sundarkand

चंद्रमा : कलाएं बिखेरता समय का राजा, घटता-बढ़ता कम और ज्यादा, 7 अनजाने तथ्य

Updated: रविवार, 16 जून 2019 (16:39 IST)
1. भारतीय कालगणना ज्योतिर्विद्या पर आधारित हैं। माहों, तिथियों, पर्वों आदि का निर्धारण बेहद सूक्ष्म विचारों के आधार पर किया गया है। चंद्रमा इसका आधार है। चंद्रमा मन का द्योतक है। पृथ्वी के समीप या दूर उसकी स्थिति और सूर्य का प्रकाश लेकर चमकने की उसकी नियति मनुष्य ही नहीं, प्राणियों को भी प्रभावित करती है। 
 
2. चंद्रमा जब जिस नक्षत्र के साथ विशेष संबंध (दूरी या कोण) बनाता है, तब ज्योतिष की भाषा में उसे चंद्रमा का नक्षत्र कहते हैं।महीनों का निर्धारण ऋषियों व ज्योतिर्विदों ने इसी आधार पर किया है। पूर्णिमा चंद्रमा की सबसे सशक्त तिथि मानी गई है। इस दिन वह अपनी सभी कलाएं बिखेरता है। 
 
3. इस दिन के साथ जिस नक्षत्र का उदय होगा, संबंधित माह उसी नाम से संबोधित होगा। जैसे जिस पूर्णिमा को 'चित्रा' नक्षत्र का उदय होता है वह माह चैत्र कहलाता है। एक नक्षत्र छोड़कर अगली पूर्णिमा का नक्षत्र होगा 'विशाखा' तब वह माह वैशाख कहलाएगा। इसी प्रकार 'ज्येष्ठा' से ज्येष्ठ, 'पूर्वाषाढ़' से आषाढ़, 'श्रवण' से श्रावण इत्यादि। 
 
4. कभी-कभार वर्ष में तेरह माह भी होते हैं। इस वर्ष में दो माह एक ही नाम के रहते हैं। यह वर्ष अधिक मास का कहलाता है। एक ही नाम के दो माह होने का कारण यह है कि इसकी दो पूर्णिमा एक ही नक्षत्र से अधिशासित रहती हैं। 
 
5. इसी तरह कुछ अंतराल के बाद कोई वर्ष क्षयमास का भी होता है अर्थात ग्यारह माह का वर्ष। क्षयमास की पूर्णिमा में उस वर्ष पूर्ववर्ती अथवा पश्चवर्ती नक्षत्र का उदय रहता है इसलिए एक माह कम हो जाता है। 
 
6. इस सूक्ष्म निर्धारण के कारण चाँद वर्ष तथा सौर वर्ष का सामंजस्य बना रहता है। सौर वर्ष 365.25 दिन का होता है जबकि चांद वर्ष 354 दिन का। इसी वजह से प्रत्येक तीसरे वर्ष एक माह का अंतर आ जाता है। अधिक मास इसी अंतर को पाटता है। 
 
7. इस व्यवस्था से त्योहारों-तिथियों में मौसम-ऋतुओं का सामंजस्य बना रहता है। हिजरी सन्‌ में ऐसी व्यवस्था नहीं है। संवत, माह, तिथियों आदि की गणनाएं भारत में जिस बारीकी से हुई हैं, उसे देखकर विश्व के कई विज्ञानवेत्ता दांतों तले उंगली दबाते हैं।  
 

Show comments

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश, 12 राशियों में किसकी चमकेगी किस्मत और किसे रहना होगा सावधान?

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश, 5 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन; धन-करियर में मिल सकता है बड़ा लाभ

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 26 अगस्‍त 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

अंक दर्शन : 2026 की राखी और संस्कारों में छिपी ग्रह ऊर्जा

रक्षाबंधन 2026: भाई की कलाई पर सजाएं उसकी राशि के अनुसार लकी राखी

बुध का नक्षत्र परिवर्तन: शुक्र के नक्षत्र में प्रवेश करते ही इन राशियों पर बरसेगा पैसा! पढ़ें राशिफल

Rakhi muhurat: 28 अगस्त 2026: राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और चंद्र ग्रहण का सच

अगला लेख