुछ राज्यों में से है जहां शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। सर्वे यह भी बताता है कि राज्य में मृत्यु दर बिहार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और गुजरात की तुलना में कम है।
 
बात जब टीकाकरण की आती है तो, यहां 12-23 महीने की आयु वर्ग के 75 फ़ीसदी बच्चों का पूरी तरह टीकाकरण होता है। जबकि गुजरात में यह दर 50 फ़ीसदी है।

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