वर्ल्ड कप 2019: एबी डिविलियर्स खेलना चाहते थे, लेकिन सेलेक्टरों ने नहीं चुना

पुनः संशोधित शुक्रवार, 7 जून 2019 (12:16 IST)
- प्रदीप कुमार

इंग्लैंड में चल रहे वर्ल्ड कप 2019 में अपने पहले तीनों मुक़ाबले हार चुकी है। टूर्नामेंट में बने रहने के लिए उसे अब अपने सभी छह मैच जीतने होंगे। ऐसे मुश्किल वक़्त में क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफो पर ऐसी ख़बर सामने आई, जिसने क्रिकेट प्रेमियों को सकते में डाल दिया है।
दुनिया के सबसे विस्फोटक बल्लेबाज़ों में शुमार इस वर्ल्ड कप में खेलना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने टीम के मौजूदा कप्तान फ़ैफ़ डू प्लेसि, मुख्य कोच ओटिस गिब्सन और चयन समिति के संयोजक लिंडा ज़ोंडी से संपर्क भी किया था, लेकिन टीम प्रबंधन ने उन्हें मौका नहीं दिया।
टीम प्रबंधन ने इस ख़बर के सामने आने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ऐसा करना संभव नहीं था और उसकी वजहें भी गिनाई हैं।

क्या है पूरी कहानी
पहले तो आप एबी डिविलियर्स के बारे में थोड़ा बहुत जान लीजिए। 35 साल के एबी डिविलियर्स का निक नेम मिस्टर 360 और 'सुपरमैन' रहा है। उनकी पहचान ऐसे बल्लेबाज़ की थी जो किसी भी गेंद को मैदान के किसी भी कोने से बाउंड्री के पार भेज सकता है, चाहे गेंदबाज़ कोई भी हो।
वनडे क्रिकेट में सबसे तेज़, महज 31 गेंदों में शतक ठोकने का कारनामा भी एबी डिविलियर्स के नाम दर्ज है। वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ इस मैच में डिविलियर्स ने 44 गेंदों पर 150 रन ठोक दिए थे। वनडे और टेस्ट क्रिकेट, दोनों में 50 से ज़्यादा की औसत से डिविलियर्स रन बटोरते रहे। 228 वनडे मैचों में 25 शतक और 9577 रन बनाने के बाद भी उनकी स्ट्राइक रेट 101 से ज़्यादा की रही है।

लेकिन ये आंकड़े डिविलियर्स की बैटिंग की पूरी कहानी नहीं बताते। दरअसल डिविलियर्स वैसे बल्लेबाज़ रहें, जिन्हें बल्लेबाज़ी करते देखना, आनंद के आरोह-अवरोह में उतरने के समान होता था, जहां रोमांच अपने चरम पर होता था कि पता नहीं डिविलियर्स किस अंदाज़ में कौन सा शाट लगा बैठेंगे।
सुपर एथलीट क्षमता वाले एबी डिविलियर्स टीम के उम्दा विकेटकीपर और कैप्टन कूल भी रह चुके थे। लेकिन ये सब बातें मई, 2018 तक की हैं, यानी वर्ल्ड कप 2019 से एक साल पहले की। 23 मई, 2018 को क्रिकेट की दुनिया को चौंकाते हुए एबी डिविलियर्स ने क्रिकेट के सभी फॉरमेट से सन्यास ले लिया था। हालांकि उस वक्त में इंटरनेशनल क्रिकेट में पूरे दमखम से खेल रहे थे।

बहरहाल, वर्ल्ड कप 2019 में खेलने को लेकर उन्होंने अप्रैल, 2019 में टीम प्रबंधन से संपर्क साधा। वो भी तब जब चयन समिति कुछ ही घंटों में 15 सदस्यीय फ़ाइनल टीम की घोषणा करने वाली थी।
चयनकर्ताओं का क्या कहना है?
इस ख़बर के सामने आने के बाद दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट चयन समिति के संयोजक लिंडा ज़ोंडी ने बयान जारी किया है।

अपने बयान में उन्होंने कहा, ''एबी डिविलियर्स को उन्होंने संन्यास लेने से मना किया था लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया था। ऐसे में 18 अप्रैल को जब वर्ल्ड कप खेलने की उनकी इच्छा सामने आई तो हम लोगों को झटका लगा था। क्योंकि एबी के संन्यास लेने के बाद टीम में बहुत बड़ी जगह खाली हो गई थी। हमें उनकी जगह लेने वाले खिलाड़ी की तलाश में एक साल का वक़्त लग गया था और उन खिलाड़ियों ने भी काफ़ी मेहनत की थी।''
ऐसे में हमने सिद्धांत के तौर पर फैसला लिया- हम अपनी टीम और खिलाड़ियों के साथ निष्पक्ष रहना चाहते थे।

