चंद्रमा का वर्ष 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष (सूर्य का साल) 365 दिनों का। इन दोनों के बीच हर साल 11 दिनों का अंतर आ जाता है। तीन सालों में यह अंतर लगभग 1 महीना (33 दिन) हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है।
चूंकि इस महीने का कोई स्वामी ग्रह नहीं था, इसलिए भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम दिया-पुरुषोत्तम मास। इसमें पूजा-पाठ और दान का फल अनंत गुना मिलता है, लेकिन सांसारिक शुभ कार्य नहीं किए जाते।ALSO READ: क्या तीसरा एंटी क्राइस्ट आ चुका है? नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता