dharma sangrah

कोविड-19: महामारी की दूसरी लहर अब गांवों में बरपा रही है क़हर

Written By BBC Hindi
Updated: शनिवार, 8 मई 2021 (07:58 IST)
विजदान मोहम्मद कवूसा, बीबीसी मॉनिटरिंग
हाल के दिनों में शहरों में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़े हैं जिसके कारण वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद तनाव से गुज़र रही है। लेकिन अब कोरोना वायरस तेज़ी से गांवों में भी पैर पसार रहा है जहां शहरों की अपेक्षा स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पहले से ही बदहाल है।
 
बीते 14 दिनों से भारत में लगातार रोज़ाना कोरोना संक्रमण के तीन लाख से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। महामारी की दूसरी लहर के शुरू होने से इसी साल फ़रवरी महीने के पहले सप्ताह में देश में रोज़ाना क़रीब दस हज़ार मामले दर्ज किए जा रहे थे।
 
संक्रमण के मामले किस तेज़ी से बढ़ रहे हैं इसे इस बात से समझा जा सकता है कि देश के सबसे बड़े शहरों में शुमार राजधानी नई दिल्ली जैसी जगहों पर अस्तपालों में मरीज़ों की संख्या अचानक बढ़ी है और मेडिकल ऑक्सीजन की कमी और अस्पतालों में बेड की कमी जैसी समस्याएं सामने आई है।
 
ग्रामीण इलाक़ों में दर्ज किए जा रहे संक्रमण के अधिक मामले
सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध डेटा 'हाउ इंडिया लिव्स' के आधार पर 700 ज़िलों में दर्ज किए गए कोरोना संक्रमण के मामलों पर किए बीबीसी मॉनिटरिंग के शोध में पाया गया है कि कोरोना वायरस अब ग्रामीण इलाक़ों में तेज़ी से अपने पैर पसार रहा है।
 
भारत के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक छोटी प्रशासनिक ईकाई 'ज़िला' होती है। जनगणना 2011 के आधार पर ज़िलों में ग्रामीण आबादी के प्रतिशत के हिसाब से बीबीसी मॉनिटरिंग ने अपने शोध में ज़िलों को पाँच हिस्सों यानी ज़िला समूहों में बांटा है।
 
शोध में ये माना गया कि जनगणना में किसी ज़िले में ग्रामीण आबादी का जो प्रतिशत दर्शाया गया था, अभी भी उन ज़िलों में ग्रामीण आबादी का वही माप होगा। शोध में शहरी केंद्रशासित प्रदेश राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को एक ईकाई के रूप में माना गया है।
 
इस साल के नौंवे सप्ताह में जब कोरोना संक्रमण के मामले आना शुरू ही हुए थे, 38 फ़ीसद नए मामले ऐसे ज़िलों में दर्ज किए जा रहे थे जहां 60 फ़ीसद से अधिक आबादी ग्रामीण इलाक़ों में रहती है।
 
29 अप्रैल को ख़त्म होने वाले 17वें सप्ताह तक ये आंकड़ा बढ़ कर 48 फ़ीसद तक हो चुका था। संक्रमण की गति में उन ज़िलों में तेज़ी देखी गई जहां 80 फ़ीसद आबादी ग्रामीण इलाक़ों में है। यहां संक्रमितों का आंकड़ा जहां नौवें सप्ताह में 9.5 फ़ीसद था, वहीं 17वें सप्ताह के ख़त्म होने तक 21 फ़ीसद हो गया था।
 
 
वहीं दूसरी तरफ़ ऐसे ज़िलों में जहां आबादी का 60 फ़ीसद हिस्सा शहरों में रहता है कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट आती गई। जहां साल के 13वें सप्ताह में संक्रमण के मामले 49 फ़ीसद थे, वहीं 17वें सप्ताह तक आते-आते ये आंकड़ा 38 फ़ीसद तक आ गया।
 
जैसे-जैसे ग्रामीण इलाक़ों में संक्रमण बढ़ता गया शहरी इलाक़ों की तुलना में ग्रामीण इलाक़ों में अधिक मामले दर्ज किए जाने लगे।
 
साल के 8वें से लेकर 14वें सप्ताह तक पूरी तरह से ग्रामीण ज़िलों में संक्रमण के काफ़ी कम मामले दर्ज किए गए। लेकिन अब कोरोना संक्रमण की संख्या के मामले में ये ज़िले, उन ग्रामीण ज़िलों के बाद दूसरे स्थान पर हैं जिनमें ग्रामीण आबादी 60 से लेकर 80 फ़ीसद है।
 
ऐसे ज़िले जहां 60 फ़ीसदी से लेकर 80 फ़ीसद आबादी शहरों में रहती है वहां सातवें सप्ताह और 14वें सप्ताह के बीच कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। लेकिन 17वें सप्ताह में ऐसे इलाक़ों में यहां संक्रमण के मामले काफ़ी कम हो गए थे।

कोरोना महामारी की पहली लहर से समानता
कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान पीक आने से पहले ग्रामीण इलाक़ों में संक्रमण के नए मामलों में उछाल आया था। बीते साल पीक आने से एक महीने पहले, अगस्त में कोरोना संक्रमण के कुल नए मामलों में से 55 फ़ीसद ग्रामीण इलाक़ों में दर्ज किए गए। वहीं इसी साल अप्रैल में इन इलाकों में संक्रमण के 45 फ़ीसद मामले दर्ज किए गए। मई के पहले तीन दिनों में ये आंकड़ा बढ़ कर 48 फ़ीसद तक हो गया है।
 
