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एकादशेश मंगल

सप्तम हो तो जीवनसाथी से लाभ

Updated: गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014 (00:09 IST)
Devendra SharmaND
आयेश मंगल जब मेष राशि का होकर पंचम विद्या, बुद्धि, संतान, मनोरंजन, प्रेम भाव में हो तो थोड़ी इन बातों में कमी के बाद परिश्रम द्वारा सफलता मिलती है। आय भाव का स्वामी यहाँ से आय को देखने से आय में कमी नहीं लाता है।

मंगल के साथ सूर्य हो तो संतान कष्ट होता है या गर्भपात की नौबत आती है। विद्या में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। चंद्र साथ हो तो मिले-जुले परिणाम मिलते हैं। बुध साथ हो तो प्रयत्नपूर्वक सफलता मिलती है। गुरु साथ होने पर गुरु का फल नगण्य सा हो जाता है। शुक्र साथ होने पर विद्या में उत्तम सफलता मिलती है। ऐसा जातक प्रेमी होता है। मिली-जुली संतान होती है।

शनि साथ हो तो भाग्येश उच्च का होगा लेकिन मंगल के साथ होने से नुकसानप्रद भी बनता है। संतान आदि में बाधा रह सकती है। आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव रहता है। ऐसी स्थिति में मुहूर्त में बनाई गई तीन धातुएँ सोना, चाँदी, ताँबा की अँगुठी मुहूर्त में धारण करने से लाभ होता है। राहु साथ होने पर संतान को कष्ट या संतान होने में देरी होती है।
  आयेश मंगल जब मेष राशि का होकर पंचम विद्या, बुद्धि, संतान, मनोरंजन, प्रेम भाव में हो तो थोड़ी इन बातों में कमी के बाद परिश्रम द्वारा सफलता मिलती है। आय भाव का स्वामी यहाँ से आय को देखने से आय में कमी नहीं लाता है।      


केतु साथ हो तो गर्भपात होता है व ऑपरेशन द्वारा संतान के योग बनते हैं। मंगल षष्ठ शत्रु, रोग, कर्ज नाना- भाव में हो तो एकादशेश स्वराशि का होने से शत्रु परास्त होते हैं। कर्ज हो तो दूर होता है व नाना-मामा से लाभ रहता है। विशेष मंगल की महादशा में लाभ होता है। मंगल के साथ सूर्य हो तो प्रबल रूप से शत्रु हंता होता है। मित्रों, साझेदारों से कम ही बनती है।

चंद्र साथ होने पर धन की बचत कम होती है। बुध साथ हो तो बाहर से लाभ मिलता है। गुरु साथ होने पर नौकरी, व्यापार आदि में स्वप्रयत्नों से लाभ रहता है। पिता से भी लाभ मिलता है। शुक्र साथ होने पर विदेश से या जन्मस्थान से दूर रहकर सफलता पाता है।

शनि साथ हो तो प्रबल रूप से शत्रु नाश हो लेकिन नाना-मामा का घर ठीक न हो। नाना-मामा के लिए ऐसे जातक नुकसानप्रद रहते हैं। राहु साथ होने पर गुप्त शत्रुओं से परेशान रहता है व कर्ज भी हो सकता है। बवासीर के रोग संभव है। केतु साथ हो तो पशु से चोट लगती है। एकादशेश मंगल सप्तम भाव में हो तो ऐसा जातक मांगलिक होगा लेकिन उसे मंगल दोष नहीं लगता।

ऐसे जातक का जीवन हिम्मतवान, महत्वाकांक्षी व जीवनसाथी से लाभ पाने वाला होता है। सूर्य साथ हो तो तेजस्वी स्वभाव का होता है। जीवनसाथी से वाक् युद्ध होता रहता है। लेकिन प्रेम भी बना रहता है।

चंद्र साथ हो तो पत्नी या पति से धन अच्छा मिलता है। साहसी, हिम्मतवान होता है। बुध साथ हो तो ऐसा जातक लेखक, प्रकाशक होता है। साथ ही उसकी वाक् शक्ति अच्छी होती है। पति-पत्नी में तालमेल अच्छा रहता है। गुरु साथ हो तो ऐसे जातक उत्तम विचारों से युक्त सद्‍गुणी, व्यवहारकुशल, सच्चे मित्र होते हैं। शुक्र साथ हो तो प्रेम विवाह संभव है। पति या पत्नी सुंदर हो। शनि साथ हो तो दाम्पत्य जीवन नष्ट हो सकता है या अलग-अलग रहने की नौबत आती है। राहु साथ हो तो आपस में नहीं बनती। तलाक भी संभव है।

केतु साथ हो तो परिणाम ठीक रहेंगे। लेकिन जीवनसाथी थोड़ा जिद्दी स्वभाव का होता है। एकादशेश मंगल अष्टम भाव में हो तो मांगलिक होने पर भी विशेष प्रभाव नहीं रहता। आयु उत्तम होगी, लेकिन आर्थिक मामलों में मिली-जुली स्थिति रहती है। मित्रों, भाइयों से ‍मदद मिलती है। चंद्र साथ हो तो धन के मामलों में‍ मिली-जुली स्थिति रहती है। बुध साथ हो तो भाग्योन्नति में रुकावट आती है। प्रयत्नपूर्वक अच्छी सफलता नहीं मिल पाती।

गुरु साथ हो तो पति-पत्नी में कलह, बार-बार स्थानांतरण होता रहता है। स्थायित्व की कमी रहती है। शुक्र साथ हो तो ऐसा जातक भोगी किस्म का होता है। विद्या में रुकावटें आती रहती हैं। शनि साथ हो तो आयु तो ठीक रहती है लेकिन एक्सीडेंट के योग बनते रहते हैं। राहु साथ हो तो गुप्त रोग संभव। केतु साथ होने पर ऑपरेशन की नौबत आती है।

लेखक के बारे में
पं. अशोक पँवार 'मयंक'
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