चंद्र को अपने लिए अनुकूल बनाना है तो 2 चंद्र मंत्र और 5 उपाय आपके ही लिए हैं


देव सौम्य और शीतल देवता हैं
लेकिन कुंडली में अशुभ हो तो कई परे‍शानियां देते हैं आइए जानते हैं उन्हें शुभ कैसे बनाया जाए...

एकाक्षरी बीज मंत्र- 'ॐ सों सोमाय नम:।'
तांत्रिक मंत्र- 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नम:।'
जप संख्या- 11,000 (11 हजार)।

(कलियुग में 4 गुना जाप एवं दशांश हवन का विधान है।)

दान सामग्री- श्वेत वस्त्र, चावल, सफेद पुष्प, शकर, कर्पूर, मोती, चांदी, शंख, घृतपूर्ण, कुंभ, मिश्री, दूध-दही, स्फटिक आदि।
(उक्त सामग्री को श्वेत वस्त्र में बांधकर उसकी पोटली बनाएं तत्पश्चात उसे मंदिर में अर्पण करें अथवा बहते जल में प्रवाहित करें।)

दान का समय- संध्या।
हवन हेतु समिधा- पलाश।
औषधि स्नान- पंचगव्य, खिरनी की जड़, श्वेत चंदन, श्वेत पुष्प मिश्रित जल से।

अशुभ प्रभाव कम करने हेतु अन्य उपयोगी उपाय।

* रविवार को कच्चा दूध अपने सिरहाने रखकर सोएं एवं सोमवार को प्रात: उसे बबूल के वृक्ष पर चढ़ा दें।
* चावल दान करें।
* सफेद गाय दान करें।
* श्वेत वस्त्रों का प्रयोग न करें।
* चंद्र यंत्र को चांदी पर उत्कीर्ण करवाकर नित्य पूजा करें।
-ज्योतिर्विद् पं हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: [email protected]

नोट : इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। इसमें शामिल तथ्य तथा विचार/विश्लेषण वेबदुनिया के नहीं हैं और वेबदुनिया इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।

साभार : ज्योतिष : एक रहस्य

 

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