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Malmas vs Kharmas: वर्ष में 2 बार क्यों आता है मलमास या खरमास, क्या होता है यह

Written By WD Feature Desk
Updated: शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 (09:45 IST)
What is Malmas vs Kharmas: मलमास (अधिक मास) या खरमास हिंदू पंचांग में एक महत्वपूर्ण समय होता है, जो हर साल दो बार आता है। यह एक खास खगोलीय स्थिति का परिणाम है, जो भारतीय कैलेंडर और ज्योतिषशास्त्र के अनुसार निर्धारित होता है।ALSO READ: Kharmas March 2026: खरमास कब से हो रहा है प्रारंभ, क्या महत्व है इसका?

मलमास को अधिक मास भी कहा जाता है और यह एक ऐसा महीना होता है जिसमें कोई शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या नए व्यापार की शुरुआत नहीं की जाती। इसी तरह खरमास सूर्य के विशेष राशि परिवर्तन से जुड़ा हुआ होता है, जो पवित्र समय की शुरुआत करता है। आपको बता दें कि इस साल 2026 का अगला खरमास 15 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है, जो कि लगभग एक महीने तक चलेगा यानी 14 अप्रैल 2026 को समाप्त होगा।

इस लेख में हम जानेंगे कि मलमास और खरमास क्या होते हैं, इनका महत्व क्या है और क्यों यह साल में दो बार आते हैं। 

 

यहां इनका पूरा गणित और महत्व दिया गया है:

 
 

1. खरमास (सूर्य की स्थिति)

खरमास साल में दो बार आता है। यह तब होता है जब सूर्य बृहस्पति (Guru) की राशियों- धनु (Sagittarius) और मीन (Pisces) में प्रवेश करता है।
 

क्यों आता है? 

ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य अपने गुरु (बृहस्पति) की सेवा में उनकी राशियों में जाता है, तो सूर्य का तेज कम हो जाता है। बृहस्पति की राशि में सूर्य को 'मद्धम' माना जाता है।
 

कब-कब आता है? 

1. मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी (जब सूर्य धनु राशि में हो)।
 
2. मध्य मार्च से मध्य अप्रैल (जब सूर्य मीन राशि में हो)।
 

इसमें क्या होता है? 

खरमास का संबंध सूर्य के धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश से होता है। जब सूर्य इन राशियों में प्रवेश करता है, तब यह समय खरमास कहलाता है। इस समय विशेष रूप से मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि नहीं किए जाते। इसे 'सौर मास' की अशुद्धि माना जाता है।
 

2. मलमास / अधिक मास (चंद्रमा की चाल)

मलमास (जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं) हर साल नहीं आता, बल्कि यह हर तीसरे साल (लगभग 32 महीने बाद) आता है।
 

क्यों आता है?


चंद्रमा का वर्ष 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष (सूर्य का साल) 365 दिनों का। इन दोनों के बीच हर साल 11 दिनों का अंतर आ जाता है। तीन सालों में यह अंतर लगभग 1 महीना (33 दिन) हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है।

 

क्या होता है?

चूंकि इस महीने का कोई स्वामी ग्रह नहीं था, इसलिए भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम दिया-पुरुषोत्तम मास। इसमें पूजा-पाठ और दान का फल अनंत गुना मिलता है, लेकिन सांसारिक शुभ कार्य नहीं किए जाते।ALSO READ: क्या तीसरा एंटी क्राइस्ट आ चुका है? नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

 

मुख्य अंतर: एक नजर में

विशेषता: खरमास (Kharmas)

कारण: सूर्य का धनु या मीन राशि में जाना। 
आवृत्ति: साल में 2 बार।
अवधि: हमेशा 1 महीना (लगभग 30 दिन)।
मान्यता: सूर्य का तेज कम होना।
 

विशेषता: मलमास / अधिक मास (Malmas)

कारण: चंद्र और सूर्य वर्ष के दिनों का अंतर।
आवृत्ति: लगभग हर 3 साल में 1 बार।
अवधि: पूरा एक अतिरिक्त महीना।
मान्यता: समय का संतुलन बनाना।

विशेष टिप: खरमास में मांगलिक कार्य भले ही वर्जित हों, लेकिन यह समय सूर्य देव की उपासना और दान-पुण्य के लिए बहुत श्रेष्ठ माना जाता है।

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