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स्वतंत्रता संग्राम में कवियों, शायरों और लेखकों का योगदान
स्वतंत्रता आंदोलन भारतीय इतिहास का वह युग है, जो पीड़ा, कड़वाहट, दंभ, आत्मसम्मान, गर्व, गौरव तथा सबसे अधिक शहीदों के ... -
प्रेम गीत : चोरी-छिपे मोहब्बत निभाता रहा
वो गया दफ़अतन कई बार मुझे छोड़के, पर लौटकर फिर मुझ में ही आता रहा। कुछ तो मजबूरियां थीं उसकी अपनी भी, पर चोरी-छिपे ही ... -
रोमांस कविता : ये गुफ़्तगू क्या है...
है नहीं यकीन तुमको है, नहीं यकीन मुझको, फिर ये खत-दर-खत गुफ़्तगू क्या है।।1।। -
प्रेम कविता : मैंने इश्क़ किया
मैंने इश्क़ किया और बस आग से खेलता रहा' एक घड़ी जलता रहा, एक घड़ी बुझता रहा ।।1।। -
हिन्दी कविता : गुनाहगार कौन है
इस चाराग़री में सब होशियार हैं, वर्ना खुद से ही कौन गुनाहगार है ।।1।। कमी है कुछ झुके हुए मस्तकों की वर्ना तलवारें तो सब ... -
कविता : महफिलें सजाई थीं...
कभी मिलना उन गलियों में जहां छुप्पन-छुपाई में हमने रात जगाई थी। जहां गुड्डे-गुड़ियों की शादी में दोस्तों की बारात बुलाई ... -
कविता : तुम्हारी एक छुअन...
क्या था तुम्हारी उस एक छुअन में, कि वो शाम याद आती है, तो जाती नहीं।अजब-सा खुमार था तुम्हारे सुरूर का, -
तमाशाई भी हम ही हैं...
तमाशा भी हम हैं और तमाशाई भी हम ही हैं, शराफत की बोटियां काटते कसाई भी हम ही हैं। ज़ख्म भी हम हैं और ज़ख्मी भी हम ही हैं, -
शब्द पर कविता
शब्द... अगर इतने ही, समझदार होते, तो खुद ही, गीत, कविता, कहानी, नज्म, संस्मरण या यात्रा-वृत्तांत, बन जाते। -
कविता : रेत के पैरों पे ये निशान किसके हैं?
उन औरतों के लगते हैं, जो परतंत्रता से हांफ के भाग रही होंगी, बाल उसके हब्बा ने भींच रखे होंगे, उसके वक्षों को शैतान ने ... -
कविता: मैं ठोकरें बहुत खाता हूं...
मैं ठोकरें बहुत खाता हूं, तुम साथ चल सको तो चलो। मैं झूठ कम बोलता हूं, -
कविता : अभी तलक बाकी है...
तुम समझ चुके हो या समझना अभी बाकी है, तुम्हारा मेरे अंदर मरना, अभी तलक बाकी है। -
कविता : डिबरी का सूरमा
मेरी दादी,की आंखों में,डिबरी का सूरमा था,जो डिबिया की लौ...
