'वेबदुनिया' के पाठकों के लिए 'पाक्षिक-पंचांग' श्रंखला में प्रस्तुत है चैत्र कृष्ण पक्ष का पाक्षिक पंचांग- 'पाक्षिक-पंचांग': चैत्र कृष्ण पक्ष संवत्सर- विरोधकृत संवत्- 2075 शक संवत् :1940 माह- चैत्र पक्ष- कृष्ण पक्ष (22 मार्च से 5 अप्रैल तक) ऋतु: वसंत रवि: उत्तरायणे गुरु तारा- उदित स्वरूप शुक्र तारा- उदित स्वरूप सर्वार्थ सिद्धि योग- 23 मार्च, 25 मार्च, 30 मार्च, 4 अप्रैल, 5 अप्रैल अमृतसिद्धि योग- अनुपस्थित द्विपुष्कर योग- अनुपस्थित त्रिपुष्कर योग- अनुपस्थित रविपुष्य योग- अनुपस्थित गुरुपुष्य योग- अनुपस्थित एकादशी- 31 मार्च (पापमोचिनी एकादशी व्रत) प्रदोष- 2 अप्रैल (भौम प्रदोष) भद्रा- 23 मार्च (उदय-अस्त), 26 मार्च (उदय)- 27 मार्च (अस्त), 30 मार्च (उदय-अस्त), 3 अप्रैल (उदय-अस्त) पंचक: 1 अप्रैल को प्रारंभ मूल- 26 मार्च से प्रारंभ- 28 मार्च को समाप्त अमावस्या- 5 अप्रैल ग्रहाचार: सूर्य- मीन, चंद्र- (सवा दो दिन में राशि परिवर्तन करते हैं), मंगल-वृष, बुध-कुंभ, गुरु-वृश्चिक (29 मार्च से धनु राशि में), शुक्र-कुंभ, शनि-धनु, राहु-मिथुन, केतु-धनु व्रत/त्योहार: 25 मार्च- रंगपंचमी, 27 मार्च- शीतला सप्तमी (बसौड़ा), 5 अप्रैल-चंद्र वर्ष 2075 पूर्ण (विशेष-उपर्युक्त गणनाओं में पंचांग भेद होने पर तिथियों/योगों में परिवर्तन संभव है।) - ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com ALSO READ: होली के धुएं से मिलता है देश की सत्ता का संकेत, इस बार ध्यान रखें, भद्रा के बाद ही करें होलिका दहन