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चीन यूक्रेन संकट में रूस के साथ क्यों खड़ा है? जानिए चीन की रणनीति

Written By BBC Hindi
Updated: शनिवार, 5 फ़रवरी 2022 (07:41 IST)
टेसा वॉन्ग, बीबीसी न्यूज़
यूक्रेन को लेकर अमेरिका और रूस के बीच जैसे-जैसे जुबानी हमले तेज़ हो रहे हैं, अंतराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ा देश अपनी बात मज़बूती से रख रहा है, वो है चीन।
 
चीन ने हाल ही में दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने और शीत युद्ध वाली मानसिकता को ख़त्म करने की बात कही है। लेकिन ये भी साफ़ दिख रहा है कि वो रूस की चिंताओं के समर्थन में है।
 
ज़ाहिर है कि चीन अपने पुराने सहयोगी रूस का साथ देगा। लेकिन वो ऐसा क्यों और कैसे कर रहा है, इसके पीछे एक लंबी कहानी है।
 
'दुनिया की रक्षा करते हैं चीन और रूस'
पिछले हफ़्ते ही चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रूस की चिंताओं को ''जायज़'' बताया था। साथ ही ये भी कहा था कि इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसका समाधान होना चाहिए।
 
वहीं सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ने उस दावे को ख़ारिज़ कर दिया, जिसमें अमेरिका की तरफ़ से कहा जा रहा था कि रूस अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए ख़तरा पैदा कर रहा है।
 
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने के लिए भी चीनी राजदूत ने अमेरिका की आलोचना की और इसे ''मेगाफ़ोन डिप्लोमेसी'' तक बता दिया।
 
कूटनीतिक बोलचाल में कहें तो यूक्रेन संकट पर चीन सतर्कता से अपना आधिकारिक स्टैंड ले रहा है। लेकिन यूक्रेन संकट को कवर कर रहे चीन के कुछ सरकारी मीडिया आउटलेट इसे अलग तरह से पेश कर रहे हैं।
 
ऐसे समय में जब चीन में पश्चिम विरोधी भावना बढ़ रही है, कुछ मीडिया आउटलेट यूक्रेन संकट को पश्चिम की एक और नाकामी के तौर पर पेश कर रहे हैं।
 
उनके हिसाब से अमेरिका के नेतृत्व वाला नेटो, रूस और चीन जैसे देशों की संप्रभुता के ख़िलाफ़ काम कर रहा है। वो इन देशों की संप्रुभता की रक्षा के अधिकार का सम्मान नहीं कर रहा है।
 
चीन के ग्लोबल टाइम्स अख़बार का दावा है कि रूस और चीन के बीच रिश्ते सबसे क़रीबी दौर में हैं और ये दोनों ऐसे डिफेंस पावर हैं जो ''वर्ल्ड ऑर्डर'' की रक्षा करते हैं।
 
वहीं चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका अपने घरेलू मुद्दों को भटकाने के लिए और यूरोप पर अपने दबदबे को फिर से बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
 
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की पॉलिसी डायरेक्टर जेसिका ब्रांट का कहना है कि इसी तरह की बयानबाज़ी को ट्विटर पर कई भाषाओं में शेयर किया गया है।
 
वो ट्विटर जो चीन में बैन है। ये नज़रिया बनाने की कोशिश है कि अमेरिका और नेटो को दुनियाभर में किस तरीक़े से देखा जाए।
 
ब्रांट बीबीसी से कहती हैं, ''मुझे लगता है कि इसका मक़सद अमेरिका की सॉफ्ट पावर को कमज़ोर करना, लिबरल इंस्टीट्यूशंस की विश्वसनीयता को धूमिल करना और स्वतंत्र मीडिया को बदनाम करना है।'' वो कहती हैं कि ये एक उदाहरण कि जब बात चीन के हित में हो तो बीजिंग कैसे यूक्रेन पर रूस की बात को और मज़बूत करता है।
 
साझा लक्ष्य, साझा दुश्मन
कुछ विशेषज्ञों का माना है कि शायद स्टालिन और माओ के दिनों से भी ज़्यादा क़रीबी इस वक़्त रूस और चीन के बीच है।
 
2014 का क्राइमिया संकट वो मौक़ा था जब रूस, चीन के और क़रीब होता चला गया। रूस उस वक़्त पूरी दुनिया से प्रतिबंधों की मार झेल रहा था, ऐसे वक़्त में चीन ने उसे आर्थिक और कूटनीतिक मदद दी थी।
 
शुक्रवार से चीन में शीतकालीन ओलंपिक शुरू हुए हैं। इस मौके पर शी जिनपिंग के निमंत्रण पर व्लादीमिर पुतिन भी बीजिंग पहुँचे हैं।
 
