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एकाद‍शी के दिन इन पुष्पों से करें विष्णुजी का पूजन, जानिए 17 काम की बातें...

Updated: मंगलवार, 31 अक्टूबर 2017 (13:21 IST)
*  ब्रह्माजी ने नारद को बताई थी एकादशी व्रत-पूजन की यह ‍विधि, आप भी जानें... 
 
कार्तिक माह भगवान विष्णु का महीना माना गया है। इस महीने में खासतौर पर विष्णु पूजन किया जाता है। कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी या हरि प्रबोधिनी एकादशी के  दिन निम्न फूलों से श्रीहरि भगवान विष्णु का पूजन करने की बात स्वयं ब्रह्माजी ने नारदजी से कहीं है। अत: निम्न सामग्री से श्रीहरि विष्णु का पूजन करने से मनुष्य के  जन्म-जन्मांतर के सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जानिए 17 काम की बातें..

ब्रह्म मुहूर्त में जब दो घड़ी रात्रि रह जाए तब उठकर शौचादि से निवृत्त होकर दंत-धावन आदि कर नदी, तालाब, कुआं, बावड़ी या घर में ही जैसा संभव हो स्नानादि करें, फिर भगवान की पूजा करके कथा सुनें। फिर व्रत का नियम ग्रहण करना चाहिए। उस समय भगवान से प्रार्थना करें कि हे भगवन! आज मैं निराहार रहकर व्रत करूंगा। आप मेरी रक्षा कीजिए। दूसरे दिन द्वादशी को भोजन करूंगा। तत्पश्चात भक्तिभाव से व्रत करें तथा रात्रि को भगवान के आगे नृत्य, गीतादि करना चाहिए। कृपणता त्याग कर बहुत से फूलों, फल, अगर, धूप आदि से भगवान का पूजन करना चाहिए। शंख जल से भगवान को अर्घ्य दें। इसका समस्त तीर्थों से करोड़ गुना फल होता है।  
 
1. जो मनुष्य कार्तिक मास में बिल्व पत्र से भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, वे ‍मुक्ति को प्राप्त होते हैं।
 
2. कार्तिक मास में जो मनुष्य तुलसी से भगवान का पूजन करते हैं, उनके 10,000 जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। 
 
3. जो मनुष्य अगस्त्य के पुष्प से भगवान विष्‍णु का पूजन करते हैं, उनके आगे इंद्र भी हाथ जोड़ता है। तपस्या करके संतुष्ट होने पर हरि भगवान जो नहीं करते, वह अगस्त्य के पुष्पों से भगवान को अलंकृत करते हैं। 
 
4. कार्तिक मास में तुलसी दर्शन करने, स्पर्श करने, कथा कहने, नमस्कार करने, स्तुति करने, तुलसी रोपण, जल से सींचने और प्रतिदिन पूजन-सेवा आदि करने से हजार करोड़ युगपर्यंत विष्णुलोक में निवास करते हैं। 
 
5. जो मनुष्य तुलसी का पौधा लगाते हैं, उनके कुटुम्ब से उत्पन्न होने वाले प्रलयकाल तक विष्णुलोक में निवास करते हैं।
 
6. जो मनुष्य कार्तिक मास में तुलसी का रोपण करता है और रोपी गई तुलसी जितनी जड़ों का विस्तार करती है उतने ही हजार युगपर्यंत तुलसी रोपण करने वाले सुकृत का विस्तार होता है। 
 
7. जिस किसी मनुष्य द्वारा रोपी गई तुलसी से जितनी शाखा, प्रशाखा, बीज और फल पृथ्वी में बढ़ते हैं, उसके उतने ही कुल जो बीत गए हैं और होंगे, वे 2,000 कल्प तक विष्णुलोक में निवास करते हैं। 

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8. जो मनुष्य कदम्ब के पुष्पों से श्रीहरि का पूजन करते हैं, वे कभी भ‍ी यमराज को नहीं देखते। 
 
9. जो भक्त गुलाब के पुष्पों से भगवान विष्णु का पूजन करते हैं, उन्हें मुक्ति मिलती है।
 
10. जो मनुष्य सफेद या लाल कनेर के फूलों से भगवान का पूजन करते हैं, उन पर भगवान अत्यंत प्रसन्न होते हैं। 
 
11. जो मनुष्य भगवान विष्णु पर आम की मंजरी चढ़ाते हैं, वे करोड़ों गायों के दान का फल पाते हैं। 
 
12. जो मनुष्य दूब के अंकुरों से भगवान की पूजा करते हैं, वे 100 गुना पूजा का फल ग्रहण करते हैं।
 
13. जो मनुष्य विष्णु भगवान को चंपा के फूलों से पूजते हैं, वे फिर संसार में नहीं आते। 
 
14. पीले रक्त वर्ण के कमल पुष्पों से भगवान का पूजन करने वाले को श्वेत द्वीप में स्थान मिलता है।
 
15. जो भक्त विष्णुजी को केतकी के पुष्प चढ़ाते हैं, उनके करोड़ों जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। 
 
16. जो मनुष्य शमी के पत्र से भगवान की पूजा करते हैं, उनको महाघोर यमराज के मार्ग का भय नहीं रहता। 
 
17. जो मनुष्य वकुल और अशोक के फूलों से भगवान विष्णु का पूजन करते हैं, वे सूर्य-चंद्रमा रहने तक किसी प्रकार का शोक नहीं पाते।
 

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