भारत में मई के दूसरे सप्ताह में प्रतिदिन कोरोना के 8-9 लाख मामले आ सकते हैं-भ्रमर मुखर्जी

Last Updated: गुरुवार, 6 मई 2021 (21:56 IST)

  • -ज़ुबैर अहमद
अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी की महामारी विज्ञानी डॉक्टर भ्रमर मुखर्जी की कोरोना की हालत का गहराई से अध्ययन करती रही हैं। वे दुनिया की जानी-मानी वैज्ञानिक हैं।
उन्हें महामारियों के आंकड़ों के आधार पर गणितीय मॉडल बनाने में महारत हासिल है, इन मॉडलों के ज़रिए महामारी के बारे में काफ़ी हद तक सटीक वैज्ञानिक भविष्यवाणियां की जा सकती हैं। डॉक्टर मुखर्जी का कहना है कि अगर जल्द सही और पर्याप्त क़दम नहीं उठाए गए, तो मई के दूसरे हफ़्ते में भारत में हालात और बिगड़ सकते हैं।

मुखर्जी पिछले साल मार्च से ही भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण का अध्ययन कर रही हैं। इससे पहले भी सरकारी आंकड़ों और मैथेमेटिकल मॉडल की मदद से भ्रमर मुखर्जी ने अनुमान लगाया था कि भारत में दूसरी लहर काफ़ी घातक सिद्ध होगी।
हाल ही में उन्होंने कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर का चरम मई के दूसरे सप्ताह तक देखा जाएगा जब पॉज़िटिव मामले 8 से 9 लाख के बीच होंगे और रोज़ साढ़े चार हज़ार से अधिक मौतें होने की आशंका है।

भारत भविष्य में कोरोना की आने वाली किसी लहर के लिए कितना तैयार है?
एक मॉडलर पूर्वानुमान ये सोच कर लगाता है कि इन अनुमानों को जनता और नीति निर्माता गंभीरता से लेंगे और हम वास्तव में संक्रमण को हराने की कोशिश करें। पूर्वानुमान के बाद रोकथाम के उपाय जैसे चेहरा ढंकना, सामाजिक दूरी बनाए रखना, बड़ी सभा से बचना और संभवतः क्षेत्रीय लॉकडाउन आदि पर ज़ोर दिया जाना चाहिए। मेरी आशा है कि ये सही साबित न हों, वही अच्छा होगा। लेकिन अगर हम ऐसे ही अनदेखी करते रहे तो हर मॉडल, न केवल हमारा मॉडल, यही अनुमान लगा रहा है कि ख़तरा बहुत अधिक है।
अगर आप बड़ी संख्या में फैलते संक्रमण को देखें और इस पर नज़र डालें कितने मामलों की गिनती नहीं हो पा रही है तो यह मानना होगा कि यह बहुत व्यापक रूप से फैल गया है। भारत में वर्तमान में जो लोग बीमार हैं और लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, उनकी संख्या चौंकाने वाली है।

आपकी कार्य प्रणाली पर भी कुछ लोग सवाल उठाते हैं?
मुझे लगता है कि कुछ लोग हमेशा नाख़ुश रहेंगे और सामान्य तौर पर विज्ञान और वैज्ञानिकों के बारे में शिकायत करते रहेंगे।
हम पिछले 380 दिनों से रोज़ इस महामारी पर नज़र रख रहे हैं। हमने कभी हार नहीं मानी, क्योंकि यह हमारी जानकारी में था कि दूसरी या तीसरी लहर आ सकती है। मुझे लगता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा वैज्ञानिक के रूप में हमारा योगदान जानकारी को सुसंगत तरीक़े से साझा करना है।

क्या भारत एक और महामारी से निपटने के लिए तैयार है?
बिल्कुल नहीं, मैंने एक लेख लिखा है कि भारत को अगली लहर के लिए वास्तव में कैसे तैयार होने की आवश्यकता है। यह अंतिम लहर नहीं है। आपको वास्तव में इस महामारी पर नज़र रखने के लिए नियमित रूप से इसे मॉनिटर करना होगा, ताकि हम उभरते हुए ट्रेंड को ट्रैक कर सकें। अक्सर जब तक उनके बारे में पता लगता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
हमें वास्तव में अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर और व्यापक बनाना होगा। डेटा और मॉडलिंग को भी बढ़ाना होगा। ये वास्तविक समय में संक्रमण का पता लगाने में आपकी मदद कर सकते हैं। हमें डेटा साइंस के क्षेत्र में काम करने वालों को तैयार करना होगा और उनकी वैज्ञानिक भविष्यवाणी पर ध्यान देना होगा।
क्या आपको लगता है कि डेटा और मॉडलिंग में भारत पिछड़ा है?
हां, भारत में स्वास्थ्य विज्ञान का बुनियादी ढांचा वास्तव में ख़राब है। डेटा हासिल करना बहुत कठिन है। पहली और दूसरी लहर में कमज़ोर लोगों की उम्र और लिंग के संदर्भ में वर्गीकृत डेटा उपलब्ध नहीं है।
सरकार की ओर से जारी किए गए डेटा को देखते हुए आप अपने डेटा की भविष्यवाणी कैसे करती हैं?
भारत मॉडलिंग परियोजना आपको सिखाती है कि आप सबसे ख़राब डेटा के साथ बेहतर मॉडलिंग कैसे कर सकते हैं। हमने उन संक्रमणों की संख्या पर अनुमान नहीं लगाया जो रिपोर्ट नहीं हुए हैं, वह अज्ञात हिस्सा है और वो काफ़ी बड़ा है। परीक्षण स्तर, रिपोर्ट किए गए केस पैटर्न और मौत के पैटर्न को देखकर हमने सभी भविष्यवाणियां की हैं। हम आपदा का एक छोटा सा हिस्सा देख पा रहे हैं, पूरी आपदा कितनी बड़ी है इसका अनुमान भर लगाया जा सकता है।

और भी पढ़ें :