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Chaitra Amavasya 2026: चैत्र अमावस्या कब है क्या है इसका महत्व?

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 10 मार्च 2026 (14:02 IST)
Chaitra Amavasya Fasting and Worship: चैत्र अमावस्या हिन्दू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह की अमावस्या तिथि होती है, जो आम तौर पर मार्च या अप्रैल में आती है। चैत्र अमावस्या एक महत्वपूर्ण दिन है, जो चैत्र माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।ALSO READ: नवरात्रि में कैसे करें घटस्थापना? जानें कलश पूजन की संपूर्ण विधि

यह तिथि न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे कई सांस्कृतिक और पारंपरिक कारणों से भी मनाया जाता है। चैत्र माह हिन्दू कैलेंडर का पहला महीना होता है और इस दिन विशेष रूप से पितृ पूजा, व्रत, दान, और नववर्ष के उत्सव होते हैं।

इसके साथ ही यह दिन हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत) की शुरुआत का भी प्रतीक होता है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस बार चैत्र अमावस्या 18 मार्च और 19 मार्च को प्रतिपदा तिथि होने के कारण नवरात्रि और गुड़ीपड़वा का पर्व मनाया जाएगा।
  • चैत्र अमावस्या व्रत और पूजा
  • चैत्र अमावस्या का महत्व
  • चैत्र अमावस्या के दिन दान

इस बार चैत्र अमावस्या कब है?

 

18 मार्च 2026: बुधवार के मुहूर्त: 

 
चैत्र अमावस्या की तिथि 2026 में 18 मार्च, बुधवार को पड़ रही है।
 
मार्च 18, 2026, बुधवार को दर्श अमावस्या मनाई जाएगी। 
 
चैत्र, कृष्ण अमावस्या प्रारंभ- 18 मार्च को 08:25 ए एम से, 
समापन- 19 मार्च को 06:52 ए एम पर।
 
इस बार चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 मिनट से होगा। अत: 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ होगा तथा हिन्दू नववर्ष गुड़ीगड़वा पर्व भी मनाया जाएगा। 
 

चैत्र अमावस्या का महत्व:

 
1. पितृपक्ष (श्राद्ध) से जुड़ी पूजा: यह दिन पितरों को श्रद्धा और तर्पण अर्पित करने का दिन माना जाता है। विशेष रूप से पितृ पूजा और श्राद्ध कार्य इस दिन किए जाते हैं।
 
2. विशेष पूजा और व्रत: इस दिन विशेष रूप से गणेश पूजा, पितृ पूजन, शिव पूजा और अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। विशेष तौर पर शिव मंदिरों में इस दिन का महत्व बहुत अधिक है।
 
3. अंधकार से प्रकाश की ओर: अमावस्या का दिन तिथि के अनुसार अंधकार का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इसके बाद के दिनों में धीरे-धीरे चांद बढ़ता है, जो अच्छे दिनों और नए उत्साह का प्रतीक होता है। इसलिए इसे मानसिक और आत्मिक शुद्धि का समय भी माना जाता है।
 
4. दान कार्य: इस दिन लोग दान भी करते हैं, जैसे गरीबों को भोजन देना, वस्त्र वितरण करना या किसी अन्य रूप में पुण्य कर्म करना आदि कार्य प्रमुखता से किए जाते हैं।
 
अगर आप इस दिन विशेष पूजा या व्रत करने का विचार कर रहे हैं तो यह एक अच्छा अवसर है आत्मिक शांति और पितरों की आत्मा की शांति के लिए।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं ALSO READ: चैत्र नवरात्रि 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है? जानें कलश स्थापना का सही समय

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