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सूर्य संक्रांति का धार्मिक महत्व: इस दिन करें ये अचूक उपाय, सूर्यदेव की कृपा से दूर होंगे संकट

Updated: सोमवार, 17 अगस्त 2026 (08:59 IST)
Singh Sankranti Puja: सूर्य देव का एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करना 'संक्रांति' कहलाता है। जब सूर्य देव कर्क राशि की अपनी यात्रा पूरी करके सिंह राशि में कदम रखते हैं, तो इसे सिंह संक्रांति कहा जाता है। इसी पावन दिन से सूर्य देव 'दक्षिणायन' होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायन का समय देवताओं की रात्रि माना जाता है। यही कारण है कि इस दौरान जप, तप, ध्यान और परोपकार का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं इस पावन पर्व का महत्व, सही पूजन विधि और वे अचूक उपाय जो आपके जीवन से सारे संकट दूर कर सकते हैं।
 

पवित्र स्नान: मन और शरीर की शुद्धि का पहला कदम

सिंह संक्रांति के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ में स्नान करना सर्वोत्तम माना गया है। यदि बाहर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
 
स्नान के बाद साफ-सुथरे (संभव हो तो लाल या पीले) वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान करें। ऐसा करने से शरीर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है।
 
दान का महात्म्य: संचित पापों का नाश और अक्षय पुण्य
 
संक्रांति के अवसर पर निस्वार्थ भाव से किया गया दान सीधा ईश्वर को समर्पित होता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार ये वस्तुएं दान करें:
 
विशेष दान सामग्री: गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल वस्त्र, मौसमी फल और जल से भरा मिट्टी का घड़ा।
 
सेवा कार्य: किसी भूखे या जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक भोजन कराएं। यह केवल धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है जो आपको अक्षय पुण्य प्रदान करती है।
 

पूजन विधि और सूर्य देव को अर्घ्य देने का तरीका

अर्घ्य की विधि: तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें। उसमें थोड़ा सा लाल चंदन या रोली, अक्षत (चावल), लाल फूल और थोड़ा सा गुड़ मिलाएं।
 
अर्घ्य देना: सूर्य देव के दर्शन करते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाकर जल अर्पित करें। ध्यान रखें कि जल की धार आपके पैरों पर न गिरे।
 
मंत्र और पाठ: जल चढ़ाते समय "ॐ घृणि: सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्याष्टक का पाठ करें।
 
शिव-विष्णु पूजा: इस दिन सूर्य देव के साथ-साथ भगवान विष्णु और महादेव की पूजा करने से आत्मविश्वास और आध्यात्मिक बल में जबरदस्त वृद्धि होती है।
 

सिंह संक्रांति पर किए जाने वाले अचूक उपाय

मान-सम्मान पाने के लिए: सूर्य संक्रांति के दिन तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़ा सा गुड़ और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
 
आरोग्य और ऊर्जा के लिए: इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का 3 बार पाठ करें। ऐसा करने से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
 
पितृ दोष और राहु-केतु शांति के लिए: जल से भरे घड़े और काले तिल के साथ गुड़ का दान किसी मंदिर में या ब्राह्मण को करें।
 

दिन भर ध्यान रखने योग्य बातें

 
सिंह संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह अपनी आत्मा को शुद्ध करने, संयम अपनाने और समाज कल्याण के पथ पर चलने का एक स्वर्णिम अवसर है।
 

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