कोरोना की पहली लहर के दौरान कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन लगाया था। लेकिन संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लागू किए दिशानिर्देशों का उल्लंघन तब हुआ जब सैंकड़ों की संख्या में मज़दूरों ने शहरों से अपने गांवों के लिए पलायन करने लगे।
 
लेकिन पिछले साल की तरह इस बार महामारी की पीक की शुरूआत में न तो ने देशव्यापी लॉकडाउन लगाया और न ही राज्यों के भीतर आवाजाही पर कोई पाबंदी लगाई गई।
 
ऐसे में मुंबई और दिल्ली जैसे शहरी इलाक़ों से गांवों फैलने वाली संक्रमण की दूसरी लहर को रोकने के लिए समय रहते ज़रूरी उपाय नहीं किए गए। हालांकि बाद में कुछ राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर लॉकडाउन और कोरोना कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला किया।
 
ग्रामीण इलाक़ों में स्वास्थ्य व्यवस्था
अगर स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो, शहरों की तुलना में ग्रामीण इलाक़ों में स्वास्थ्य व्यवस्था उतनी दुरुस्त नहीं है।
2019 में सरकार द्वारा जारी की गई नेशनल हेल्थ प्रोफ़ाइल रिपोर्ट के अनुसार जहां शहरी इलाक़ों में प्रत्येक दस लाख की आबादी पर सरकारी अस्पताल में 1,190 बेड की सुविधा है, वहीं ग्रामीण इलाक़ों में प्रत्येक दस लाख की आबादी पर सरकारी अस्पताल में 318 बेड की सुविधा है।
 
राजधानी दिल्ली जहां अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीज़ों के लिए बेड की कमी की ख़बरें आई थीं, वहां प्रत्येक दस लाख की आबादी पर सरकारी अस्पताल में 1,452 बेड हैं। ग्रामीण इलाक़ों में स्वास्थ्य सेवा की बदहाल हालत इस बात का संकेत है कि संक्रमितों की संख्या अधिक होने पर यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तनाव भी कहीं अधिक होगा।
 
भारतीय समाचार वेबसाइट स्क्रॉल ने कुछ दिनों पहले देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के कुछ गांवों में ऑक्सीजन की कमी के कारण दम तोड़ते कोरोना मरीज़ों की आपबीती छापी थी।
 
रिपोर्ट के अनुसार, "टेस्टिंग की कमी के बावजूद ऐसा साफ़ दिखता है कि बिहार की सीमा से सटे बलिया के गांवों और क़स्बों में कोविड-19 तेज़ी से फैल रहा है।"
 
इंडिया टुडे में छपी एक ख़बर के अनुसर बड़े राज्यों के गांवों में भी अब कोरोना संक्रमण के मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
 
रिपोर्ट के अनुसार, "जागरूकता की कमी और कोरोना टेस्ट के लिए सामने आने की इच्छा न होने के कारण ग्रामीण आबादी में कोविड-19 के फैलने का ख़तरा अधिक है। इस समस्या को देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति और भी जटिल बना देती है, क्योंकि बड़े अस्पताल केवल शहरों तक ही सीमित है। ऐसे में कोविड-19 संक्रमण से जूझ रहे गंभीर मरीज़ अब इलाज की उम्मीद में शहरों का रुख़ कर रहे हैं।"
 
इंडिया टुडे ने गुजरात के गांवों में कोरोना के तेज़ी से फैलने के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट के अनुसार "इन इलाक़ों में न केवल अस्पतालों में इंटेंसिव केयर यूनिट, ऑक्सीजन, बेड और ज़रूरी उपकरणों की भारी कमी है बल्कि डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की भी भारी कमी है।"

Show comments

Ather का सबसे सस्ता Electric Scooter, कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान, 120Km Range के साथ आएगा Konarc

Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

E20 Petrol : क्या सरकार ला रही है Flex-Fuel वाहनों के लिए नई पॉलिसी? सरकार ने दिया बड़ा अपडेट

CJP प्रोस्टेट पर बोले CJI- युवाओं की बात सुननी चाहिए, हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता

No Insurance, No Fuel प्रोजेक्ट क्या है, सुप्रीम कोर्ट क्यों करना चाहता है लागू और आप पर कैसे पड़ेगा असर

सभी देखें

क्या सच में 'अलविदा' कह रहा है OnePlus? आपके फोन के अपडेट्स और वारंटी पर आया बड़ा अपडेट

iPhone 16 पर बड़ी डील, 67,900 रुपए वाला फोन 40,612 रुपए में खरीदने का मौका, ऐसे मिलेगा डिस्काउंट

iPhone 18 Pro Max vs Pixel 11 Pro XL: अगस्त में Google और सितंबर में Apple की टक्कर, जानें कौन होगा सबसे दमदार?

iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max सितंबर में हो सकते हैं लॉन्च, बड़ी बैटरी, 2nm चिप और DSLR जैसे कैमरे की चर्चा

Samsung Galaxy Z Fold8, Fold8 Ultra और Flip8 लॉन्च: दमदार AI फीचर्स, नया डिजाइन और शानदार कैमरा के साथ आए नए फोल्डेबल स्मार्टफोन

अगला लेख