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ज्योतिष का सबसे अशुभ और भयावह योग है यमघंटक, जानिए कब और क्यों होता है इसका असर

Updated: गुरुवार, 11 अप्रैल 2019 (14:35 IST)
मौत के समान कष्ट देता है 'यमघंटक योग, ज्योतिष का सबसे ज्यादा घातक, अशुभ और दुष्ट योग 
 
ज्योतिष का सबसे अधिक घातक, अशुभ और दुष्ट योग है 'यमघंटक', नहीं करें इसमें मंगल कार्य  
 
मृत्युतुल्य कष्ट देता है महाअशुभ 'यमघंटक योग' 
 
क्या होता है यमघंटक योग, इस योग में क्यों मनाही है शुभ मांगलिक कार्य, जानिए 
 
ज्योतिष के सबसे अशुभ योगों में यमघंटक योग है। इस योग में शुभ कार्य वर्जित होते हैं अर्थात इस योग में व्यक्ति के किए गए शुभ कार्यों में असफलता की आशंका बढ़ जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या होता है यमघंटक योग। इस योग में शुभ एवं मांगलिक कामों को न करने की बात कही गई है। 
 
ज्योतिष के अनुसार किसी भी कार्य को करने हेतु शुभ योग-संयोगों का होना आवश्यक होता है। शुभ समय का चयन तिथि, नक्षत्र, चंद्र स्थिति, योगिनी दशा और ग्रह स्थिति के आधार पर किया जाता है।
 
मंगल कार्यों को करने के लिए त्याज्य माने गए इन योगों का निर्धारण करने के कुछ नियम बताए हैं, जहां पर इनके होने की स्थिति को बताया गया है। अत: शुभ कामों को करने के लिए इन अशुभ योगों को त्यागना चाहिए।
 
यात्रा, बच्चों के लिए किए जाने वाले शुभ कार्य तथा संतान के जन्म समय में भी इस योग का विचार किया जाता है और यदि योग उपस्थित हो तो यथासंभव, कार्यों को टालना उचित है, संतान जन्म तो ईश्वरीय देन है परंतु यदि यमघटंक योग हो तो विद्वान ब्राह्मणों से इसकी शांति करवानी चाहिए। 
 
वशिष्ठ ऋषि द्वारा फलित ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि दिवसकाल में यदि यमघंटक नामक दुष्ट योग हो तो मृत्युतुल्य कष्ट हो सकता है, परंतु साथ ही रात्रिकाल में इसका फल इतना अशुभ नहीं माना जाता है। 
 
क्यों इतना अशुभ और भयावह है यमघंटक योग, जानिए कैसे बनता है 
कैसे बनता है यमघंटक योग, क्यों है अशुभ...
 
मंगल कार्यों को करने के लिए त्याज्य माने गए इन योगों का निर्धारण करने के कुछ नियम बताए हैं, जहां पर इन के होने की स्थिति को बताया गया है। अशुभ योगों को देखने के लिए भी इन्हीं तथ्यों के आधार पर पता किया जा सकता है।

तो आइए, समझते हैं कि कब और कैसे बनता है यमघंटक योग :-
 
* रविवार के दिन जब मघा नक्षत्र का संयोग बनता है तो यमघंटक योग का निर्माण होता है। 
 
* सोमवार का दिन हो और उस दिन विशाखा नक्षत्र होने पर इस योग से यमघंटक योग का निर्माण होता है।
 
* मंगलवार के दिन आर्द्रा नक्षत्र का संयोग होने पर यमघंटक योग की स्थिति उत्पन्न होती है।
 
* बुधवार के दिन जब मूल नक्षत्र का संयोग होने पर इस योग का निर्माण माना जाता है।
 
* बृहस्पतिवार के दिन यदि कृतिका नक्षत्र का मिलान हो जाने पर यमघंटक नक्षत्र बनता है।
 
* शुक्रवार के दिन अगर रोहिणी नक्षत्र का उदय होता है तो यह भी यमघंटक की स्थिति होती है।
 
* शनिवार के दिन अगर हस्त नक्षत्र की स्थिति बनती है तो यह स्थिति भी इसी योग का निर्माण करती है।
 
परंतु रात्रिकाल में यमघंटक योग इतना अशुभ नहीं माना जाता है। वैसे शुभ कार्यों के प्रारंभ में भद्रा काल से बचना चाहिए और चर, स्थिर लग्नों का ध्यान रखना चाहिए। 
लेखक के बारे में
श्री रामानुज

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