दोनों के बीच एक बैठक भी रखी गई है, इसी के साथ पिछले दो साल में शी जिनपिंग से व्यक्तिगत तौर पर मिलने वाले पहले बड़े विदेशी नेता पुतिन होंगे। चीन के राष्ट्रपति विदेश दौरा नहीं कर रहे हैं, महामारी शुरू होने के बाद से अब तक उन्होंने कुछ ही विदेशी नेताओं से मुलाक़ात की है।
 
रूस और चीन दोनों ही देशों के पश्चिम के साथ तनावपूर्ण संबंध हैं। टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय इतिहास के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर क्रिस मिलर कहते हैं, ''अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका और यूरोप को पीछे धकेलने और ख़ुद के लिए बड़ी भूमिका तैयार करने में रूस और चीन दोनों का साझा हित है।''
 
संघर्ष बढ़ता है तो पश्चिम के देश रूस पर प्रतिबंध लगा सकते हैं, ऐसे में कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन, रूस को आर्थिक मदद देगा। इस मदद में वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था तैयार करना, रूस के बैंकों और फ़र्म को लोन देना और रूस से तेल की ख़रीद जैसी चीज़ें चीन कर सकता है।
 
क्रिस मिलर कहते हैं कि इस तरह की सहायता में चीन को भी काफ़ी ख़र्च उठाना होगा। ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ये एक वजह है कि फ़िलहाल के लिए चीन, रूस के बयानों का ही समर्थन करता दिख सकता है। मिलर कहते हैं,''चीन के लिए रूस की बयानबाज़ी का समर्थन कम लागत वाला क़दम है।''
 
यूक्रेन में अगर सैन्य संघर्ष होता है तो अमेरिका का ध्यान बँटेगा, इस लिहाज़ से ये चीन के लिए फ़ायदा ही है। लेकिन कुछ पर्यवेक्षक मानते हैं कि चीन युद्ध नहीं चाहता है।
 
जर्मन मार्शल फंड में एशिया प्रोग्राम की डायरेक्टर बोनी ग्लेसर का कहना है कि चीन इस वक़्त अमेरिका से अपने रिश्ते स्थिर करने की कोशिश में है। ऐसे वक़्त में अगर चीन ने रूस का अधिक समर्थन किया तो अमेरिका के साथ उसके रिश्ते और तनावपूर्ण हो जाएंगे।
 
पॉलिटिकल साइंटिस्ट मिनक्सिन पेई हाल ही में कहा है कि चीन अगर रूस का पुरज़ोर समर्थन करता है तो यूरोपियन यूनियन इसका विरोध कर सकता है। यूरोपियन यूनियन, चीन का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।
 
प्रोफ़ेसर पेई का कहना है संभवत: इस वजह से ताइवान का समर्थन बढ़ सकता है।
 
'ताइवान, यूक्रेन नहीं है'
अमेरिका और साथ ही साथ दुनियाभर के चीनी समुदाय की नज़र यूक्रेन संकट पर है। ये लोग देखना चाह रहे हैं कि अमेरिका अपने सहयोगियों के लिए कितना वफ़ादार है।
 
कई लोग ये पूछ रहे हैं कि रूस अगर यूक्रेन पर हमला करता है तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप करेगा, ऐसे में अगर चीन ताइवान पर अपने दावे के लिए ऐसा ही करता है तो अमेरिका का कदम क्या होगा?
 
ताइवान ख़ुद को स्वतंत्र राष्ट्र बताता है और अमेरिका को अपना सबसे बड़ा सहयोगी देश मानता है। वहीं चीन मानता है कि ताइवान उसका एक प्रांत है, जो फिर से चीन का हिस्सा बन जाएगा। एशिया में इस बात पर सवाल पर चिंता है कि क्या ताइवान के लिए अमेरिका, चीन के साथ युद्ध करेगा।
 
अमेरिका जानबूझकर ये साफ नहीं करता आया है कि हमले की स्थिति में वो असल में क्या करेगा। अमेरिका में एक क़ानून है, जिसके तहत उसे ताइवान की सुरक्षा में मदद करनी होगा लेकिन इसी के साथ अमेरिका चीन की वन चाइना पॉलिसी को भी मानता है।
 
वन चाइना पॉलिसी का मतलब उस नीति से है, जिसके मुताबिक़ 'चीन' नाम का एक ही राष्ट्र है और ताइवान अलग देश नहीं, बल्कि उसका प्रांत है।
 
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यूक्रेन और ताइवान दोनों की स्थिति और चिंताएं अलग-अलग है। वो कहते हैं कि अमेरिका का ताइवान के साथ कहीं गहरा और ऐतिहासिक संबंध है। अमेरिका ताइवान को एशिया के लिए वैचारिक, कूटनीतिक और सैन्य रणनीति की धुरी के तौर पर देखता है।
 
ग्लेसर कहती हैं, "चीन रूस नहीं है, और ताइवान यूक्रेन नहीं है। यूक्रेन की तुलना में ताइवान पर अमेरिका का बहुत कुछ दांव पर लगा है।"
 

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