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साल की पहली संकष्टी चतुर्थी आज, तिलकुटा चौथ के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Updated: शुक्रवार, 21 जनवरी 2022 (12:38 IST)
आज साल की पहली संकष्टी चतुर्थी है। संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष में आती है। माघ मास की (Magh Month Chaturthi) यह चतुर्थी तिलकुटा चौथ भी कहलाती है। इसे संकष्टी गणेश चतुर्थी (Til Sankashti Chauth), सकट (Sakat Chaturthi 2022), तिल चतुर्थी, तिलकूट चतुर्थी तथा वक्रतुंड चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता हैं।

इस दिन श्री गणेश का पूजन (Ganesh Chaturthi) और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूर्ण होता हैं। अलग-अलग शहरों के अनुसार चंद्रोदय के समय में कुछ मिनट का अंतर जरूर हो सकता है। पंचांग के अनुसार आज तिलकुटा या सकट चौथ के पूजन के लिए चंद्रोदय रात्रि 09.00 बजे होगा।  चौथ का पूजन तो दोपहर तक हो जाएगा, किंतु बिना चंद्रमा को अर्घ्य दिए आप पारण नहीं कर पाएंगे। अत: आपको रात्रि 9 बजे तक का इंतजार करना होगा।
 
तिलकुटा चौथ के शुभ मुहूर्त-Til Sankashti Chauth Muhurat
 
- माघी तिलकुटा चतुर्थी 2022 : दिन शुक्रवार, 21 जनवरी
चतुर्थी तिथि का शुरुआत- प्रातः 08.51 मिनट से 
चतुर्थी तिथि का समापन- 22 जनवरी, शनिवार प्रातः 09.14 मिनट पर।
चंद्रोदय पूजन- शुक्रवार रात 9:00 बजे से।
सिद्धि योग का समय- 21 जनवरी को (Sidhhi Yoga) 03.05 मिनट तक, तत्पश्चात शोभन योग (Shobhan Yoga)।
चौथ पूजा का शुभ समय- प्रात: 09:43 के बाद से। 
शुक्रवार के दिन का शुभ मुहूर्त समय दोपहर 12.11 मिनट से दोपहर 12.54 मिनट तक रहेगा। 
राहुकाल- 10.30 मिनट से 12 बजे तक।
 
ऐसे करें चतुर्थी की पूजा- Chaturthi Puja Vidhi 
 
- प्रात:काल स्नान के पश्‍चात एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान श्री गणेश की मूर्ति की स्थापना करें। 
- चांदी के श्री गणेश का अभिषेक करें। 
- अगर चांदी के नहीं है तो पीतल, तांबे, या मिट्टी के गणेश भी पूज सकते हैं। अगर वह भी नहीं तो तस्वीर से काम चलाएं। 
- भगवान श्री गणेश को पीले वस्त्र चढ़ाएं। 
- श्री गणेश प्रतिमा को लाल रोली, कलावा, फूल, हल्दी, दुर्वा, चंदन, धूप, घी आदि पूजन सामग्री अर्पित करें।
- इसके बाद पूरा दिन निर्जला व्रत रखें। इस दिन तिल का विशेष महत्व है, तिल और गुड़ मिलाकर प्रसाद बनाएं तथा श्री गणेश को भोग लगाएं। 
- आज के दिन गरीबों को तिल, गुड़ आदि का दान दें।
- भगवान श्री गणेश के मंत्रों का जाप करें।
- पूजा के साथ श्री गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश चालीसा का पाठ करें। 
- इस दिन में अथवा गोधूली बेला में श्री गणेश दर्शन अवश्य करें। 
- मान्यतानुसार इस दिन से प्रतिदिन श्री गणेश नामावली का वाचन किया जाए तो अनेक प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।  
- रात्रि में तिल के लड्डू का भोग चंद्रमा को भी लगाएं और इसी लड्डू से व्रत खोलें। 
- श्री गणेश चौथ की कथा पढ़ें। 

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Ganesha

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