लिंडा ने अपने बयान में कहा है, ''जिस साल एबी डिविलियर्स ने संन्यास लिया, उसके बाद उन्होंने खुद को चयन के लिए कभी उपलब्ध नहीं बताया। जिस दिन टीम की घोषणा करनी थी उस दिन जानकारी मिलने पर हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि हमारी टीम तय हो चुकी थी। इस बात में कोई शक नहीं है कि एबी डिविलियर्स दुनिया के सबसे बेहतरीन क्रिकेटर हैं लेकिन इन सबसे बड़ी बात यह है कि हमें अपनी नैतिकता और सिद्धांतों को देखना था। अपने फ़ैसले पर हमें कोई पछतावा नहीं है।''
डिविलियर्स ने दी कोई प्रतिक्रिया?
इस ख़बर पर अब तक एबी डिविलियर्स ने भी कुछ नहीं बोला है, हालांकि उन्होंने एक ट्वीट ज़रूर किया है जिसमें दक्षिण अफ्रीकी टीम के समर्थन की बात कही है। डिविलियर्स ने ट्वीट किया है, ''सबसे महत्वपूर्ण है टीम का साथ देना। अभी काफी रास्ता तय करना है और मुझे भरोसा है कि टीम रास्ता पूरा करेगी।''

दक्षिण अफ्रीका जिस तरह से अपने पहले तीनों मैच हार चुकी है, उसे देखते हुए एबी डिविलियर्स की टीम में वापसी की चाह रखने वाले क्रिकेट फैंस भी ढेरों होंगे। लेकिन दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट चयन समिति ने अपने देश के सबसे बड़े सुपरस्टार के सामने भी सिस्टम को ताक पर नहीं रखा।
हो सकता है कि एबी डिविलियर्स मौजूदा टीम में होते तो अपनी टीम को वर्ल्ड कप भी जिता देते, लेकिन इससे दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट के उस सिस्टम पर दाग़ ज़रूर लग जाता, जिसकी पहचान डिविलियर्स जैसे खिलाड़ी पैदा करने की बन चुकी है।

दक्षिण अफ़्रीकी टीम में चुने जाने की पहली शर्त
दक्षिण अफ्रीकी टीम में चुने जाने की पहली शर्त ही यही है कि आप बीते एक साल में क्रिकेट के मैदान में सक्रिय रहे हों। मौजूदा मामले में एबी डिविलियर्स इस पहली शर्त को ही पूरा नहीं कर रहे थे। दक्षिण अफ्रीकी टीम अगर वर्ल्ड कप से बाहर हुई तो टीम प्रबंधन के इस फैसले पर सवाल भी उठेंगे। लोग इमरान ख़ान का उदाहरण भी याद करेंगे कि किस तरह से उन्होंने संन्यास से लौटकर अपनी टीम को 1992 में वर्ल्ड कप जिताने का करिश्मा दिखाया था।
एबी डिविलियर्स में यह इतिहास बनाने का माद्दा भी है और कम से कम दक्षिण अफ्रीकी टीम के मौजूदा बल्लेबाज़ी स्तर को वे अपने दम पर कई गुना बढ़ा ही सकते थे। चाहे धमाकेदार शुरुआत की बात हो या फिर किसी बड़े लक्ष्य का पीछा करना, डिविलियर्स के होते, दक्षिण अफ्रीकी टीम को कम चिंता करनी होती लेकिन ये भी देखने की बात है कि डिविलियर्स की टीम में मौजूदगी तो 2007, 2011 और 2015 के वर्ल्ड कप में भी थी लेकिन वे अपनी टीम को वर्ल्ड कप नहीं जिता पाए थे।
और दूसरी अहम बात यह है कि उनकी जगह जिन युवा खिलाड़ियों ने भरोसा जगाया था उनकी स्प्रिट को कायम रखना भी टीम प्रबंधन की ज़िम्मेदारी थी। टीम प्रबंधन ने भविष्य का रास्ता देखा है जिससे युवा खिलाड़ियों का मनोबल निश्चित तौर पर बढ़ा ज़रूर होगा।

दक्षिण अफ्रीकी कप्तान फ़ैफ़ डू प्लेसि, मुख्य कोच ओटिस गिब्सन और चयन समिति के संयोजक लिंडा ज़ोंडी ने मिलकर जो फ़ैसला लिया है उसने उस भरोसे को कायम रखा है कि कोई क्रिकेटर सुपरस्टार तो हो सकता है लेकिन वह गेम से बड़ा नहीं हो जाता।

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